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मैंने अपना बना के फूल जिसको भेजा था। उसी के हाथ का पत्थर मेरी तलाश में है।।-shivpuri news

शिवपुरी। शहर की साहित्यिक संस्था बज्मे उर्दू की काव्य गोष्ठी गत दिवस बज्म के सचिव रफीक इशरत के निवास स्थान पर आयोजित हुई।
इंदौर से आए बज्म के भूतपूर्व सचिव डाॅ. अजय ढींगरा के विशेष आतिथ्य एवं अध्यक्षता में संपन्न हुई इस काव्य गोष्ठी का संचालन सलीम सागर ने किया। गोष्ठी का आगाज डाॅ. मुकेश अनुरागी की सरस्वती वंदना मां शारदे से हुआ। इसके बाद सुकून शिवपुरी ने नात पढ़ी। डॅा. मुकेश अनुरागी ने यह भी कहा
मैंने अपना बना के फूल जिसको भेजा था।
उसी के हाथ का पत्थर मेरी तलाश में है।।
वहीं रफीक इशरत लिखते हैं –
दुआ है बुजुर्गाें की इशरत तुम्हारी।
कलम पर जवानी हमेशा रहेगी।।
डाॅ. संजय शाक्य ने देश के नाम गीत पढ़ा –
ये है मेरा देश महान ।
मेरा न्यारा देश महान ।।
साजिद अमन लिखते है -ं
जिन्दगी बावफा सी लगती है।
इसमें रब की रजा सी लगती है।।
राम कृष्ण मोर्य की गज़ल का शेर देखे ं-
अच्छी आदत नहीं आप की दोस्तों।
कुछ इधर बोलना कुछ उधर बोलना।।
डाॅ. अजय ढ़ींगरा लिखते हैं –
हम से मत पूछिए क्या-क्या टूटा।
दोस्ती टूटी भरोसा टूटा ।।
घर के बंटबारे में बंटवारे के साथ।
भाई से भाई का रिश्ता टूटा।।
सत्तार शिवपुरी ने कुन्डलियांॅ पढ़ीं एक कुंडलिया का दोहा देखें –
कुदरत को भी देखिये बड़ो अजबो खेल।
भारी कदुआ लग गयो इक पतरी सी बेल ।।
मो़. याकूब साबिर ने गरीबों की कहानी नज्म पढ़ी –
गरीबों की सुनो तुम हमसे कहानी।
कहां बीता बचपन कहाॅंं पे जवानी।।
भगवान सिंह यादव ने कहा –
खोट भगवान गर दिल में न हो।
जिन्दगी ना बने दुखारी है।।
अध्यक्षीय उद्बोधन के बाद सचिव रफीक इशरत ने सभी शायरों-कवियों का आभार प्रकट कर शुक्रिया अदा किया।
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