शिवपुरी। सामाजिक विकास की शुरुआत सामुदायिक जागृति से ही होती है। हमारी विकास की अवधारणा तभी सार्थक होगी जब समुदाय का प्रत्येक व्यक्ति जागरूक हो। जब हर व्यक्ति को अपने अधिकारों और कर्तव्यों का ज्ञान हो। इसके लिए हमें आपसी संवाद को बढ़ाना होगा। संवादहीनता के कारण हमारा विकास अवरूद्ध हो रहा है। आपसी संवाद की विलुप्त हो चुकी चौपाल परंपरा को हमें फिर शुरू करना होगा। हमें व्हाट्सएप परंपरा से बाहर आकर आपसी प्रेम की प्रतीक चौपाल के आयोजनों को बढ़ावा देना होगा।
यह सुझाव शहर के उत्कृष्ट विद्यालय में मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास के तहत संचालित बैचलर ऑफ सोशल वर्क पाठ्यक्रम के प्रशिक्षणार्थियों को बालिका सप्ताह के संचालन के संबंध में बोलते हुए बाल संरक्षण अधिकारी राघवेंद्र शर्मा ने दिए। उन्होंने कहा कि इस नवाचार में सबसे पहले महिलाओं और बच्चों को जोडिए। हालांकि प्रारंभ में कम लोग शामिल होंगे किंतु आप नियमित अंतराल पर अपना अभियान जारी रखिए। धीरे-धीरे संख्या बढ़ती जाएगी। चौपाल कार्यक्रम में हर आयु वर्ग के लोगों का प्रतिनिधित्व हो इसका ध्यान रखा जाए। उपिस्थत लोगों को शासन की योजनाओं से परिचित कराइए। योजनाओं का लाभ किसे और कैसे मिलेगा इसकी जानकारी दीजिए। उनको महिलाओं और बच्चों के कानूनों से परिचित कराइए। उनकी समस्याओं को अंकित कीजिए और उनको उचित मार्गदर्शन दीजिए। यह नेतृत्व विकास का पहला अध्याय है। ग्राम स्तर पर अनेक समितियां गठित होती है जिनका ग्रामीण विकास में विशिष्ट योगदान होता है। बच्चों के कल्याण के लिए ग्राम स्तर पर बाल संरक्षण समिति होती है जो बच्चों के कल्याण के लिए सुझाव दे सकती है। शौर्यादल सदस्यों को भ्ज्ञी इसमें शामिल किया जा सकता है।
कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता जीतेश जैन ने कहा कि जो शौर्यादल सदस्य तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता चौपाल कार्यक्रमों का आयोजन मनोयोग से करेंगे लोगों को जागरुक करेंगे। उनको शासन की योजनाओं को जोड़ेंगे तो निश्चित ही गांव महिला एवं बालिका हिंसा मुक्त होकर विकसित होगा। अच्छा कार्य करने वाले प्रशिक्षणार्थियों को जिला प्रशासन की ओर से सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में परामर्शदाता ओमवती भार्गव, उर्मिला निगम, अनुज कुमार दुबे एवं नवी अहमद खान तथा प्रीति कुशवाह आदि मौजूद थे।





Be First to Comment