शिवपुरी। जिले के करैरा तहसील के ग्राम पारागढ़ के ग्रामीणों और किसानों ने स्टोन क्रेशर के संचालन से फसलों को भारी नुकसान होने का आरोप लगाते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर स्टोन क्रेशर की लीज निरस्त करने और संचालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि आठ दिन के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर किसान आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करेंगे।
जानकारी के अनुसार, ग्राम पारागढ़ में सर्वे नंबर 355 पर संचालित स्टोन क्रेशर, जिसकी लीज खनिज विभाग से श्रीमती पूजा स्वटीक पत्नी पवन स्वटीक के नाम पर स्वीकृत बताई गई है, के संचालन से आसपास के किसानों की फसलों को नुकसान पहुंच रहा है।
ब्लास्टिंग और धूल से फसलों को नुकसान
ग्रामीणों का आरोप है कि स्टोन क्रेशर में लगातार ब्लास्टिंग और पत्थर तोड़ने का काम किया जा रहा है। इससे उड़ने वाली धूल, पत्थर और मलबा खेतों में खड़ी फसलों पर गिर रहा है। तेज कंपन के कारण किसानों के कच्चे मकानों में भी दरारें आने और गिरने का खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि धूल प्रदूषण और कंपन से क्षेत्र के लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
18 जुलाई को फसलें हुईं बर्बाद
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि 18 जुलाई 2026 को हुई ब्लास्टिंग के दौरान पत्थर खेतों तक पहुंच गए, जिससे किसानों की फसलों को भारी नुकसान हुआ। किसानों का दावा है कि कई खेतों में 100 प्रतिशत तक फसल नष्ट हो गई। उन्होंने नुकसान के वीडियो और फोटो भी आवेदन के साथ संलग्न करने की बात कही है।
पहले भी की गई थीं शिकायतें
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस मामले में कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को मौखिक और लिखित शिकायतें दीं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि 24 दिसंबर 2024 को खनिज अधिकारी शिवपुरी को स्टोन क्रेशर की स्वीकृति नहीं देने के संबंध में आवेदन दिया गया था, इसके बावजूद लीज स्वीकृत कर दी गई।
पुलिस में भी दर्ज हुई रिपोर्ट
ग्रामीणों के अनुसार, घटना की रिपोर्ट अमोलपठा पुलिस चौकी में दर्ज कराई गई है। आवेदन में बताया गया है कि पुलिस ने बीएनएस की धारा 324(4) के तहत कार्रवाई की है, लेकिन स्टोन क्रेशर संचालक के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
आठ दिन का अल्टीमेटम
ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि मामले की तत्काल जांच कर किसानों की फसलों के नुकसान का आकलन कराया जाए। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो सर्वे नंबर 355 स्थित स्टोन क्रेशर की लीज निरस्त कर संचालक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि आठ दिन के भीतर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई तो क्षेत्र के किसान धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।








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