जैन मुनि कुलदर्शन विजय ने जीवन को तनाव मुक्त बनाने के बताए उपाय
शिवपुरी। मानो तो मौज है वरना जीवन में टेंशन तो रोज है। उक्त प्रसिद्ध कोटेशन को इंगित करते हुए जैन मुनि कुलदर्शन विजय ने कहा कि संसार में जन्म लेने के बाद तनाव तो रोज हैं। सुबह उठते से ही तमाम तरह के तनाव शुरू हो जाते हैं और इन तनावों को हैंडल न करने के कारण डिप्रेशन, अवसाद, आत्महत्या जैसी दुर्घटनाएं घटित हो रही हैं। तनाव से मुक्ति के लिए अधिकतर लोग परिस्थिति को बदलने की कोशिश करते हैं जो कि एक असंभव टास्क है। तनाव से मुक्ति का सिर्फ एक ही उपाय ही कि अपनी मन:स्थिति को बदल लिया जाए। पंन्यास प्रवर कुलदर्शन विजय जी ने आज के अपने प्रवचन में जीवन को तनावमुक्त कैसे बनाएं इस पर ध्यान केन्द्रित किया। उनका मोटिवेशनल स्पीच इतना प्रेेरक और प्रभावी रहा कि उपस्थित श्रोताओं की समस्त जिज्ञासाओं का समाधान हो गया।
आचार्य कुलचंद्र सूरिश्वर महाराज साहब के सुशिष्य पंन्यास प्रवर कुलदर्शन सूरि जी ने बताया कि परिस्थितियों पर हमारा जोर नहीं है। परिस्थितियां बदली नहीं जा सकती हैं। जीवन में तनाव इसलिए रहता है क्योंकि हम परिस्थिति बदलने में जुटे रहते हैं। लेकिन परिस्थिति को बदलने के स्थान पर हम मन स्थिति को परिस्थिति के तारतम्य में बदल लें तो तनाव क्षणभर में काफूर हो जाता है। परिस्थिति को स्वीकार करो और मन: स्थिति को उस अनुरूप ट्यून करो। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अचानक कोरोना आया और उससे निपटने के लिए हमने अपनी मन: स्थिति बदल ली। जीवन में विपदा, मृत्यु जैसी घटनाएं होती हैं और उन्हें स्वीकार कर अपने मन की भावना उस अनुरूप हम बना लें तो जीवन में कोई तनाव नहीं होगा।
जीवन तनावमुक्त बनाने के ये हैं तीन सूत्र
हमारा जीवन किस तरह से आनंद से परिपूर्ण हो और हमें तनाव से मुक्ति मिले इसके लिए सीधे-सीधे तीन सूत्र हैं और तीनों सूत्रों का संबंध समय की धारा से है। संत कुलदर्शन विजय जी ने बताया कि हम भूतकाल में उलझे रहते हैं। यहीं सोचते रहते हैं कि फला व्यक्ति हमारा नुकसान किया, हमें गालियां दी, हमें अपमानित किया। हमें पीड़ा दी। लेकिन जीवन के आनंद के लिए आवश्यक है कि हम भूतकाल को भूलें। गए हुए समय को याद करने के स्थान पर चाहें तो उससे सबक अवश्य ले सकते हैं। भविष्य की प्लानिंग करें लेकिन भविष्य की प्लानिंग हम सिर्फ धन सम्पत्ति कमाने में ही करते हैं। जबकि जीवन के आनंद के लिए आवश्यक है कि भविष्य की प्लानिंग परिवार के लिए हो, समाज के लिए हो, खुद के आध्यात्मिक उत्थान के लिए हो। वर्तमान में कैसे जीना यह भी हमें आना चाहिए। जीवन में पॉजिटिविटी और सकारात्मकता के लिए आवश्यक है कि हम अच्छा सुने, अच्छा देखें और अच्छा पढ़े। क्योंकि हम अपने दिमाग को जैसी खुराक देंगे वैसे ही हम बनेंगे।






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