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सीमा पर दुश्मन की गोली ने ललकारा है क्या सिंघों का देश कभी चूहों से हारा है : डॉ.कीर्ति काले

कवि सम्मेलन सम्पन्न

शिवपुरी। दिल्ली एन.सी.आर. के उपनगर नोयडा के सेक्टर 120 की प्रतीक लॉरेल एपोर्टमेंन्ट ओनर एशोसियेशन के संयोजन में गत रवीवार 20 अक्टूबर 2019 को एक विशाल कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया इसमें अंर्तराष्ट्रीय ख्याति की कवियत्री डॉ.कीर्ति काले, हास्य कवि सुन्हरीलाल वर्मा तुरंत, सुंदर कटारिया, नई दिल्ली, विनोद पांडे हरियाणा, नमिता नमन नोयडा के साथ शिवपुरी से घनश्याम योगी, अरुण अपेक्षित और उमा उदार ने अपनी सरस कविताओं से उपस्थित श्रोताओं का हृदय जीत लिया। शिवपुरी की इस कवि त्रिवेणी ने नोयडा के इस कवि सम्मेलन को अपनी रचनाओं के माध्यम से इतनी रस वर्षा की कि श्रोता उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा के लिये विवश हो गये।ं 
सरस्वती मॉ के चित्र पर पुष्पहार अर्पण और दीप प्रज्ज्वलन के उपरांत शिवपुरी के अरुण अपेक्षित ने सरस्वती वंदना का गायन किया-
सरस्वती मॉ वंदना मॉ,
नित वंदना,शत वंदना,
हम स्वरों की आरती से,
कर रहे हैं अर्चना।
इसके बाद मंच पर आसीन कवियों का एपोर्टमेंट ओनर एशोसियेशन के पदाधिकारियों यथा डॉ.आशीष गोयल, संदीप सिंह  रविन्द्र श्रीवास्तव आदि ने पुष्पहार से स्वागत किया। कवि गोष्ठी के प्रथम कवि के रूप में गुड़गांव हरियाणा के हास्य कवि सुंदर कटरिया ने अपनी अनेक हास्य रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को जम कर गुदगुदाया और हसाया तथा अनेक प्रकार के चोरों तथा उनकी चोरी के प्रकारों की चर्चा करते हुये चोरों के प्रशिक्षण के लिये विश्व-विद्यालय तक खोलने का परामर्श तक दे डाला। इसके बाद करैरा शिवपुरी के घनश्याम योगी को बुंदेली गीतों के पाठ के लिये आमंत्रित किया गया। उनके गीत- ‘‘जो है प्रेमचन्द्र को गांव,यहां है पीपल, बरिया की छांव ने श्रोताओं का मन जीत लिया। दिल्ली के विनोद पांडे ने भी इस अवसर पर अपनी अनेक हास्य रचनाओं का पाठ किया-
मेरे पिया गये हैं जेल,
वहां से भेजे हैं ईमेल,
तुम्हारी याद सताती है,
जिया में आग लगाती है।
इनके बाद काव्यपाठ के बाद शिवपुरी के उमा उदार को काव्य-पाठ के लिये आमंत्रित किया गया। आपकी व्यंग रचनाओं ने व्यवस्था पर करारी चोट की। अब काव्यपाठ की बारी नई दिल्ली के हास्य व वरिष्ठ कवि सुन्हरीलाल वर्मा तुरंत की थी। आपने अपनी अनेक हास्य रचनाओं के पाठ से श्रोताओं का मन जीत लिया-
खटिया चिपटा कर डबल बेड बना लेते हैं,
कोई रूठा हो तो चुपचाप मना लेते हैं,
चांद जैसा कोई टुकड़ा हो अगर पहलू में,
पास तंदूर के कूलर का मजा लेते हैं।
इनके बाद संचालन कर रहीं कवियत्री डॉ.कीर्ति काले ने अपने अनेक संवेदनशील गीतों का पाठ किया। उनके बेटी की विदाई के गीत और राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत गीतों ने श्रोताओं को खूब प्रभावित किया-
सीमा पर दुश्मन की गोली ने ललकारा है
क्या सिंघों का देश कभी चूहों से हारा है।
नोयडा की सुश्री नमिता नमन को चांद चैहरे में भी अपनी मॉ का चैहरा नजर आया-
चांद को जब भी देखती हूं मैं,
चैहरा मेरी मा का मुसकुरता है
अंत में कवि-सम्मेलन को अरुण अपेक्षित की गीतिकाओं और गीतों ने एक सरस पूर्णता प्रदान की-
जब बुरा वक्त हो तुम प्रतिक्षा करो,
आपदाओं से अपनी सुरक्षा करो,
धूर्तताओं के सर पर मुकुट जब बंधे,
धैर्य की अपनी उस दिन परीक्षा करो।
अपने उद्बोधन में वरिष्ठ कवि अरुण अपेक्षित ने कवि-सम्मेलनों के गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुये आयोजको को साधुवाद दिया कि उन्होंने इतना संुदर आयोजन किया जिसमें हास्य कविताओं का भी अपना एक स्तर था। रचनाओं में शालीनता और मर्यादाओं को कहीं भी भंग नहीं होने दिया गया। लगभग तीन घंटे तक चले इस कवि-सम्मेलन के अंत में आयोजकों के प्रतिनिधि द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया। कवि सम्मेलन सुनने आये श्रोताओं की अपार भीड़ ने कवि सम्नेलन का आनंद अंत तक लिया। 

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