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करैरा विधानसभा- एंटी इनकंबेन्सी फेक्टर का बसपा और भाजपा को मिल सकता है फायदा

शिवपुरी। शिवपुरी जिले की करैरा विधानसभा का चुनाव बहुत ही रोचक हो गया है। इसकी खासबात यह है कि अधिकतर चुनाव भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के बीच देखा जाता है, लेकिन करैरा विधानसभा में चुनाव त्रिकोणीय होगा क्योंकि यहां से बसपा का मजबूत प्रत्याशी प्रागीलाल जाटव के रूप में मैदान हैं, वहीं अब भाजपा ने भी अपना प्रत्याशी युवा चेहरे के रूप में राजकुमार खटीक को मैदान में उतारा है। राजकुमार खटीक को अपने पिता ओमप्रकाश खटीक की राजनैतिक विरासत का फायदा मिला है। ओमप्रकाश खटीक तीन बार विधायक रह चुके हैं। कांग्रेस ने भले ही अपना प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा है, लेकिन यह तो निश्चित हो गया कि यहां चुनाव त्रिकोणीय होगा। राजनीति सूत्रों की मानें तो भाजपा और बसपा को एंटी इनकंबेन्सी फेक्टर का फायदा मिल सकता है क्योंकि करैरा से वर्तमान विधायक कांग्रेस की हैं और इनके कार्यकाल से जनता असंतोष नजर आ रहा है। 
यहां बसपा की बात करें तो प्रागीलाल जाटव ने पूर्व विधानसभा चुनावों में भाजपा एवं कांग्रेस के प्रत्याशियों को कड़ी टक्कर दी है और इन्हें हल्के में लेने की कोई भी विरोधी दल भूल नहीं कर सकता। प्रागीलाल जाटव पिछले दो विधानसभा चुनावों से हारते आए हैं। इस विधानसभा चुनाव में यह उनका सकारात्मक पक्ष बनकर उभरता हुआ सामने आ रहा है क्योंकि लोगों की प्रागीलाल के प्रति सहानुभूति भी नजर आ रही है। पर लोगों की सहानुभूति कितनी है यह तो चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद ही पता चल सकेगा।
भाजपा प्रत्याशी राजकुमार खटीक की बात करें तो उन्हें राजनीति में नया चेहरा नहीं कहा जा सकता क्योंकि उन्होंने पर्दे के पीछे से अपने पिता का मैनेजमेंट संभाला है और उनके कार्यों में सहयोग कर राजनैतिक अनुभव प्राप्त किया है। राजकुमार खटीक वर्तमान में भाजपा में जिलामहामंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि लोग युवा चेहरे को कितना पसंद करते हैं। 
राजकुमार खटीक के पिता ओमप्रकाश खटीक तीन बार कोलारस से विधायक चुने गए। कोलारस से एक और करैरा से दूसरा चुनाव हार चुके हैं। इस बार पार्टी ने पहली बार उनके बेटे राजकुमार खटीक को टिकट दिया है। ओमप्रकाश खटीक पहली बार 1989 में विधायक बने। दूसरी बार साल 1990 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में कोलारस सीट से कांग्रेस प्रत्याशी पूरन सिंह बेडिय़ा को 19 हजार 150 मतों से हराया। 1998 में कांग्रेस के पूरन सिंह बेडिय़ा से 2 हजार 977 मतों से हारे। 2003 में वे कोलारस सीट से सबसे अधिक 32 हजार 112 मतों से जीते और तीसरी बार विधायक बने। 2013 में करैरा एससी सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन कांग्रेस की शकुंतला खटीक से 10 हजार 320 मतों से हार गए। 

कांग्रेस में घमासान जारी

कांग्रेस ने अपनी लिस्ट जारी नहीं की है। राजनीतिक सूत्रों की मानें तो कांग्रेस की वर्तमान विधायक शकुंतला के टिकिट कटने की संभावनाएं अधिक हैं। यदि विधायक खटीक का टिकिट कटा तो फिर टिकिट की दौड़ में रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर डॉ. केएल राय, जसमंत जाटव का नाम सामने आ सकता है। वहीं राजनीतिक गलियारों में चर्चा तो यह भी चल रही है कि भाजपा से टिकिट की मांग करने वाले पूर्व विधायक रमेश खटीक को नकार दिया है, उन्हें कांग्रेस अपने पाले में कर टिकिट दे सकती है। मामला बड़ा ही दिलचस्प है, लेकिन इसका फैसला शायद आज हो सकता है क्योंकि आज उम्मीद लगाई जा रही है कि कांग्रेस अपनी सूची आज जारी कर सकती है। 

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