शिवपुरी। माननीय मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी शिवपुरी राधाकिशन मालवीय द्वारा जुए के एक प्रकरण में जुआरियों के विरूद्ध पुलिस द्वारा साक्ष्य प्रमाणित नहीं किए जाने पर जुए के आरोपी को न्यायालय ने बरी कर दिया। इस मामले में आरोपी पक्ष की ओर से पैरवी नव युवा एडण् अंकित वर्मा व विनय चौबे द्वारा संयुक्त रूप से की गई।
अभियोजन के अनुसार 31.12.16 को प्रआर विनोद कुमार लखन को मुखबिर द्वारा सूचना मिली कि दो बत्ती चौराहे पर ताश की गड्डी के साथ जुआ खेला जा रहा है इस सूचना पर पुलिस द्वारा मौके पर जाकर देखा तो वहां आर.भगवत चतुर्वेदी, विजय मीणा, पुष्पेन्द्र, राघवेन्द्र की मदद से जुआरियों को घेरकर पकड़ा गया जिसमें सचिन पुत्र मार्कस जिसके पास से 300 रूपये और ताश की गड्डी मिली, वकार पुत्र इकरार खान से 250 रूपये, कृष्णकांत पुत्र राकेश उपाध्याय से 350 रूपये व आशीष पुत्र हरिशंकर के सामने फड़ से 200 रूपये मिले व हारून पुत्र हनीफ के सामने फड़ से 400 रूपये बरामद किए गए। इस पर पुलिस ने धारा 13 सार्वजनिक ध्रूत अधिण् के तहत ताश की गड्डी 52 पत्ते और 1500 रूपये बरामद करते हुए जुआ एक्ट का मामला पंजीबद्ध किया। यह मामला माननीय न्यायालय के समक्ष आया तो यहां आरोपी जुआरी हारून पुत्र हनीफ द्वारा अपराध जुए को लेकर अस्वीकार किया गया तथा अभियुक्त हारून द्वारा धारा 313 दण्प्रण्संण्के अंतर्गत परीक्षण में निर्दोष होना व झूठा फंसाया जाना अभियुक्त की ओर से पैरवी करते हुए नवा युवा एडण् अंकित वर्मा एवं विनय चौबे द्वारा बताया गया। माननीय न्यायालय द्वारा जब प्रकरण की सुनवाई की गई तो इसमें पुलिस के राघवेन्द्र सिंह व विनोद द्वारा जुए को लेकर पुष्टि की गई लेकिन जब अभियुक्त की ओर से पैरवी एडण्अंकित वर्मा व विनय चौबे ने की तो उन्होंने माननीय न्यायालय के समक्ष अभियुक्त के बारे में स्वतंत्र किसी भी साक्षी ने संपुष्टि नहीं कीए ऐसे में पुलिस द्वारा जुए की गड्डी व बरामद राशि साक्ष्य विश्वसनीय नहीं रह जाती है वहीं अभियुक्त हारून की ओर से पैरवी करते हुए एडण्अंकित व विनय द्वारा किसी भी प्रकार की जब्ती अलग से नहीं की गई एवं पुलिस द्वारा जब्तशुदा राशि भी न्यायालय में प्रस्तुत नहीं की गई इसलिए नमूना सील के अभाव में तथा संपत्ति न्यायालय में प्रस्तुन न किये जाने से धारा 13 जुआ अधिण् का मामला अभियुक्त के विरूद्ध प्रमाणित नहीं होता है। इसलिए माननीय न्यायालय मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी राधाकिशन मालवीय द्वारा इस जुआ एक्ट के आरोपी हारून को मामले से बरी करने का निर्णय पारित किया गया।





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