शिवपुरी। ईको सेंसेटिव जोन में खनिज विभाग द्वारा खदान की लीज दिए जाने को लेकर जारी की गई विज्ञप्ति को लेकर एनजीटी में दायर की गई याचिका की सुनवाई के उपरांत एनजीटी ने एक टीम गठित कर न सिर्फ अवैध खनन का सर्वे करने के निर्देश देते हुए दो माह में विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है।
जानकारी के अनुसार खनिज विभाग ने वर्ष 2021 में ईको सेंसेटिव जोन में स्थित सर्वे नंबर 314, 316 सहित कुछ अन्य नंबरों पर पत्थर खनन के लिए खदान लगाने के इच्छुक लोगों से आवेदन आमंत्रित करते हुए टेंडर विज्ञप्ति जारी की थी। यह बात मझेरा बस्ती में आदिवासियों के बीच काम करने वाले कुछ युवाओं को पता चली। इस टीम को लीड करने वाले युवा अभिभाषक अभय जैन ने एनजीटी में याचिका दायर की कि वर्ष 2017 में माधव नेशनल पार्क के ईको सेंसेटिव जोन की अधिसूचना जारी की गई थी। इस अधिसूचना में स्पष्ट उल्लेख था कि माधव नेशनल पार्क की बाउंड्री से दो किमी तक का क्षेत्र ईको सेंसेटिव जोन कहलाएगा। अधिसूचना में यह भी उल्लेख था कि इस क्षेत्र में कौन से काम पूरी तरह से प्रतिबंधित होंगे और कौन से काम किए जा सकेंगे। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि इस अधिसूचना के हिसाब से ईको सेंसेटिव जोन में खदान की विज्ञप्ति निकालना कानून का उल्लंघन है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने एक कमेटी बनाई है। इस कमेटी में कमिश्नर ग्वालियर, कलेक्टर शिवपुरी, पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारी, नेशनल पार्क के डायरेक्टर, प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों को रखा गया है। इस कमेटी को निर्देश दिए गए हैं कि वह मौके पर जाकर याचिकाकर्ता की समस्याओं को सुनकर हालातों का जायजा लेंगे और इसके बाद वहां रेवेन्यू सहित वन क्षेत्र में हुए अवैध खनन की स्थिती पर रिपोर्ट तैयार कर दो महीने के भीतर एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2022 को की जाएगी।
कमेटी में कमिश्नर, कलेक्टर फिर कैसे जारी हुई विज्ञप्ति?
खास बात यह है कि वर्ष 2017 में जब अधिसूचना जारी की गई थी। उस समय एक मानीटरिंग कमेटी बनाई गई थी। इस मानीटरिंग कमेटी में कमिश्नर, कलेक्टर, माधव नेशनल पार्क के डायरेक्टर को रखा गया था। कमिश्नर कमेटी के अध्यक्ष हैं, कलेक्टर सदस्य व पार्क डायरेक्टर सचिव हैं। ऐसे में विचारणीय पहलू यह है कि जब यह लोग कमेटी में थे तो फिर ईको सेंसेटिव जोन में खदान की विज्ञप्ति आखिर कैसे जारी हो गई?
जहां अवैध खनन हो गया उस जमीन को सही करने क्या किया
एनजीटी ने रिपोर्ट में इस बिंदु पर भी जबाब मांगा है कि जिस जगह रेवेन्यू व संरक्षित वन क्षेत्र में अवैध खनन हो चुका है। उस क्षेत्र में जो जमीन खराब हो चुकी है। उस जमीन के सुधार के लिए क्या-क्या प्रयास किए गए हैं? इसके अलावा क्या प्रयास किए जा सकते हैं? इस विषय पर भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
अधिसूचना के अनुसार ईको सेंसेटिव जोन में खदान व्यवसाय के साथ-साथ इंडस्ट्रीज स्थापित नहीं की जा सकती हैं। उक्त कार्यों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा ईको टूरिज्म, पौध रोपण, खेती आदि कार्य कुछ प्रतिबंधों के साथ इस क्षेत्र में किए जा सकते हैं। खास बात यह है कि इसके बाबजूद पार्क क्षेत्र में धड़ल्ले से अवैध खनन किया जा रहा है और मानीटरिंग कमेटी हाथ पर हाथ रखे हुए बैठी है।






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