शिवपुरी। नगर पालिका के अध्यक्ष का चुनाव होने में मात्र 24 घंटे ही शेष रह गए हैं। यानि 3 अगस्त को फैसला आ जाएगा कि किसके सर नपाध्यक्ष का ताज सजेगा। वहीं शुरूआती दौर में लग रहा था कि भाजपा का बहुमत मिला है तो सर्वसम्मति व निर्विरोध अध्यक्ष व उपाध्यक्ष भाजपा का ही बनेगा लेकिन नपाध्यक्ष की कुर्सी को लेकर भाजपा में ही दो फाड़ हो चुके है और दूसरी पार्टी भी मजबूती से अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी प्रस्तुत कर रही है। वहीं कुछ पार्षदों को मंत्री जी ने गुजरात भ्रमण पर भेज दिया तो कुछ को दूसरा पक्ष अपने साथ ले गया। अभी 3 अगस्त को नपाध्यक्ष का चुनाव होना है तो सभी पार्षद शिवपुरी में वापस आ गए है और चुनाव के दो दिन पहले मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया भी शिवपुरी के दौरे पर आईं थी। इसी के साथ पर्यवेक्षक मंत्री रूस्तमसिंह भी शिवपुरी आए यहां उन्होंने अकेले में एक-एक पार्षद से वन टू वन चर्चा की और न ही मंत्री और न ही किसी को कुछ बताया। मंत्री रूस्तमसिंह ने कहा कि उनकी जो पार्षदों से बात हुई है वह सीधे संगठन को बताएंगे।
शिवपुरी नगर पालिका शिवपुरी के 39 वार्ड में से 22 में पार्षद चुने जने के बाद भाजपा भले ही बहुमत में हैए लेकिन अध्यक्ष पद के दो.दो दावेदार सामने आने से निर्विरोध चुनाव कराना मुश्किल में पड़ गया है। परिणाम के बाद पार्षदों की स्थिति होने के बाद दीप्ति भानु दुबे पहले से दावेदारी में आगे बनी रहीं। लेकिन अचानक से सरोज रामजी व्यास का नाम उभरकर आने लगा। नगर पालिका शिवपुरी में अध्यक्ष पद का चुनाव रोचक मोड़ पर आ गया है। भाजपा के पार्षदों को गुजरात मॉडल के दर्शन कराने भेजा थाए वह अध्यक्ष चुनाव के दो दिन पहले ही शिवपुरी लौट आए हैं। टूरिस्ट विलेज शिवपुरी में पूर्व मंत्री रुस्तम सिंह ने भाजपा पार्षदों से रायशुमारी की। एक.एक करके पार्षदों से उनकी राय जानी। यह मामला अब पार्टी नेतृत्व के पाले में पड़ता नजर आ रहा है। पार्टी किस पार्षद को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार चुनती हैए चुनाव से ठीक पहले पता चलेगा। अध्यक्ष पद के लिए दीप्ति भानु दुबे का नाम टिकिट वितरण से पहले ही सामने आ रहा था। चुनाव परिणाम के बाद सरोज रामजी व्यास के मैदान में कूदने से असमंजस के हालात बन गए हैं। यदि दोनों में से एक भी उम्मीदवार पीछे नहीं हटता है तो वोटिंग से अध्यक्ष चुना जाना है।
10 कांग्रेस पार्षद और सात निर्दलीय भूमिका में
अध्यक्ष का चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आता गया, दो दिन में काफी हद तक बाड़ाबंदी हो गई है। अध्यक्ष के चुनाव में 10 कांग्रेस पार्षद और सात निर्दलीय भूमिका में आ गए हैं। कुछ भाजपा पार्षदों के साथ कोई भी एक दावेदार अध्यक्ष बन सकता है। चुनाव से तीन से चार दिन पहले ही कुछ पार्षद अचानक घर से गायब हैं और फोन भी बंद हो गए हैं।






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