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धैर्य की मिसाल बने शिवपुरीवासी, पता नहीं कब मिलेगी धूल मिट्टी से निजात 

धैर्य की मिसाल बने शिवपुरीवासी, पता नहीं कब मिलेगी धूल मिट्टी से निजात 

पर्यटकों ने बनाई दूरी, सैलानी भी हुए दूर

शिवपुरी-इसे शिवपुरीवासियों के धैर्य का परिणाम ही कहेंगें कि आज लगभग पांच वर्षों से धूल मिट्टी से परेशान है बाबजूद इसके वह कोई आन्दोलन करें लेकिन इस आस में है कि आज नहीं तो कल शिवपुरी का वातावरण फिर से खुशनुमा होगा। ऐसे में धैर्य धारण करने की मिसाल शिवपुरीवासियों ने प्रस्तुत की है जबकि दूर-दराज से आने वाले पर्यटक और सैलानियों ने शिवपुरी आने से दूरी बना ली है जिससे ना केवल पर्यटन प्रभावित हो रहा है वरन् इससे लोगों की शिवपुरी से भी दूरी बनती जा रही है। ऐसे में कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि इसके लिए जो भी योजनाऐं आज मंजूर होकर अधर में लटकी है वह इसके लिए जिम्मेदार है बात चाहे मड़ीखेड़ी की जलावर्धन योजना की हो अथवा सीवर प्रोजेक्ट की यह सभी योजनाऐं कहीं ना कहीं जनहित में बाद में लाभकारी होगा वर्तमान परिवेश की बात की जाए वृद्ध, बच्चों ओर महिलाओं के लिए यह धूल मिट्टी जानलेवा भी साबित हो रही है। उड़्ती धूल जहां लोगों के हृदय से होकर फेंफड़ों में पहुंचकर उन्हें रोगग्रस्त बना रही है तो वहीं दूसरी ओर रोड़ से उडऩे वाली धूल से नौनिहाल भी प्रभावित हो रहे है। ऐसे में जिला प्रशासन की क्रियान्वयन एजेंसियों की अकर्मण्यता भी इसका एक कारण है जो कि सही से मॉनीटरिंग ना कराकर आज भी नागरिकों के जीवन से खिलवाड़ कर रही है। 

अपने असितत्व को खोता जा रहा शिवपुरी

एक समय था जब शिवपुरी को सिंधिया राजवंश की ग्रीष्मकालीन राजधानी कहा जाता था यह बात सही भी थी क्योंकि यहां हरियाली से अच्छादित वातावरण मौजूद था तो वहीं ताल-तलैया और तालाब भरे होने से पानी की स्वच्छदंता भी थी, यही बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति नगर में पर्याप्त थी लेकिन आज यही शिवपुरी अपने असितत्व को खोती जा रही है यहां से लोगों ने दूरियां बनाना शुरू कर दी है। चर्चा तो यहां तक होने लगी है कि अब लोग शिवपुरी में बेटियां तक ब्याहने में सोचने लगा है। यदि यही हाल रहा तो वह दिन भी दूर नहीं जब लोग शिवपुरी से पलायन करने लगेंगें। 

मूलभूत आवश्याकताओं की पूर्ति को तरसे शिवपुरीवासी

यदि शिवपुरी के इन हालातों पर गौर करें तो यहां के रहवासी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए तरस रहे है एक समय था जब शिवपुरी विकास के नाम पर अग्रणीय थी लेकिन आज यह विकास से कोसों दूर है। देखा जाए तो शिवपुरी से सटे अन्य जिले कहीं बेहतर सुविधाऐं जन सामान्य को दे रहे है यहां शिक्षा, रोजगार, बिजल, सड़क, पानी जैसी आवश्यकताओं की पूर्ति बहाल है तो वहीं दूसरी ओर जो शिवपुरी पहले बसा था वह आज गर्त में जा रहा है ऐसे में कहीं ना कहीं इसके इस अवरूद्ध विकास को लेकर जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक कार्यप्रणाली जिम्मेदार मानी जाएगी। क्योंकि इन्हीं सब के प्रयासों से ही विकास संभव है अन्यथा विकास की कोरी कल्पना ही की जा सकती है जो वर्तमान में नजर भी आ रही है। 

पड़ेगा वोट बैंक पर असर

यदि यही हाल रहा तो कहीं ऐसा ना हो कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में जनता इन जनप्रतिनिधियों को ठेंगा दिखा दे। शहर के रूके हुए विकास को लेकर वोट बैंक पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा। यदि विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों की बात की जाए तो यहां के जनप्रतिनिधियों के प्रति लोगों की गहन आस्था है लेकिन बदलते परिवेश और बिगड़ते शहर के हालातों को देखकर कहा नहीं जा सकता है कि आस्था का वोट बैंक कहीं अपना मत ना बदल दे अन्यथा ऐसे परिणाम और ऐसे हालात नजर आऐंगें जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की होगी। यूं तो सभी विधानसभाओं में कांग्रेस और भाजपा का मुख्य रूप से कब्जा है लेकिन यदि यही हालात बने रहे तो परिणाम तो चौंकाने वाले होंगें ही वोट बैंक का ध्रुवीकरण भी होगा और कई ऐसे दल जनता के सामने होंगें जो कहीं नजर नहीं आए। 

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