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सर्दी का सितम: अलाव के सहारे ठंड से बच रहे लोग, कृषि वैज्ञानिकों ने भी जारी की एडवाइजरी / Shivpuri News

शिवपुरी: जिले को कोहरा और शीतलहर के प्रकोप से जूझते करीब एक सप्ताह गुजर चुका हैं। इसके बाद भी लगातार सर्दी का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। इसके अतिरिक्त पिछली तीन रातों से कोहरे के साथ ओस की बारिश हो रही है जिससे लोगों के आम जीवन पर इसका असर पढ़ा है। आज रात का पारा 10 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क चुका था। दिन में सूरज के न निकलने के चलते दोपहर का पारा 18 डिग्री सेल्सियस को पार नहीं कर पा रहा है।

सर्दी से बचने के लिए लोग लगातार अलाव का सहारा ले रहे हैं। शिवपुरी के बाजारों में कई दुकानों के सामने अब अलाव जलता हुआ देखा जा सकता है। सर्दी के प्रकोप के चलते बाजार में होने बाला व्यापार भी ठंडा हुआ है। वहीं बच्चों की छुट्टियां खत्म होने के बाद गलन पैदा करने वाली यह सर्दी मुसीबत बनने वाली है।

कृषि वैज्ञानिकों ने की एडवाइजरी जारी

पिछले तीन-चार दिनों से बिगड़े मौसम और आगामी प्राप्त हो रहे मौसम पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए कृषि विज्ञान केन्द्र शिवपुरी द्वारा जिले के कृषकों, पशुपालकों, मत्स्य पालकों व ग्रामीणों के लिए तकनीकी परामर्श दिया गया है। वर्तमान मौसम को देखते हुए आलू की फसल में झुलसा रोग आने की संभावना अधिक है। किसान भाई मेटालेक्जिल व मेंकोंजेव के रेडीमिक्स मिश्रण दवा का 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर 10 दिन के अंतराल से 2 बार छिड़काव करें।

सरसों फसल में तना गलन (पोलियो रोग) आने की संभावना अधिक बढ़ जाती है। सुरक्षात्मक उपाय हेतु 15 दिन के लिए फसल में पानी न लगाए। फसलों को शीत लहर से बचाने के लिए हल्की सिंचाई करें या खेत में नमीं बनाए रखें। रात के समय खेत के उत्तर-पश्चिम दिशा में सावधानीपूर्वक कचरा-कूड़ा इस प्रकार जलाए कि धुआं होता रहे व वहां के सूक्ष्म जलवायु (माइक्रोक्लाइमेट) में सुधार हो सके।

मौसम/आसमान साफ होने पर हवाएं नहीं चलने की स्थिति में तापमान गिरने की अधिक संभावना रहती है ऐसी दशा में पाला गिरता है। इस स्थिति में फसलों को पाले से बचाव के लिए घुलनशील गंधक 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी के मान से घोल बनाकर फसलों पर छिड़काव करें। फलदार पौधों में थालों में निराई-गुड़ाई कर 5 किग्रा. वर्मीकम्पोस्ट के साथ सल्फर व पोटाश का मिश्रण 250 ग्राम प्रति पौधा दें।

इसके अतिरिक्त दुधारू पशुओं को बाहर न निकालें, शेड में ही रखें, स्वच्छ और ताजा या गुनगुना पानी गुड़ के साथ पिलायें एवं पशु आहार में सरसों की खली भी प्रयोग में लायए। ठंड व शीत लहरों से पशुओं के शरीर को जूट के बोरों से ढककर रखें तथा डेयरी शेड के आसपास अलाव जलायें। अधिक ठंड के मौसम में मछली पालन तालाब की ऊपरी सतह अधिक ठंडी हो जाने के कारण संपर्क में आने से मछलियों की मृत्यु हो सकती है।

तालाब के पानी का स्तर 1.5-2.0 मीटर तक बढ़ा लें क्योंकि पानी की ऊपरी 01 फीट की सतह ही अत्यधिक ठंडी होती है। ठंड के मौसम में मछली का मेटाबोलिज्म (चयापचयी क्रिया) कम होती है। इस मौसम में परिपूरक आहार (कृत्रिम भोजन) का प्रयोग कम करें क्योंकि मछली ठण्ड के मौसम में कम भोजन ग्रहण करती है।

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