मामला नमो नगर कॉलोनी का
शिवपुरी। शहर में भू-माफिया पैर पसार रहा है और प्रशासन उसके आगे असहाय नजर आ रहा है। ये हम नहीं कर रहे हैं, हालात खुद व खुद बयां कर रहे हैं। शहर में नियम विरुद्ध अवैध कॉलोनियों का खुला खेल चल रहा है, लेकिन प्रशासन इस मामले में पूरी तरह से मौन बना हुआ है। भू-माफिया बैखौफ अंदाज में शहर में सक्रिय हैं, उनके द्वारा न केवल नालों पर कब्जे कर आलीशान भवन खड़े कर दिए गए बल्कि खेतों में भी अवैधानिक रूप से कॉलोनियां काटी जा रही हैं। इसकी ताजा नजीर बायपास स्थित केटीएम कॉलेज के पास नमोनगर कालोनी है, जिसमें कृषि भूमि में मकानों के प्लाट काटे जा रहे हैं। नवनिर्मित कॉलोनियों में कॉलोनाईजर्स द्वारा पूरी तरह से नियमों को दरकिनार किया जा रहा है। टाउन एण्ड कन्ट्री प्लान के नजरिए से देखा जाए तो पूरी की पूरी कॉलोनियां अवैध हैं।
खास बात यह है कि शहर में ऐसे लोगों द्वारा भी कालोनियां काटी जा रही हैं, जिन पर कालोनी बनाने का किसी प्रकार का रजिस्ट्रेशन और पंजीयन नहीं है, लेकिन प्रशासनिक सरंक्षण के चलते वे अपने अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे हैं। कालोनियों के इस खेल में ऐसे लोग भी कूद चुके हैं, जिनका पूर्व से कभी इस व्यवसाय से कोई नाता नहीं रहा है। ऐसे लोगों में एक शिक्षक कर्मचारी नेता का भी नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है, जो कि अपनी राजनैतिक पकड़ के चलते अवैध रूप से कालोनी काटने के व्यवसाय में उतर चुका है। बताया जाता है कि भू-माफिया ने इस शिक्षक नेता को इसलिए हिस्सेदार बनाया है ताकि उसके जरिए नवीन प्लाटों को कर्मचारियों को ठिकाने लगाया जा सके। यह शिक्षक नेता भू-माफिया की आशाओं पर खरा भी साबित हो रहा है, उसके द्वारा कर्मचारियों को विभिन्न तरह के लालच और प्रलोभन देकर अवैध कालोनियों में प्लाटों का विक्रय कराया जा रहा है।
शासकीय कर्मचारियों के अलावा गांव के सीधे-साधे और भोले-भाले ग्रामीणों को भी बरगला कर नियम विरुद्ध विकसित कालोनियों में प्लाट बेचे जा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि नियम विरुद्ध विकसित कालोनियों की बेचे जा रहे प्लाटों की रजिस्ट्री भी नहीं कराई जा रही हैं, सिर्फ शपथपत्र और अनुबंध के आधार पर प्लाट बेचे जा रहे है, जिससे शासन को राजस्व की भी बहुत बड़ी क्षति हो रही है। यह पूरा मामला स्थानीय प्रशासन के संज्ञान में हैं, लेकिन अभी तक अवैध रूप से कॉलोनी काट रहे लोगों के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई है। हालातों को देखते हुए साफ जाहिर होता है कि भू-माफिया और अवैध कालोनी काटने वालेे लोगों को प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है। सूत्र बताते हैं कि इस खेल में संबंधित इलाके के पटवारी से लेकर कुछ अधिकारी भी शामिल हैं। तमाम शिकवे और शिकायतों के बाद अभी तक तो इस मामले में कार्रवाई का नितांत अभाव बना हुआ था, लेकिन अब लोगों को नवागत कलेक्टर पी अनुग्रह से उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है कि शायद वो इस मामले को संज्ञान में लेकर अवैध कालोनी काटने वालों की नकेल कस सकें।






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