

पार्टी ने उनके विकल्पों पर विचार करना किया शुरू
शिवपुरी। कांग्रेस सूत्रों से जो समाचार छन-छन कर आ रहे थे उसके अनुसार कांग्रेस ने वर्तमान विधायकों में से लगभग 25 विधायकों के टिकट यथावत रखने का निर्णय ले लिया था। इनमें से शिवपुरी जिले के तीनों कांग्रेस विधायक पिछोर से केपी सिंह, करैरा से शकुन्तला खटीक और कोलारस से महेन्द्र यादव के नाम शामिल थे, लेकिन अब जो ताजा सर्वे आया है वह कांग्रेस की चिंता बढ़ाने वाला है। पार्टी के सर्वे में कोलारस और करैरा सीट पर सत्ता विरोधी रूझान (एंटीइन्कमवंशी फैक्टर) साफ दिख रहा है। भाजपा के सर्वे में भी कोलारस और करैरा सीट पर पार्टी की स्थिति मजबूत बताई गई है। सर्वे के निष्कर्ष में साफ लिखा है यदि वर्तमान विधायक कांग्रेस ने दोहराए तो भाजपा के लिए जीत मुश्किल नहीं होगी।
कोलारस विधायक महेन्द्र सिंह यादव तीन माह पहले उपचुनाव जीते हैं, लेकिन जीत के बाद भी पिछले चुनाव की तुलना में कांग्रेस की जीत का अंतर अधिक उत्साहवर्धक नहीं है। 2013 के विधानसभा चुनाव में महेन्द्र यादव के पिता स्व. रामसिंह यादव 25 हजार मतों से भाजपा प्रत्याशी देवेन्द्र जैन से चुनाव जीते थे, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद सहानुभूति लहर का फायदा उठाने के लिए कांग्रेस ने स्व. यादव के सुपुत्र महेन्द्र यादव को टिकट दिया था जबकि महेन्द्र यादव का राजनीति से कोई लेना देना नहीं था। महेन्द्र यादव की बहिन श्रीमती मिथलेश यादव मुनिया राजनीति में लम्बे समय से सक्रिय हैं। वह जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं और वर्तमान में जनपद पंचायत बदरवास की अध्यक्ष हैं, लेकिन उनके स्थान पर उनके भाई महेन्द्र यादव को आर्थिक कारणों के आधार पर चुना गया जबकि मिथलेश यादव की छवि साफ सुथरी है और उनमें अपने पिता स्व. रामसिंह यादव की झलक दिखाई देती है। चुनाव में महेन्द्र यादव पूरी तरह सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के भरोसे रहे। उनके पिता जहां 25 हजार मतों से चुनाव जीते थे वहीं उनकी जीत का अंतर घटकर एक तिहाई से भी कम हो गया था और वह महज 8 हजार मतों से पुराने भाजपा प्रत्याशी देवेन्द्र जैन से चुनाव जीते थे। चुनाव जीतने के बाद महेन्द्र यादव की क्षेत्र में सक्रियता अधिक नहीं रही और वह पार्टी कार्यकर्ताओं तथा जनता के बीच भी अपनी छवि नहीं बना पाए, लेकिन तीन माह पहले चुनाव जीतने के कारण कांग्रेस ने उन्हें टिकट देने का मन बनाया था और यह कह जा रहा था कि सितम्बर माह में कांग्रेस की पहली लिस्ट में उनका नाम होगा, लेकिन कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ ने जो ताजा सर्वे कराया है। सूत्रों के अनुसार उस सर्वे में साफतौर पर बताया गया है कि विधायक के खिलाफ जनता में आक्रोश का वातावरण बनना शुरू हो गया है। राजनैतिक हलकों में चर्चा है कि पार्टी अब उनके विकल्प पर भी गंभीरता से विचार करने लगी है। कोलारस में कांग्रेस के पास टिकट के योग्य दावेदारों की कमी नहीं है जिनकी उपेक्षा कर उपचुनाव में कांग्रेस ने महज सहानुभूति लहर का फायदा उठाने के लिए महेन्द्र यादव को उम्मीद्वार बनाया था, लेकिन अब पूरे विधानसभा क्षेत्र में कहीं से कहीं तक न तो सहानुभूति लहर है और न ही विधायक के प्रति उत्साह का वातावरण। कोलारस में कांग्रेस टिकट के लिए सबसे मजबूत दावा जिला कांग्रेस अध्यक्ष बैजनाथ सिंह यादव का है। श्री यादव स्व. रामसिंह यादव के पश्चात यादव बिरादरी में सर्वमान्य नेता के रूप में माने जाते हैं। उनकी पत्नी श्रीमती कमला यादव जिला पंचायत अध्यक्ष हैं जबकि उनके सुपुत्र रामवीर सिंह यादव जनपद पंचायत बदरवास में उपाध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं। श्री यादव सौम्य स्वभाव के माने जाते हैं, लेकिन उनकी प्रशासनिक क्षमता के सभी कायल हैं। बैजनाथ सिंह जनपद पंचायत बदरवास और भूमि विकास बैंक के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उपचुनाव में उनकी पोलिंग अलावदी से कांग्रेस को सर्वाधिक मतों से विजयश्री हासिल हुई थी। टिकट की दूसरी प्रबल दावेदार स्व. रामसिंह यादव की सुपुत्री मिथलेश यादव हैं। उनको कांग्रेस महिला कोटे से भी टिकट दे सकती है। श्रीमती यादव चार बार जनपद सदस्य और एक बार जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं। राजनीति में वह अपना गुरू अपने पिता स्व. रामसिंह यादव को मानती हैं। उनके द्वारा बदरवास में कई विकास कार्य कराए हैं और उनका इलाके में जनाधार भी अच्छा है। इसके अलावा भी कोलारस में नगर पंचायत अध्यक्ष रविन्द्र शिवहरे और प्रदेश कांग्रेस महामंत्री हरवीर सिंह रघुवंशी भी दावेदार हैं। करैरा विधानसभा क्षेत्र में कांग्र्रेस के ताजा सर्वे में वर्तमान विधायक शकुन्तला खटीक की स्थिति काफी गंभीर बताई गई है। उनके खिलाफ पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता में आक्रोश है। यहां टिकट के दावेदारों में जसवंत जाटव, योगेश करारे, मानसिंह फौजी आदि का नाम चर्चा में है। यदि कांग्रेस और बसपा के बीच गठबंधन में यह सीट बसपा के खाते में गई तो यहां से प्रागीलाल जाटव को टिकट मिल सकता है।






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