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आपदा प्रबंधन कार्यक्रम में छात्रों ने सीखा कैसे करें दूसराें की आपदा में मदद -shivpuri news

शिवपुरी। शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय शिवपुरी में 22 फरवरी को आपदा प्रबंधन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. जॉर्ज वी जोसेफ डिप्टी डायरेक्टर, डिजास्टर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, होम डिपार्टमेंट गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एवं अतिथि के रूप में एल बागरी कमांडेंट होमगार्ड, शिवपुरी एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. एचएस कुरैशी प्रभारी प्राचार ने की।
कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रभारी प्राचार्य डॉ. एचएस कुरैशी ने बताया की आपदा प्रबंधन हमारे जीवन के लिए बहुत ही दुखद क्षण होता है, जिसमें जन-धन की काफी हानि होती है। हमें इससे बचाव के तरीके अनिवार्य रूप से सीखना चाहिए और स्वयं की मदद करने के साथ-साथ हमें दूसरों की भी मदद आपदा के समय करनी चाहिए। इसके उपरांत डॉ. जॉर्ज. जोसेफ ने आपदा प्रबंधन के बारे में छात्रों को बताया की इन आपदाओं पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता यह कभी भी, कहीं भी, किसी भी जगह आ सकती हैं। हम सबको इन आपदाओं के समय क्या करना चाहिए? क्या नहीं करना चाहिए? यह विस्तार से समझाया गया। 
आपदाओं के बारे में उन्होंने बताया की बाढ़, भूकंप, सुनामी, चक्रवात, बिजली का गिरना, यह सारी आपदाएं ऐसी हैं कि इन परिस्थितियों में आम जन-जीवन पूर्ण रूप से अस्त-व्यस्त हो जाता है। लोग अपनी स्वयं की रक्षा नहीं कर पाते तथा मानसिक रूप से काफी विचलित हो जाते हैं, ऐसी परिस्थितियों में समाज के अन्य वर्गों द्वारा आपदा ग्रस्त क्षेत्र में जाकर की मदद दी जाती है, लेकिन जब हम दूसरों को मदद करने जा रहे हैं तो हमें यह अच्छी तरह समझना चाहिए कि हम यह मदद कैसे करें इसलिए हमको आपदा प्रबंधन कार्यक्रम के अंतर्गत आपदा से बचाव के तरीकों को समझना चाहिए। 
उन्होंने बताया मान लीजिए यदि भूकंप आता है तो आप सबसे पहले क्या करेंगे?  खुले मैदान में जाने का प्रयास कीजिए संभव नहीं है तो फर्नीचर, मेजो के नीचे छुप जाना चाहिए। बिल्डिंग में सुरक्षित स्थान पर पहुंच जाना चाहिए चाहिए और अपने शरीर के महत्वपूर्ण अंग( सिर )की एवं  इस तरीके से हम अपने जीवन की रक्षा कर सकते हैं। हमें प्रयास करना चाहिए कि हम भूकंप रोधी मकानों का निर्माण करें तथा इसी के साथ उन्होंने यह भी बताया की आपदा के समय हमें अपना धैर्य नहीं खोना चाहिए, क्योंकि बिना  धैर्य के हम काफी निराश हो सकते हैं और हम अपनी मदद भी नहीं कर पाते तथा दूसरों की मदद नहीं कर पाते, इसलिए हमें धैर्य रखना चाहिए। 
आगे जानकारी देते हुए उन्होंने बताया की केंद्र सरकार द्वारा आपदा प्रबंधन अधिनियम ,2005 के अंतर्गत अनिवार्य किया गया है कि भारत में एक पूरे देश का आपदा प्रबंधन कार्यालय होगा। सभी राज्यों में राज्य लेवल पर कार्यालय होगा तथा इसकी शाखाएं समस्त जिलों में होंगी एवं ग्रामीण स्तर पर पंचायतों तक आपदा प्रबंधन कार्यक्रम की पहुंच होगी। हम सबको नगर पालिका एवं स्वास्थ्य विभाग का सहयोग करते हुए कुछ अनिवार्य आपदा प्रबंधन ट्रेनिंग कोर्स को पूरा करना चाहिए, जिससे हम आवश्यकता के समय लोगों की मदद कर सके क्योंकि एक बार आपदा में फसने पर संबंधित क्षेत्र का काफी विकास रुक जाता है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कमांडेंट होमगार्ड, शिवपुरी एल बागरी ने बताया की होमगार्ड किस तरीके से आपदा प्रबंधन के द्वारा आपदा के समय लोगों की मदद होमगार्ड विभाग करता है। उन्होंने बताया कि यदि बाढ़ आ गई है तो हम लाइफ बॉय, रबर ट्यूब, तख्ते एवं खाली ड्रम, लाइफ जैकेट इत्यादि के द्वारा मुसीबत में लोगों की मदद कर सकते हैं।
 हम रस्से इत्यादि की सहायता से, हेलमेट के साथ भी हम विषम परिस्थितियों में लोगों की मदद करते हैं, लेकिन हम सब को यह समझना चाहिए कि जिस रस्सी को हम प्रयोग कर रहे हैं उससे हम कई प्रकार की गठान  के द्वारा उसके विभिन्न प्रयोग कर सकते हैं। उन्होंने बच्चों को विभिन्न प्रकार की नोट (गठान) बनाना सिखाया, जिसमें रीफ नोट, क्लोज हिज नोट, क्रॉस चेयर नोट (गठान) इत्याद के माध्यम से बच्चों को नोट बनाने की जानकारी दी, जो कि काफी महत्वपूर्ण एवं रोचक थी। उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताया कि सिविल डिफेंस आबादी का आठ परसेंट होना चाहिए तथा हम सबको विषम परिस्थितियों में आपातकाल के समय लोगों की मदद करनी चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन प्रोफेसर एमएस हिंडोलिया द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के काफी छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे तथा कार्यक्रम में मंच संचालन डॉ. रामजी दास राठौर द्वारा किया गया।
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