
6वीं पुण्यतिथि पर स्व.प्रो.चन्द्रपाल सिंह सिकरवार स्मृति में स्मृत्यांजलि का आयोजन, गरीब निर्धनों की हुई सेवा
शिवपुरी। आदर्श शिक्षक, अनुशासित जीवन और अनुशासन में रहकर हरेक व्यक्ति के प्रति सदैव समर्पित रहने प्रो.स्व.चन्द्रपाल सिंह सिकरवार की पावन पुण्यतिथि हमें आभास कराती है कि आज उनके पदचिह्नों पर चलने का दिन है, एक आदर्श शिक्षक के रूप में जो ख्याति स्व.प्रो.सिकरवार ने पाई थी वह अविस्मरणीय है और आज हम उनकी 6वीं पुण्यतिथि मनाते हुए उन्हें स्मृतियांजलि दे रहे है कि वह सदैव हमारी स्मृतियों में बने रहे और मरणोपरांत भी उनका अर्शीवाद और उनके बताए मार्ग पर हम चल सके, आदर्श शिक्षक होना ही स्व.प्रो.सिकरवार की पहचान थी हमें इस विचारधारा को अंगीकार करना होगा। उक्त उद्गार प्रकट किए प्रो.सिकरवार के अनुयायी एन.डी.गर्ग ने जो स्थानीय कर्मचारी भवन में प्रो.चन्द्रपाल ङ्क्षसह सिकरवार स्मृति सम्मान समारोह समिति द्वारा आयोजित 6वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित स्मृतियांजलि कार्यक्रम में अपने उद्गार प्रकट कर रहे थे। इस दौरान अन्य वक्ताओं में राजेन्द्र भारती, शिक्षक रतिराम धाकड़, डॉ.ए.के.मिश्रा आदि ने भी अपने विचार मनोभाव से प्रकट करते हुए स्व.प्रो.सिकरवार को स्मृतियांजलि उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर दी। इस अवसर पर अन्य गणमान्य नागरिक, शिक्षक व नगरवासी भी शामिल हुए जिन्होंने प्रात: 8 बजे से आयोजित अमृतवाणी पाठ में भाग लिया और तत्पश्चात शहर के मध्य हनुमान मंदिर में गरीब निर्धन निराश्रितों की सेवा करते हुए उनके घर से बनाकर लाए व्यंजन परोसते हुए भोजन कराकर सेवा कार्य किया। माधवचौक स्थित श्री हनुमान मंदिर में प्रोफेसर सिकरवार सर के शिष्यों की टोली द्वारा जरूरतमंद गरीबों के बीच भोजन प्रसादी वितरण का सेवा-कार्य में सभी ने सहयोग किया। यहां बता दें कि उक्त स्मृत्यान्जलि कार्यक्रम प्रोफेसर स्व.चंद्रपाल सिंह सिकरवार के रचनात्मक योगदान एवं उनकी गौरवमयी स्मृतियों के प्रति आदरांजलि व्यक्त करने के लिए प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है जिसमें अमृतवाणी का पाठ होता है एवं मुख्य.वक्ता द्वारा प्रोफेसर सी.पी.सिंह सिकरवार के जीवन-वृत पर संक्षिप्त विचार-कणिका प्रस्तुत की जाती है।






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