
सुनील रजक शिवपुरी। खरई बैरियर पर अवैध बसूली का खेल आज भी है यह देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि यह बैरियर परिवहन विभाग ने प्राईवेट रूप से ठेके पर दे दिया है। जिसके चलते खरई में एकीकृत जाँच चोकी को पिछले लंबे समय से गुण्डा तत्वों ने अघोषित रूप से कब्जा रखा है
खरई बैरियर से निकाले जाते हैं कट्टू बाहन
खरई बैरियर पर रात के अंधेरे में कट्टू बाहनों की निकासी की जाती हैं जिसमे सभी को एक मोटी रकम के रूप में आमदनी होती हैं जिसका बटोना सभी को मिलता हैं। एक भी कट्टू बाहन पकड़ा नही जाता हैं। अब हम आपको यहाँ बता दे कि जब एक मोटी रकम अधिकारियो तक पहुँच रही हैं तो उन बाहनों पर कार्यवाही कैसे होगी। कार्यवाही तो न होने से रही क्योंकि जब एक मोटी मोटी रकम ऊपर तक जा रही हैं तो कार्यवाही क्यों कि जाएं।
बताया जाता है यहां अवैध वसूली के लिए रखे प्राईवेट गुडो द्वारा कार्यवाही का झूठा डर दिखाकर कागजो को जप्त करने कि धमकी देकर अवैध वसूली कि जा रही है। इससे न केवल राजस्व को हानी पहुंच रही है। बल्कि बैरियर पर लूटपाट का माहौल निर्मित कर रखा हैं।
खरई चैक पोस्ट पर बाहरी गुंडो द्वारा परिवहन विभाग के अधिकारी कोटा नाका चैक पोस्ट पर हाईवे नंबर 27 पर चलने वाले वाहनो से खुलेआम अवैध वसूली करवा रहे है। जिससे हर माह सांठगांठ करने वाले जिम्मेदार अधिकारीयो को हर माह लाखो की काली कमाई हो रही है।
यह बता दें कि
इस गोरखधंधे में आरटीओ, वाणिज्यकर, मण्डी और वन विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत जगजाहीर है। जो प्राईवेट गुंडो कि मदद से खुलेआम अधिकारियो के संरक्षण में सरगने के रूप में चैक पोस्क पर कब्जा जमाकर अवैध वसूली का खेल चला रहे है।
सुत्रो से मिली जानकारी के अनुसार आरटीओ चैक पोस्ट से होने वाही काली कमाई का बटौना जिले से लेकर ऊपर तक वितरण किया जा रहा है। जिससे सरकार को हर माह लाखो कि राजस्व हानी हो रही है।
इसी दौरान खरई बैरियर पर रिश्वत के 3600 रूपए नही देने पर एक ट्रक को 17 घंटे से खडा कर दबंई से उसके कागजात छीन लिये गए। वह मामला भी मीडिया में आने के बाद तूल पकड़ गया था
इस पूरे खेल में स्थानीय गुण्डों और परिवहन विभाग कि भूमिका संदिग्ध
विदित हो कि इस एकीकृत जाँच चोंकी से होकर अंतर्राज्जीय वाहन गुजरते हैं यह मार्ग राजस्थान को जाता है। इस पर से गुजरने वाले वाहनों की चैकिंग फॉरेस्ट, परिवहन, मण्डी और वाणिज्यकर विभाग के द्वारा की जाती है।
लोड चैकिंग भी यहीं होती है मगर इन वाहनों से सुविधा शुल्क लेकर वाहनों को एकीकृत सीमा जाँच चोकी पर केन्द्रीय मार्ग से निकाला जाकर इस तमाम जाँच से परे कर दिया जाता है। सूत्रों की मानें तो इस सेन्ट्रल मार्ग से निकासी के एवज में ओवरलोड ट्रक, ट्रॉला से 20 से 25 हजार रुपए प्रति वाहन वसूले जाते हैं। इस कारोबार को राजस्थान और म.प्र. के माफिया तत्वों से मिलकर शिवपुरी के कुछ स्थानीय गुण्डे संचालित करा रहे थे।






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