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पल्लवी पटेल की अखिलेश पर प्रेशर पॉलिटिक्स: क्या भविष्य सपा के बागियों का, अभी दलों ने प्रत्याशी नहीं उतारे पहले चरण के पश्चिम सीटों पर /उत्तरप्रदेश

लखनऊ

समाजवादी पार्टी और अपना दल (कमेरावादी) के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। पिछले दिनों बगावती तेवर दिखाने के बाद में नरम पड़ी अपना दल (क) की नेत्री पल्लवी पटेल के सुर फिर बदले-बदले नजर आ रहे हैं। बुधवार को पार्टी की कार्यसमिति की बैठक बाद पल्लवी ने बिना सपा से बात किए एकतरफा 3 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। ये सीटें फूलपुर‚ मिर्जापुर और कौशांबी हैं।

यह भी संयोग है कि बुधवार को ही सपा ने मिर्जापुर से राजेंद्र एस. बिंद को प्रत्याशी घोषित किया है। अब पल्लवी भी वहां अपना प्रत्याशी उतारेंगीं। इससे सपा और अपना दल (क) के बीच पेंच फंस गया है। दोनों के बीच सीटों के गठबंधन को लेकर अभी सहमति नहीं बन पाई है।

मिर्जापुर सीट से इस समय पल्लवी पटेल की बहन अनुप्रिया पटेल NDA की सहयोगी अपना दल (एस) की सांसद हैं। फूलपुर और कौशांबी सीट पर भाजपा का कब्जा है। पल्लवी खुद सपा के टिकट पर MLA हैं। दोनों दिग्गज नेता अनुप्रिया और पल्लवी सोनेलाल पटेल की बेटी हैं। फिलहाल पल्लवी पटेल के इस कदम को राजनीतिक जानकार प्रेशर पॉलिटिक्स मान रहे हैं।

आगे पढ़ते हैं पल्लवी के इस कदम के पीछे क्या कारण हो सकते हैं?

अखिलेश यादव को बड़ा भाई कहकर कई बार पल्लवी पटेल जनसभा को संबोधित कर चुकी हैं।

अखिलेश यादव को बड़ा भाई कहकर कई बार पल्लवी पटेल जनसभा को संबोधित कर चुकी हैं।

राज्यसभा चुनाव के मतदान में बगावती तेवर दिखाए
2019 में पल्लवी की पार्टी का कांग्रेस के साथ गठबंधन था। कांग्रेस ने उनके पति पंकज पटेल को फूलपुर से टिकट दिया था‚ लेकिन उन्हें हार मिली थी। इसके बाद से अपना दल (क) सपा के साथ बनी है। कार्यसमिति की बैठक के बाद अपना दल (क) की राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा पटेल ने कहा- हम I.N.D.I. अलायंस में लंबे समय से हैं। हम लोग उनके साथ हैं। इसके तहत ही हमने 3 सीटों की घोषणा की है।

पल्लवी ने भी I.N.D.I. अलायंस के तहत घोषित तीन सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई। इससे पहले राज्यसभा चुनाव के समय भी सपा और अपना दल (क) के बीच तल्खी सामने आई थी। प्रत्याशी चयन में PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए पल्लवी ने बगावती तेवर दिखाए थे। PDA प्रत्याशी को ही वोट देने की बात कही थी। हालांकि बाद में उन्होंने नरम पड़ते हुए सपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया था।

तस्वीर तब की है, जब अपना दल के संस्थापक सोनेलाल पटेल का पूरा परिवार एक था। तस्वीर में सबसे पहले सोनेलाल पटेल की पत्नी, उसके बाद बड़ी बेटी अनुप्रिया पटेल, फिर छोटी बेटी पल्लवी पटेल हैं।

तस्वीर तब की है, जब अपना दल के संस्थापक सोनेलाल पटेल का पूरा परिवार एक था। तस्वीर में सबसे पहले सोनेलाल पटेल की पत्नी, उसके बाद बड़ी बेटी अनुप्रिया पटेल, फिर छोटी बेटी पल्लवी पटेल हैं।

मिर्जापुर में मां-बेटी होंगी आमने-सामने!
लोकसभा चुनाव- 2024 में अपना दल (सोनेलाल) और अपना दल (कमेरावादी) में आमने-सामने की टक्कर होगी। अपना दल (एस) की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल के मुकाबले में मां कृष्णा पटेल को मिर्जापुर से पल्लवी उतार सकती हैं। वर्तमान में अनुप्रिया पटेल मिर्जापुर सीट से सांसद हैं। अब अपना दल (क) से मां और अपना दल (एस) से बेटी मिर्जापुर में आमने सामने आ सकती हैं। बुधवार को अपना दल (क) की राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा पटेल ने तीन सीटों की सूची जारी की। इसके मुताबिक, अपना दल (क) फूलपुर‚ मिर्जापुर और कौशांबी पर अपने प्रत्याशी लड़ाएगी। फूलपुर सीट से केसरी देवी पटेल भाजपा की सांसद हैं। मिर्जापुर से सपा प्रत्याशी की घोषणा से दोनों दलों के बीच पेंच फंसा गया है।

स्वामी प्रसाद मौर्य के बाद पल्लवी पटेल की राह आसान नहीं
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि लोकसभा चुनाव से पहले अगर पल्लवी पटेल इसी तरीके से बगावत के तेवर बनाए रखीं तो सपा को कुछ सीटों पर नुकसान हो सकता है। बुधवार को अपना दल (क) ने फूलपुर, मिर्जापुर और कौशांबी से चुनाव लड़ने का ऐलान किया, लेकिन इसके चंद घंटे बाद ही सपा ने मिर्जापुर से अपना भी प्रत्याशी उतार दिया।

I.N.D.I. अलायंस के नेताओं में बगावत करने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले स्वामी प्रसाद मौर्य, अखिलेश यादव को इस्तीफा भेजकर सपा से अलग हो चुके हैं। लेकिन, वह अभी भी I.N.D.I. अलायंस का खुला समर्थन कर रहे हैं। I.N.D.I. अलायंस छोटी-छोटी पार्टियों के अलग होने से 2-3% वोट बैंक पर असर पड़ेगा। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह सभी अपना भविष्य मजबूत करने के लिए सहयोगी पार्टियों पर प्रेशर बना रहे हैं।

सपा और कांग्रेस के बीच उत्तर प्रदेश की सीट बंटवारे के बाद उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया को लेकर बीते दिनों पार्टी कार्यालय में एक बैठक भी हुई थी। पश्चिम UP को लेकर चर्चा हुई।

सपा और कांग्रेस के बीच उत्तर प्रदेश की सीट बंटवारे के बाद उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया को लेकर बीते दिनों पार्टी कार्यालय में एक बैठक भी हुई थी। पश्चिम UP को लेकर चर्चा हुई।

अब पश्चिम उत्तर प्रदेश के पहले चरण की सीट की बात करते हैं
लोकसभा चुनाव-2024 के पहले चरण में पश्चिम उत्तर प्रदेश की 8 लोकसभा सीटों नगीना‚ मुरादाबाद‚ रामपुर‚ सहारनपुर‚ कैराना‚ मुजफ्फरनगर‚ बिजनौर और पीलीभीत में 19 अप्रैल को मतदान होना है। 20 मार्च से शुरू हुई नामांकन प्रक्रिया के बाद यह माना जा रहा है कि इस बार के चुनावी नतीजों पर जातीय समीकरण और ध्रुवीकरण का सीधा असर देखने को मिलेगा।

सबसे खास बात तो यह है कि नामांकन शुरू हो गया है, लेकिन अब तक कई दलों ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। पश्चिम यूपी के 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने पश्चिम उत्तर प्रदेश की इन सभी आठ सीटों पर शानदार जीत दर्ज की थी‚ लेकिन 2019 के चुनाव में भगवा लहर पर जातीय समीकरण भारी पड़े थे। सपा-बसपा-रालोद गठबंधन ने सहारनपुर‚ बिजनौर‚ नगीना‚ मुरादाबाद और रामपुर सीटें भाजपा से छीन ली थी।

तस्वीर अगस्त 2022 की है। कृष्णा पटेल ने अखिलेश यादव से मुलाकात की थी।

तस्वीर अगस्त 2022 की है। कृष्णा पटेल ने अखिलेश यादव से मुलाकात की थी।

भगवा लहर या जातीय समीकरण
अब 2024 के चुनाव में मतदाताओं के रुख से तय होगा कि माहौल में भगवा लहर का कितना असर है या फिर जातीय समीकरण ही भारी पड़ेगा। यही नहीं पश्चिम यूपी में कैराना के पलायन का मुद्दा लोकसभा के 2014 और 2019 के चुनावों के अलावा 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भारी पड़ा। इस बार भाजपा के पास कई मुद्दे हैं। जैसे- जम्मू कश्मीर से धारा 370 का खात्मा किया है। अयोध्या में जन्म स्थान पर भव्य राम मंदिर बना है। अभी चंद दिनों पहले CAA भी लागू किया गया है।

वहीं, भाजपा को इस बार रालोद जैसी किसान समर्थक पार्टी का भी साथ मिला है। विपक्षी खेमे की बात करें तो समाजवादी पार्टी और कांग्रेस एक साथ आए हैं। दोनों के गठजोड़ से मुस्लिमों की एकजुटता जरूर पैदा हुई है। मसलन मुस्लिम मतों में बंटवारा और विभाजन शायद नहीं हो पाए। बसपा के अलग चुनाव लड़ने का भाजपा और सपा गठबंधन पर असर महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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