छात्रावास अधीक्षकों के प्रशिक्षण में अधिकारी शर्मा ने बताए सुरक्षा टिप्स
शिवपुरी। देश के छात्रावासों एवं बाल देखरेख संस्थानों में बच्चों के साथ बढ़ते दुर्व्यवहार एवं यौन शोषण की घटनाओं को रोकने के लिए शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा जिले में संचालित अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति छात्रावास अधीक्षकों के प्रशिक्षण का कार्यक्रम शहर के उत्कृष्ट बालक छात्रावास में आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में बाल संरक्षण अधिकारी राघवेन्द्र शर्मा ने सभी छात्रावास अधीक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों के विकास की संभावनाओं को तलाशें तथा जोखिमों का चिन्हांकन कर हिफाजत की नई राहों को विकसित करें। छात्रावास केवल आवास सुविधा के साधन नहीं है बल्कि व्यक्तित्व विकास का केंद्र होते है। बच्चों की प्रतिभाओं को तराशने में आप एक कुशल शिल्पी की भूमिका का निर्वहन कर सकते हो, लेकिन यह तभी संभव होगा जब आप के अंदर बच्चों के प्रति स्नेह और अपनत्व होगा। यह काम अधिकारी बनकर नहीं, मित्रता भाव से ही संभव है।
छात्रावास में नशेड़ी स्टाफ न रखें
छात्रावास में कार्यरत स्टाफ किसी प्रकार के व्यसनों में लिप्त न हो। यदि कोई नशीले पदार्थ का सेवन करता है तो उसे छात्रावास से हटाकर अन्य स्थान पर पदस्थ किया जाए। संस्थान का कोई भी बालक तंबाकू उत्पाद एवं अन्य किसी व्यसन के संपर्क में न आने पाए इसके लिए समुचित प्रयास किया जाए। संस्थान में शिकायत-सुझाव पेटी अनिवार्य रूप से लगी होना चाहिए। चाइल्ड लाइन नंबर 1098, पुलिस नंबर 100 एवं स्थानीय पुलिस थाना का नम्बर भी अंकित किया जाए। शिकायत पेटी खोलने एवं संस्था के बच्चों के विकास को मापने के लिए समिति का गठन किया जाए।
बच्चों के साथ भावनात्मक जुड़ाव रखें
आदिमजाति कल्याण विभाग के जिला संयोजक राजकुमारसिंह के द्वारा विभागीय गतिविधियों की समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि छात्रावास में बच्चों एवं अधीक्षक के बीच भावनात्मक जुड़ाव होना चाहिए। संस्थाओं में बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए सभी आवश्यक उपाय किए जाने की बेहद जरूरी है। उन्होंने छात्रावासों में स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण का निर्माण करने के निर्देश दिए। कार्यक्रम में मंडल संयोजक सुरेन्द्रसिंह कुशवाह, सामाजिक कार्यकर्ता जितेन्द्र दांगी ने भी आवश्यक सुझाव दिए।






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