
बार-बार जगाने के बावजूद भी नहीं खुल रही प्रशासन की नींद
शिवपुरी। कृषि उपज मंडी समिति शिवपुरी ने विगत वर्षों की तुलना में वर्तमान में टैक्स चोरी के मामले में सारे रेकॉर्ड तोड़ दिए हैं। मंडी द्वारा बनाए गए नए कारनामे में अहम भूमिका अप्रत्यक्ष रूप से प्रशासन भी निभा रहा है क्योंकि प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है। बताया जा रहा है कि प्रशासन सबकुछ जानकर भी अनजान बनने की भूमिका में बैठा हुआ है। सूत्रों की मानें तो मंडी में इस टैक्स चोरी के खेल को मंडी सचिव द्वारा प्रशासन की सांठगांठ से खुलेआम खेला जा रहा है और मंडी प्रशासन द्वारा रात के अंधेरे में वाहनों को निकालकर लाखों रुपए की टैक्स चोरी के गोरखधंधे को अमलीजामा पहनाया जाता है। किसान और हम्माल कई बार मंडी के अधिकारी व कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा चुके हैं। खासबात यह है कि पूर्व में तत्कालीन मंडी सचिव सहित कई कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने पर पुलिस एफआईआर तक हो चुकी है और वर्तमान सचिव को भी किसी मामले में निलंबित किया जा चुका है। उल्लेखनीय है कि कुछ माह पूर्व हम्मालों ने मंडी गेट पर जमकर नारेबाजी करते हुए मंडी सचिव सहित स्टाफ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। हम्मालों का कहना था कि मंडी के बाहर तौल होने के चलते उन्हें मजदूरी नहीं मिल रही है। मंडी में किसान माल बेचने नहीं आ रहा है, क्योंकि मंडी में उन्हें दाम कम मिल रहा है, जबकि मंडी के बाहर व्यापारी उनका माल ज्यादा कीमत में खरीद रहे हैं। हम्मालों ने कहा कि मंडी कर्मचारी सहित सचिव मंडी टैक्स की चोरी करवाकर जमकर भ्रष्टाचार कर रहे हैं। जानकारों की मानें तो मंडी में एक बोरी पर 100 से अधिक टैक्स लगता है इसी कारण कई व्यापारी मंडी में माल न खरीदते हुए मंडी के बाहर माल खरीद रहे हैं क्योंकि उन्हें मंडी टैक्स नहीं चुकाना पड़ता है और बाहर हो रही तुलावट से मंडी से करोडों रुपए के टैक्स की चोरी यह व्यापारी कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो व्यापारियों के साथ इस खेल में मंडी सचिव और स्टाफ मिला रहता है। मंडी के बाहर फड़ लगाकर व्यापारियों द्वारा खुलेआम किसान के माल की खरीददारी कर टैक्स चोरी की घटना को अंजाम दिया जाता है। बताया जाता है कि इस टैक्स चोरी के खेल में मंडी सचिव भी भागीदारी रखते हैं। बताया तो यहां तक जाता है कि बाहर हो रही तौल पर वे व उनके कर्मचारी 30 रुपए बोरी ले रहे हैं। मंडी सचिव पर आरोप है कि वे बाहर तुल रहे माल पर कोई कार्रवाई भी नहीं करते हैं, क्योंकि उनका व्यापारियों से पैसा बंधा हुआ है। इसके चलते बाहर हो रही तौल पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
आखिर कब तक होगी टैक्स चोरी ?
यहां बता दें कि समाचार पत्रों के माध्यम से मंडी में भ्रष्टाचार कर टैक्स चोरी के मामले को प्रमुखता से उठाया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद भी प्रशासन के कानों में जंू तक नहीं रेंग रही है। जबकि टैक्स चोरी के मामले में मंडी पिछले रेकॉर्ड को तोड़ चुकी है और राजस्व की गुल्लक को खुलेआम चूना लगाया जा रहा है। बावजूद इसके जिम्मेदार कोई कार्यवाही करने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। अब सवाल उठता है कि आखिर कब तक मंडी में यूं टैक्स चोरी का सिलसिला बदस्तूर जारी रहेगा।






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