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मेरा विश्वास ईश्वर और भाग्य पर हमेशा रहा है : डॉ. विरही-Shivpuri News

नगर के बुद्धिजीवियों व कलमकारों ने मनाया डॉ. विरही का 91वां जन्मदिन
शिवपुरी। मेरे अध्ययन में मार्कसवाद भी आया है, समाजवाद भी आया है और उपयोगितावाद भी आया है। किंतु इन सब वादों का प्रभाव मेरे जीवन पर नहीं पड़ा है। मेरा अटूट विश्वास ईश्वर पर है और भरोसा अपने भाग्य पर है। यह मेरा भाग्य ही था जो मुझे शिवपुरी लेकर आया और जिसने मुझे यहां का स्थाई निवासी बना दिया। यह मेरा सौभाग्य था कि इस नगर से मुझेे बहुत प्रेम मिला। उपरोक्त विचार देश के प्रख्यात समालोचक, कवि, रचनाकार डॉ. परशुराम शुक्ल विरही ने अपने 91 वें जन्मदिवस समारोह में अपने उद्बोधन में व्यक्त किए। इसके साथ ही उन्होंने ललितपुर से अपने शिवपुरी आगमन और यहीं स्थाई रूप से बस जाने का वृतांत विस्तार पूर्वक सुनाया। उन्होंने अपने सुदीघ्र, स्वस्थ्य, सुखी और संपन्न, जीवन के लिए भी ईष्वर को कोटिश: धन्यवाद दिया। 
आयोजन के प्रारंभ में उपस्थित जनों ने डॉ. विरही का शॉल, श्रीफल, पुष्पहार के साथ गुलाल लगा कर उनका स्वागत किया। स्वागत करने वालों में राजनेता और पत्रकारों में हरिवल्लभ शुक्ला, श्रीप्रकाश शर्मा, राजू बाथम, भरत अग्रवाल, डॉ. अजय खेमरिया, अनुपम शुक्ला, प्रमोद भार्गव, राधेश्याम सोनी आदि उपस्थित थे। रचनाकारों तथा बुद्धिजीवियों ने पुरुषोत्तम गौतम, हरीशचन्द्र भार्गव, डॉ. हरिप्रकाश जैन हरी, डॉ. लखनलाल खरे, अरुण अपेक्षित, दिनेश वशिष्ठ, डॉ. पद्मा शर्मा, डॉ. मुकेश अनुरागी, करैरा से घनष्याम योगी, विनय प्रकाष नीरव, विजय भार्गव, माधुरीषरण द्विवेदी, प्रकाशचन्द्र सेठ, शकील नस्तर, रामपंडित, रामकृष्ण मोर्य, इषरत ग्वालियरी, डॉ. रविन्द्र किशोर सक्सेना, युवा ऊर्जावान कवि आशुतोष शर्मा, आलोक शुक्ला, भूपेन्द्र विकल, भगवानसिंह यादव, आदित्य शिवपुरी, प्रदीप दुबे सुकून, राजकुमार चौहान भारतीय, आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे। उपरोक्त में से अधिकांश ने डॉ. विरही के विशाल व्यक्तित्व और उनके विस्तृत रचना संसार के विभिन्न पक्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला। इसके साथ ही उनके शतायु होने की भी कामना की। 
कार्यक्रम के अंत में डॉ. लखनलाल खरे ने सबके प्रति आयोजन को भव्य बनाने के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही आग्रह किया जो लोग इस आयोजन में डॉ. विरही के रचनासंसार पर आधारित लेख लेकर नहीं आ पाए हैं वे लेख तैयार करके 31 मई तक डॉ. खरे को आवश्यक रूप से उपलब्ध करा दें जिससे उन्हें पुस्तकार रूप में प्रकाशित करा कर विरहीजी को उनके आगले जन्मदिवस पर भेंट किया जा सके।
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