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पोहरी में कांग्रेस की दुविधा, क्या इस बार भी ब्राह्मण उम्मीदवार को टिकट दिया जाए

1985 के बाद कांग्रेस के ब्राह्मण उम्मीदवार को नहीं मिली विजय, अंतिम बार समानता दल के प्रत्याशी हरिवल्लभ 2003 में हुए थे विजयी
शिवपुरी। पोहरी विधानसभा क्षेत्र का इतिहास रहा है कि यहां चुनाव जातिगत आधार पर ही लड़े और जीते जाते हैं। इस विधानसभा क्षेत्र में अभी तक या तो धाकड़ उम्मीदवार अथवा ब्राह्मण उम्मीदवार ही जीते हैं। किसी अन्य जाति के उम्मीदवार को पोहरी से सफलता हासिल नहीं हुई है। इसे पहचान कर प्रमुख दल कांग्रेस या भाजपा या तो ब्राह्मण को उम्मीदवार बनाती है अथवा धाकड़ को। अन्य किसी जाति के उम्मीदवार को टिकट देने का साहस दोनों प्रमुख दलों ने कभी नहीं किया। अधिकतर दोनों दलों में से यदि एक दल धाकड़ उम्मीदवार को टिकट देता है तो दूसरा दल ब्राह्मण उम्मीदवार को टिकट देकर जीत का तानाबाना बुनने में लग जाता है। हालांकि इसका अपवाद 1993 का चुनाव है। जब भाजपा ने 1989 में जीते अपने निवर्तमान विधायक जगदीश वर्मा को उम्मीदवार बनाया तो कांग्रेस ने भी उनकी जाति की बैजंती वर्मा को टिकट दे दिया। उस चुनाव में कांगे्रस के बागी उम्मीदवार देवव्रत शर्मा ने यह सोचकर चुनाव लड़ा कि धाकड़ वर्सेज धाकड़ की टक्कर में वह जीत जाएंगे। लेकिन उनका यह गणित सफल नहीं हो पाया। चुनाव कांग्रेस प्रत्याशी बैजंती वर्मा ने जीता। 1985 के बाद पोहरी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के ब्राह्मण उम्मीदवार को कभी विजयी नहीं मिल पाई। इस दल के ब्राह्मण उम्मीदवार हिमांशु शर्मा ने 1985 के चुनाव में आखिरी बार विजयश्री हांसिल की थी। 
जिस तरह से पिछोर विधानसभा क्षेत्र में लोधी मतदाताओं का बाहुल्य है और इस विधानसभा क्षेत्र में 50 हजार से अधिक लोधी मतदाता हैं। उसी तरह पोहरी विधानसभा क्षेत्र में धाकड़ मतदाताओं की संख्या सर्वाधिक है। इस विधानसभा क्षेत्र में लगभग 50 हजार धाकड़ मतदाता हैं। ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या लगभग 10 से 12 हजार हैं। इसके बाद भी पोहरी के चुनाव में ब्राह्मण उम्मीदवारों को इसलिए विजय मिलती रही क्योंकि वे धाकड़ वर्सेज अन्य जातियों के मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने में सफल होते रहे। 2003 में कांग्रेस ने बैजंती वर्मा को उम्मीदवार बनाया था लेकिन उन्हें समानता दल के हरिवल्लभ शुक्ला ने मात दी। 2008 में कांग्रेस ने यह सोचकर कि 1998 और 2003 के विधानसभा चुनाव में धाकड़ उम्मीदवार को टिकट देकर जीत हासिल नहीं हो सकी इसलिए उस चुनाव में कांग्रेस ने ब्राह्मण प्रत्याशी को टिकट दिया। भाजपा ने धाकड़ जाति के उम्मीदवार प्रहलाद भारती को टिकट दे दिया। चूकि श्री भारती पहली बार चुनाव लड़ रहे थे और उनकी स्लेट कोरी थी। छवि भी प्रहलाद भारती की ठीक थी। इस कारण वह भारी बहुमत से चुनाव जीत गए। 2013 में भाजपा ने फिर से प्रहलाद भारती को दोहराया। इस विधानसभा क्षेत्र में उस समय तक यह इतिहास था कि कोई भी वर्तमान विधायक लगातार दूसरी बार चुनाव नहीं जीत पाया। इसे कांगे्रस ने अपने लिए लाभदायक समझा। उन्हें लगा कि विधायक के खिलाफ एंटीइंकंबंसी फैक्टर से भी उनकी नैया पार लग जाएगी इसलिए कांग्रेस ने ब्राह्मण उम्मीदवार पर फिर से दांव खेला। यह बात अलग है कि इस बार टिकट बदलकर बसपा से कांग्रेस में आए हरिवल्लभ शुक्ला को उम्मीदवार बनाया गया। श्री शुक्ला पोहरी से इसके पहले 1980 और 2003 में भी चुनाव जीत चुके हैं और विधानसभा क्षेत्र में उनका अच्छा जनाधार माना जाता है। उन्होंने 2013 का चुनाव पूरी ताकत से लड़ा लेकिन साढ़े तीन हजार मतों से वह भाजपा प्रत्याशी प्रहलाद भारती से हार गए और इसके साथ ही श्री भारती लगातार दो बार विधायक बनकर एक नया कीर्तिमान स्थापित करने में सफल रहे। 2018 के चुनाव में कांग्रेस की दुविधा यह है कि वह किसे उम्मीदवार बनाए। क्या 2008 और 2013 की तरह वह फिर से ब्राह्मण उम्मीदवार को टिकट दे? कांग्रेस की यह दुविधा इसलिए भी है कि भाजपा की ओर से दो बार चुनाव जीते प्रहलाद भारती का टिकट तय माना जा रहा है। परंतु कांग्रेस में एक सोच यह भी बन रही है कि विधायक भारती के खिलाफ दो बार निर्वाचित होने के कारण अपनी ही बिरादरी में नाराजी बढ़ रही है इसलिए क्यों न इसका फायदा उठाकर धाकड़ उम्मीदवार को टिकट दिया जाए। इसलिए वर्तमान हालात में कांग्रेस ने दोनों विकल्प खुले रख छोड़े हैं। कांग्रेस में ब्राह्मण और धाकड़ उम्मीदवारों की संख्या कम नहीं है। उसे चुनना है कि वह किस जाति के उम्मीदवार को टिकट दे और दोनों जातियों में कांग्रेस के पास तगड़ा मुकाबला करने वाले उम्मीदवार मौजूद हैं। 
गौर कीजिए कांग्रेस के ब्राह्मण और धाकड़ उम्मीदवारों पर 
ब्राह्मण उम्मीदवार के रूप में पूर्व विधायक हरिवल्लभ शुक्ला, गिर्राज शर्मा ऐंचवाड़ा, पूर्व मंडी अध्यक्ष एनपी शर्मा, पूर्व युवक कांग्रेस जिलाध्यक्ष विजय शर्मा, कर्मचारी नेता राजेंद्र पिपलौदा, पूर्व विधायक शुक्ल के सुपुत्र आलोक शुक्ला, पूर्व मंत्री गौतम शर्मा के सुपुत्र देवव्रत शर्मा का दावा है। वहीं धाकड़ उम्मीदवारों में जनपद पंचायत पोहरी के अध्यक्ष प्रधुम्र वर्मा, जिला कांग्रेस के पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण धाकड़, पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष विनोद धाकड़ एडवोकेट  आदि के नाम हैं। 
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