

खुलेआम उजागर हो रही अधिकारियों की नलकूप खनन और पाइप लाइन बिछाने में आर्थिक घोटालों में सहभागिता
शिवपुरी। शिवपुरी में करोड़ोंं के सीवर प्रोजेक्ट को अधिकारियों की ऊपर तक की मिली भगत से मटियामेट कर दिया गया है। सांसद निधि, सीवर सहित अन्य मद के कार्यो में बिना टेण्डर एडवांस काम कराने के लिए बदनामी झेल रहे लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के निशंक अधिकारियों के एक रैकिट ने यहां सारी हदें पार कर रखी हैं, भाजपा शासन में इन्हे जमकर राजनैतिक प्रश्रय के साथ साथ सीई अण्डमान की भी खुली शह मिलने से हालात बिगड़ते चले गए। यहां जिला मुख्यालय पर सीवर से उखाड़ी गई सड़कों की मरम्मत के क्रम में उन पर स्प्रेडिंग और डब्लूबीएम के नाम पर पीएचई के अधिकारियों ने निर्माण एजेंसी के साथ मिलकर ऐसा खेल खेला कि सीधे सीधे 1 करोड़ 12 लाख की चपत सरकारी गुल्लक को लगा डाली गई। प्रभारी ईई एसएल बाथम के द्वारा अपने मातहत इंजीनियर एमडी गौड़ से शहर की इन करीब 46 सड़कों, जिनमें गली कूंचे भी शामिल है, के निर्माण के नाम पर जो कुछ कराया वह चौंकाने वाला है। अधिकारियों ने नलकूप खनन और पाईप लाइन बिछाई से लेकर अन्य मदों में भी जबर्दस्त आर्थिक घोटालों को अपनी सहभागिता से खुलेआम अंजाम दिलाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। यहां प्रभारी कार्यपालन यंत्री एसएल बाथम जिन पर पहले ही आर्थिक अपराध के मामले जांच में हैं उन्हें पूर्ण कालिक कार्यपालन यंत्री श्री जैन को हटवा कर यहां का प्रभारी बनाया गया जबकि ये सहायक यंत्री की पदीय योग्यता धारित करते हैं। इस विभाग के जिस उपयंत्री एमडी गौड़ को सीवर के निर्माण कार्य का जिम्मा ही जब नहीं सौपा गया था उस उपयंत्री श्री गौड़ से इन सड़कों के मापांकन करा डाले गए, और साईड पर जिन यंत्रियोंं ने सीवर का काम सम्हाला था उन्होंने इस माप पुस्तिका को हाथ तक नहीं लगाया। पीएचई के चीफ इंजीनियर श्री अण्डमान की भूमिका पर भी जमकर सवाल उठना शुरु हो गये हैं, क्योंकि वे प्रभारी ईई श्री बाथम की अनियमितताओं पर लीक से हटकर पर्देदारी करते रहे हैं।
फर्जीवाड़े में अधिकारियों की संलिप्तता साफ उजागर
सीवर के कार्य के दौरान डब्लूबीएम और मुरम स्प्रेडिंग कर बनाई बताई गई सड़कों के इस खेल का एक और चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया है जिससे इस फर्जीवाड़े में अधिकारियों की संलिप्तता साफ उजागर हो रही है। गौर करें कि अधीक्षण यंत्री द्वारा पत्र क्रमांक 2327 दिनांक 27 मई 16 से सीवर परियोजना प्रारम्भ से 27 मई 16 तक पदस्थ कार्यपालन यंत्री, सहायक यंत्री, उपयंत्रियों की जानकारी चाही गई थी जिसके लिखित जबाव में तत्कालीन ईई श्री जैन ने अधीक्षण यंत्री को पत्र क्रमांक 2513 दिनंाक 4 जून 16 को जो जानकारी भेजी थी उसमें उपयंत्री एमडी गौड का कहीं से कहीं तक सीवर निर्माण में कोई उल्लेख नहीं दर्शाया गया। जाहिर सी बात है कि उपयंत्री श्री गौड़ को कार्यपालन यंत्री श्री जैन के समय सीवर प्रोजेक्ट में कोई काम नहीं दिया गया था, फिर उन्होंने डब्लूबीएम और मुरम कार्य की एमबी कैसे संधारित कर दीं। सड़कों की जो एमबी एमडी गौड द्वारा संधारित की गई वे ईई श्री जैन के कार्यकाल की हैं, जबकि एक करोड़ 12 लाख से अधिक का ये भुगतान प्रभारी ईई श्री बाथम के समय में किया गया। यदि डब्लूबीएम और स्प्रेडिंग का काम श्री जैन के समय में हुआ होता तो उनके द्वारा नियमानुसार 10 प्रतिशत कार्य की चैकिंग भी उनके द्वारा की गई होती जो कहीं नहीं की गई, प्रभारी ईई श्री बाथम ने भी इन सब तथ्यों की घोर अनदेखी की गई। पिछली तिथि में कार्य का मापांकन दीगर साईड के इंजीनियर से फर्जी ढंग से चढ़वा कर आनन फानन में पेमेंट कर दिया जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रभारी ईई की है।
डब्लूबीएम और स्प्रेडिंग के इस कार्य की हकीकत यह है कि शहर में ये कार्य कराया ही नहीं गया फर्जी ढंग से ये सब किया गया। लोनिवि और नपा ने जिन सड़कों का सीवर से क्षतिग्रस्त होने के चलते निर्माण कर दिया उन सड़कों पर डब्लूबीएम और स्प्रेडिंग के कार्य को जल्दबाजी में चढ़वा दिया गया क्योंकि सड़क निर्माण के बाद डब्लूबीएम और स्प्रेडिंग के कार्य को कोई चाह कर भी प्रमाणित नहीं कर पाता, मगर अब जो दस्तावेजी साक्ष्य सामने आए हैं उनमें ये तमाम अधिकारी गले गले तक आकंठ डूबे नजर आ रहे हैं। आज भी उन स्थानों पर जांच कराई जाए जहां सड़कों का निर्माण अभी नहीं हुआ तो यह 1करोड़ 12 लाख का फर्जीवाड़ा स्वयं सिद्ध हो जाएगा। सीवर प्रोजेक्ट में धांधली की तो यह छोटी सी बानगी है ऐसे तमाम मामले यहां जांच की बाट जोह रहे हैं और प्रभारी ईई एवं चीफ इंजीनियर इन अनियमितताओं को दम से शह दिए जा रहे हैं।
534 के पृष्ठ क्रमांक 72 से 104 को परीक्षण में लिया जाए तो खुलेगी पोल
जो जानकारी सामने आई है उसके अनुसार पीएचई शिवपुरी के सीवर वर्क के दौरान डब्लूबीएम सड़क और स्पे्रङ्क्षडग के कार्य की माप एमबी क्रमांक 105 में दर्ज है, इसी प्रकार से एमबी 534 के पृष्ठ क्रमांक 72 से 104 को परीक्षण में लिया जाए जिसमें बिल का पास आर्डर दर्ज है तो जो तथ्य सामने आया है, उसके अनुसार सन् 2015 से 2016 तक की एमबी उपयंत्री श्री गौड़ ने ही चढ़ाई है और 7 अपे्रल 2017 में जब 25 वां बिल बना और कैशबुक व्हाऊचर क्रमांक 13 में जो भुगतान दर्शाया गया तब इंचार्ज सहायक यंत्री भी एमडी गौड़ ही थे, जिन्होंने प्रभारी ई ई श्री बाथम के कहने पर यह कालापीला कर डाला। दरअसल जो सड़कें अस्तित्व में ही नहीं थीं उन पर एक साथ साजिशन डब्लूबीएम और स्प्रेडिंग का कार्य दर्शा दिया गया। यह सारा गड़बड़झाला पिछली तिथियों में करने का तानाबाना बुना गया। विभाग द्वारा बनाए गए इस कार्य के 25 वें बिल से ठीक पहले के 31 मार्च 17 को बने 24 वे रनिंग बिल को देखा जाए तो इस बिल में सड़कों पर डब्लूबीएम और मिट्टी की स्प्रेडिंग का कार्य 31 मार्च 17 तक शून्य दर्शाया गया है। यदि मुरम और डब्लू बीएम का काम हुआ होता तो इसकी क्वांटिटी 24 वें रनिंग बिल में दर्शाई गई होती जो कि इस बिल में शून्य दर्शित है और एकदम से 25 वें बिल में अधिकारियों ने सांठगांठ कर 43444.02 मीटर स्क्वायर डब्लूबीएम और 3734. 17 क्यूविक मीटर स्प्रेडिंग का कार्य होना दर्शाते हुए एक करोड़ 12 लाख से अधिक का भुगतान कर दिया।






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