शिवपुरी। मध्यप्रदेश के विभिन्न लोक सेवा केन्द्रों में बरसों से कार्य कर रहे कर्मचारियों को निकालने की तैयारी शासन ने शुरू कर दी है। इन लोकसेवा केन्द्रों में विभिन्न पदों के लिए राज्य लोकसेवा अभिकरण द्वारा आवेदन मंगाया गया है। उक्त संस्था ने बाकायदा इसके लिए अखबारों में विज्ञापन तक दिया है। लोकसेवा केन्द्रों में कार्य कर रहे कर्मचारियों को चुनाव के दौरान वर्तमान सरकार द्वारा वचन पत्र में कुछ बहे तर करने का दावा करने वाली सरकार इस मामले में कुछ नहीं कर पा रही है। यह बात कम्प्यूटर ऑपरेटर महासंघ द्वारा जारी किए गए प्रेसनोट के माध्यम बताई। सरकार केवल किसानों के कर्जमाफी तक सीमित रह गयी अन्य समस्याओं को सरकार द्वारा प्राथमिकता नहीं दी गई। ऐसा ही एक मामला लोकसेवा केन्द्रों का है। शासन ने पुन: टेण्डरिंग की कवायद के बाद संपूर्ण मध्यप्रदेश के प्रत्येक तहसील स्तर के लोक सेवा केन्द्रों में काम कर रहे हजारों कम्प्यटूर ऑपरेटर, पीआरओ एवं इंचार्ज बेराजेगारी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। विदित हो कि संपूर्ण मध्यप्रदेश में 414 लोक सेवा केन्द्र संचालित हैं। जिनमें हजारों कर्मचारी कार्यरत हंै।
पक्षपात के लगाए आरोप, कहा-अभी लोकल स्तर का चुनाव बाकी है
प्रेसनोट जारी कर कम्प्यूटर ऑपरेटर महासंघ ने आरोप लगाया है कि शासन ने ठान लिया है कि हर हाल में ठेकेदारों को फायदा होना ही चाहिए लेकिन ऐसा क्या? यह एक ज्वलंत मुद्दा है आप देेखेंगे कि सरकार कोई भी हो बेरोजगारों का फायदा उठा कर उनका शोषण करते हुए एक ऐसे वर्ग को फायदा पहुंचाया जा रहा है जो पहले से साधन संपन्न है। अभी आने वाले समय में लोकल स्तर के चुनाव संपन्न होना बाकी है ऐसे में वर्तमान सरकार द्वारा इन सभी मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया तो लाखों अस्थाई कर्मचारियों की नाराजगी एवं विरोध के कारण लोकल स्तर के चुनावों में खासा असर देखने को मिल सकता है। इसके पूर्ववर्ती सरकार ने भी ऐसे कर्मचारियों पर ध्यान ना देकर उन्हें नाराज किया जिसका नतीजा राजपाट से हाथ धोना निकला। अब लोक सभा चुनाव बीत चुके है लोकल स्तर के चुनाव होना बाकी है। देखना होगा कि शासन इन जैसे लाखों कर्मचारियों को नाराज करती है या अपने पक्ष में करती है।





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