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नकली केबिल मामले में एफआईआर के बाद आगे नहीं बढ़ी कार्रवाई, एडवोेकेट तिवारी ने पुलिस महानिरीक्षक को लिखा पत्र / Shivpuri News

शिवपुरी। नगर पालिका मेसर्स मंगल पाइप एण्ड सेनेट्री स्टोर केे प्रोपराइटर मोेहन मंगल पर नकली केबिल सप्लाई के मामले में केस दर्ज करवाया था, लेकिन केस दर्ज होने के बाद मामले में विवेचना नहीं की गई। केस दर्ज हुए करीब एक साल होने को आ रहा है लेकिन दोषी अब तक बचे हुए हैं। मामले को लेकर एडवोकेट विजय तिवारी ने पुलिस महानिरीक्षक को पत्र लिखकर मामले की जांच वरिष्ठ स्तर से कराए जाकर कार्रवाई की बात कही है। 

एड तिवारी ने बताया कि 23 जनवरी को नगर पालिका परिषद के सहायक यंत्री रामदीप शर्मा ने कोतवाली में शिकायत दर्ज करवाई थी कि मेसर्स मंगल पाइप एण्ड सेनेट्री स्टोेर के प्रोपराइटर मोहन मंगल द्वारा फिनोलेक्स कंपनी की 4 एमएम तथा 6 एमएम बिजली केेबिल नगर पालिका शिवपुरी में सप्लाई की गई थी जिसकी गुणवत्ता पर शंकर होने पर उक्त केबिल की गुणवत्ता परीक्षण के लिए फिनोलैक्स कंपनी इंदौर भेजी गई थी जहां से उक्त केबिल नकली होने के संबंध में कंपनी के अधिकारियों द्वारा बताया गया था। इसके बाद सहायक यंत्री आरडी शर्मा द्वज्ञरा 23 जनवरी 19 को कोतवाली में शिकायत दर्ज कर केस दर्ज करवाया। 
केस दर्ज होने के बाद प्रकरण से संबंधित दस्तावेज आदि जब्त कर जब्ती पंचनामा बनाया गया। इसके बाद काफी समय बीत गया लेकिन कोतवाली पुलिस द्वारा इस प्रकरण में कोई कार्रवाई नहीं की जो कई संदेह को जन्म दे रहा है। इसके अतिरिक्त थाने में इस प्रकरण के अलावा अन्य कई आपराधिक प्रकरण वर्षों पूर्व से दर्ज है लेकिन जांच वर्षों व्यतीत होने के बाद भी कोई प्रगति नहीं हुई। 
एडवोकेट तिवारी ने बताया कि उक्त प्रकरण लाखों रुपए की धोखाधडी से जुड़ा हुआ है। इसमें शिवपुरी के प्रतिश्ठित व्यवसायी, तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष एवं नगर पालिका परिषद शिवपुरी के कर्मचारी के मिले होने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता। इस प्रकरण में शिकायतकर्ता रामदीन शर्मा तत्कालीन सहायक यंत्री 31 माचई 2020 को सेवेानिवृत्त हो चुके हैं तथा प्रकरण पंजीयबद्ध हुए 9 माह का समय भी हो चुका है किंतु थाना कोतवाली द्वारा उक्त प्रकरण में कोई जांच नहीं की। ऐसा लगता है कि पुलिस मामले में विवेचना प्रारंभ ही नहीं करना चाहती ताकि भ्रष्ट अधिकारियों पर कोेई कार्रवाई न होे सके। 
एड. तिवारी ने कहा कि पुलिस द्वारा प्रकरण को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है जिस कारण विवेचना किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अथवा एसआईटी से कराया जाना चाहिए जिससे कार्रवाई हो सकेै।
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