
शिवपुरी/कोलारस। कोलारस तहसीलदार महेन्द्र कथूरिया का विगत दिवस अशोकनगर स्थानांतरण हो गया, लेकिन अभी उन्हें रिलीव नहीं किया गया है। सूत्रों की मानें तो तहसीलदार कथूरिया को गुमराह कर बाबू और पटवारी बैक डेट की फाइलें निपटाने की तैयारी में हैं। इससे पूर्व के तहसीलदारों के स्थानांतरण होने पर यह बाबू एवं अन्य लोग इस तरह के कृत्य को अंजाम देकर लाखों के बारे न्यारे कर चुके हैं।
जानकारी के अनुसार तहसीलदार श्री कथूरिया फिलहाल निर्वाचन के काम में व्यस्त हैं, जबकि राजस्व विभाग के कर्मचारियों द्वारा कार्यालय को परचूने की दुकान बना रखा है। इस प्रकार तहसीलदार की छवि को भी धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। कई कर्मचारियों द्वारा उनके नाम का दुरुपयोग किया जा रहा है, इनमें न केवल कोलारस, बल्कि बदरवास के कर्मचारियों के शामिल होने की बात सामने आ रही है। इस समय पटवारियों पर सूखा राहत राशि बांटने का बोझ है, लेकिन वह अपना हित साधने के लिए पुराने कामों को निपटाने के लिए छोटे कर्मचारियों पर दबाव बना रहे हैं।
कम्प्यूटर कर्मचारी के लेनदेन की चर्चा
विश्वसनीय सूत्रों की मानेें तो एक प्राइवेट कम्प्यूटर कर्मचारी द्वारा जमकर नोटों का लेनदेन किया जा रहा है। इस तरह के आरोपों के चलते पूर्व में उसे हटा भी दिया गया था, लेकिन सांठगांठ के चलते उसने अपनी दुकान फिर से जमा ली। सूत्रों की मानें तो इस कर्मचारी का बड़ा रुतबा है या फिर यूं कहें कि राजस्व विभाग के कर्मचारी इसी के इर्दगिर्द घूमते हैं।
कलेक्टर जांच कराएं तो सामने आ सकता है फर्जीवाड़ा
एक बाबू एवं तहसील के कर्मचारियों द्वारा नाम न छापने की शर्त पर बताया कि तहसील में जनता का जमकर शोषण किया जा रहा है, न ही उनके प्रकरणों को समय पर निपटाया जा रहा है। बताया तो यह भी जा रहा है कि लेनदेन करके तहसील के कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों द्वारा बैक डेट की फाइलों को निपटाया जा रहा है। यदि तहसील के रिकॉर्ड की जिला कलेक्टर जांच करे तो सब कुछ सामने आ जायेगा और एक निजी कर्मचारी की करनी को सबको भुगतना पड़ेगा।







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