
शिवपुरी। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सुश्री कामिनी प्रजापति ने चैक डिस्ऑनर के एक मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी जुगलकिशोर शर्मा पुत्र मथुरा प्रसाद शर्मा को छह माह के सश्रम कारावास और 2 लाख 26 हजार रूपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया है। इस मामले में अतुल शर्मा पुत्र रामेश्वरीदयाल शर्मा निवासी शांतिनगर ने न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया था। मामले में परिवादी की ओर से पैरवी अभिभाषक संजीव बिलगैया ने की।
प्रकरण के अनुसार मैसर्स कोठारी कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रो. जुगलकिशोर शर्मा ने परिवादी अतुल शर्मा से 2 लाख 25 हजार रूपए उधार लिए थे और इसके एवज में उन्हें 2 लाख 25 हजार रूपए का चैक दिया था। इस चैक को जब परिवादी ने बैंक में लगाया तो वह डिस्ऑनर हो गया। आरोपी को सूचना देने के बाद भी उसने चैक की राशि परिवादी को नहीं दी इससे व्यथित होकर परिवादी ने न्यायालय की शरण ली और न्यायालय में वर्ष 2013 में परिवाद प्रस्तुत किया। माननीय न्यायालय के समक्ष विचाराधीन प्रकरण में आरोपी की अनुपस्थिति के कारण मामले की सुनवाई लम्बे समय तक नहीं हो पाई। इस पर न्यायालय ने आरोपी को गिरफ्तारी वारंट से आहूत किया। वाद विचारण प्रकरण में उभय पक्ष की ओर से साक्ष्य अंकित करने के उपरांत अंतिम तर्क श्रवण कर निर्णय पारित किया गया। अभियुक्त के विरूद्ध धारा 138 परक्राम्य लिखित अधिनियम के अपराध के लिए छह माह के सश्रम कारावास और 2 लाख 26 हजार रूपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया है।






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