
अपने गृह क्षेत्र मुंगावली में केपी यादव को मिली कम बढ़त, कांग्रेस पिछोर सीट पर रही आगे
शिवपुरी। गुना-शिवपुरी लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी केपी यादव को संसदीय क्षेत्र के आठ विधानसभा क्षेत्रों में से सात पर विजयश्री हासिल हुई। श्री यादव कांग्रेस प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिधिया से सिर्फ पिछोर विधानसभा क्षेत्र में 15 हजार 780 मतों से पीछे रहे। भाजपा के विजयी प्रत्याशी केपी यादव को सबसे अधिक बढ़त गुना विधानसभा क्षेत्र और इसके बाद शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र में मिली। गुना में श्री यादव ने कांग्रेस प्रत्याशी सिंधिया पर 47 हजार से अधिक मतों से बढ़त बनाई जबकि शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र में उनकी बढ़त 29 हजार मतों से अधिक की रही।
खास बात यह है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में सिंधिया जीत अवश्य गए थे, लेकिन 1 लाख 21 हजार मतों की जीत के बाद भी वह जिला मुख्यालय की गुना और शिवपुरी सीट पर भाजपा प्रत्याशी जयभान सिंह पवैया से पीछे रहे थे। उस चुनाव में श्री पवैया ने गुना से कांग्रेस प्रत्याशी सिंधिया को 12 हजार से अधिक मतों से पराजित किया था। जबकि शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी की कांग्रेस प्रत्याशी पर बढ़त लगभग साढ़े चार हजार मतों की थी। इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में पराजय की कसक सिंधिया के मन में पूरे पांच साल रही और जब भी मौका मिलता तब वह यहां की हार की दुखी मन से चर्चा अवश्य करते और पूछते कि यह तो बताओ कि किस खता की मुझे आपने सजा दी है, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में सिंधिया की हार दोनों विधानसभा क्षेत्रों से बहुत अधिक बढ़ गई। 2014 में जहां वह 12 हजार से अधिक मतों से गुना से पराजित हुए थे वहीं इस बार हार का अंतर 4 गुना तक बढ़ गया और सिंधिया गुना विधानसभा क्षेत्र से 47 हजार 106 मतों से पराजित हुए। भाजपा प्रत्याशी यादव ने यहां से 94 हजार 263 मत प्राप्त किए जबकि सिंधिया कुल 47 हजार 157 मत ही बटोर सके। खास बात यह रही कि विधानसभा चुनाव में भी गुना से भाजपा की जीत हुई थी, लेकिन उस चुनाव में भाजपा 34 हजार मतों से विजयी रही थी, परंतु लोकसभा चुनाव में भाजपा की विजय का अंतर 13 हजार से अधिक हो गया। शिवपुरी विधानसभा क्षेत्रों में 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी यशोधरा राजे सिंधिया साढ़ेे 28 हजार से अधिक मतों से विजयी रही थी वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत का अंतर 29 हजार 708 मतों पर पहुंच गया। केपी यादव को यहां से 87 हजार 691 मत प्राप्त हुए जबकि कांग्रेस प्रत्याशी सिंधिया सिर्फ 57 हजार 983 मत ही ले सके। गुना और शिवपुरी के बाद सिंधिया को सबसे अधिक मतों की पराजय जिला मुख्यालय की एक ओर सीट अशोकनगर से मिली। यहां से सिंधिया 21 हजार 770 मतों से पराजित हो गए। उन्हें 53 हजार 501 मत प्राप्त हुए जबकि विजयी केपी यादव 75 हजार 271 मत बटोर ले गए। 2014 के लोकसभा चुनाव में सिंधिया को यहां से लगभग 20 हजार मतों की जीत हासिल हुई थी। विधानसभा में भी यहां से कांग्रेस ने भाजपा को लगभग 10 हजार मतों से पराजित किया था। विधानसभा चुनाव के 6 माह बाद ही सिंधिया जैसे मजबूत कांग्रेस प्रत्याशी अशोकनगर से पराजित हो गए। गुना शिवपुरी अशोकनगर के बाद सिंधिया को सबसे करारी पराजय चंदेरी विधानसभा क्षेत्र से मिली जहां वह भाजपा प्रत्याशी केपी यादव से 17 हजार 101 मतों से पीछे रहे। 2014 के लोकसभा चुनाव में वह यहां से 21 हजार मतों से विजयी रहे थे। 2018 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने लगभग 5 हजार मतों की जीत हासिल की थी, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में सिंधिया को जहां चंदेरी से 53 हजार 836 मत मिले जबकि विजयी प्रत्याशी केपी यादव को 70 हजार 937 मत प्राप्त हुए। पांचवे नम्बर पर केपी यादव बम्हौरी विधानसभा क्षेत्र से 11 हजार 83 मतों से जीते। विधानसभा चुनाव मेें यहां से कांग्रेस प्रत्याशी और वर्तमान मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया 28 हजार मतों से जीते थे, लेकिन वह सिंधिया को यहां से नहीं जिता पाए। 2014 के लोकसभा चुनाव में सिंधिया ने बम्हौरी से 15 हजार मतों की बढ़त बनाई थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में केपी यादव को जहां 75 हजार 137 मत मिले वहीं सिंधिया केवल 64 हजार 54 मत ही प्राप्त कर पाए। भाजपा प्रत्याशी केपी यादव को सबसे कम बढ़त अपने विधानसभा क्षेत्र मुंगावली से हासिल हुई जहां से वह केवल 11 हजार 21 मतों से जीते। हालांकि विधानसभा चुनाव में वह कांग्रेस प्रत्याशी से लगभग 2 हजार मतों से पराजित हो गए थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में सिंधिया ने मुंगावली से 23 हजार मतों की बढ़त बनाई थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी यादव को जहां 64 हजार 89 मत मिले वहीं सिंधिया केवल 53 हजार 68 मत ही ले पाए।
पिछोर ने रखी सिंधिया की इज्जत, जीत हासिल की
पिछोर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया 15 हजार से अधिक मतों से विजयी रहे। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी केपी सिंह यहां से 2200 मतों से विजयी रहे थे। श्री यादव पिछोर से लगातार पांचवी बार निर्वाचित हुए, लेकिन इसके बाद भी उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया। 2014 के लोकसभा चुनाव में सिंधिया ने यहां से 22 हजार मतों की बढ़त बनाई थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में सिंंधिया को पिछोर से जहां 85 हजार 233 मत मिले वहीं भाजपा प्रत्याशी केपी यादव को केवल 69 हजार 453 मत ही मिल पाए।
यह रहा अंतिम परिणाम
गुना शिवपुरी लोकसभा क्षेत्र में 16 लाख 75 हजार 224 मतदाताओं में से 11 लाख 78 हजार 423 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस संसदीय क्षेत्र में मतदान का प्रतिशत लगभग 70 रहा जो कि 2014 के मुकाबले 10 प्रतिशत अधिक था। इस बढ़े हुए मतदान के कारण ही संसदीय क्षेत्र में अप्रत्याशित परिणाम सामने आए हैं। यहां से भाजपा प्रत्याशी केपी यादव को जहां 6 लाख 14 हजार 49 मत मिले। सिंधिया ने 4 लाख 88 हजार 500 मत प्राप्त किए। दोनों प्रत्याशियों के बीच मतों के प्रतिशत में लगभग 11 प्रतिशत का अंतर रहा।
डाक मत पत्रों में भी यादव ने बढ़त बनाई
गुना शिवपुरी संसदीय क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी केपी यादव को 3 हजार 194 डाक मतपत्र मिले जबकि कांग्रेस प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया 2395 मत ही ले पाए। इस तरह से भाजपा प्रत्याशी केपी यादव ने डाक मतपत्रों मे 799 मतों की बढ़त बनाई।
23 राउण्ड में से सिर्फ दो राउण्ड में ही कांग्रेस आगे रही
गुना शिवपुरी ससंदीय क्षेत्र के 23 राउण्ड में से 21 राउण्ड में भाजपा प्रत्याशी केपी यादव ने कांग्रेस प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया पर बढ़त बनाई। हर राउण्ड के बाद उनकी जीत का अंाकड़ा बढ़ता गया और ऐसा कभी नहीं लगाा कि वह चुनाव हार सकते हैं और सिंधिया रिकवरी कर रहे हैं। भाजपा की यह विजय यात्रा 19 राउण्ड तक लगातार जारी रही। 20वें राउण्ड में अवश्य कांग्रेस प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 2446 मतों की बढ़त बनाई। 22वें राउण्ड में सिंधिया ने 538 मतों की बढ़त बनाने में सफलता प्राप्त की।
पांच का अंक सिंधिया के लिए प्रतिकूल साबित हुआ
अंकगणित के हिसाब से इस लोकसभा चुनाव में पांच का अंक कांग्रेस प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए प्रतिकूल साबित हुआ। गुना और ग्वालियर संसदीय क्षेत्र से 1957 के बाद से अब तक सिंधिया राजपरिवार के 22 सदस्य चुनाव जीत चुके हैं और वह हर चुनाव में विजयी रहे हैं, लेकिन 23वां चुनाव सिंधिया ने लड़ा और वह पराजित हुए। खास बात यह थी कि कल तारीख भी 23 थी जिसका अंकगणित से जोड़ करने पर अंक पांच आता है और महीना भी मई अर्थात पांचवा था। राजनीति में सिंधिया राजपरिवार के ज्योतिरादित्य सिंधिया पांचवे सदस्य हैं। उनके पहले उनकी दादी स्व. राजामाता विजयाराजे सिंधिया, पिता स्व. माधवराव सिंधिया, बुआ वसुंधरा राजे सिंधिया और यशोधरा राजे सिंधिया सक्रिय हैं। लेकिन पांचवे सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया परिवार के पराजित होने वाले पहले मुखिया हैं। हालाकि उनके पहले उनकी बुआ 1984 के लोकसभा चुनाव में भिण्ड से पराजित हो गईं थी और इसके बाद उन्होंने प्रदेश की राजनीति से तौबा कर ली थी तथा उन्होंने अपनी कर्मस्थली राजस्थान बना ली थी। इसके अलावा सिंधिया ने इस बार अपना पांचवा चुनाव लड़ा। इसके पहले वह 2001 के लोकसभा उपचुनाव, 2004, 2009 और 2014 के चुनाव में जीत चुके थे। परंतु पांचवे चुनाव में वह पराजित हो गए। इस तरह से कहा जा सकता है कि पांच का अंक ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए अनलकी साबित हुआ।






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