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गणेश चतुर्थी मंदिर की परिक्रमा लगाई और बाबा के दर्शन किए हजारों श्रद्घालुओं ने

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कोलारस। कोलारस तहसील मुख्यालय से 16 किमी दूर डेढ़ हजार की आबादी वाले
ग्राम लेवा में स्थित हीरामन बाबा का प्राचीन देव स्थान पीलिया रोग को दूर
करने के लिए विख्यात है। इस स्थान के बारे में किवदंती है कि मंदिर की पांच
परिक्रमा लगाने व भभूत लगाने मात्र से पीलिया रोग से व्यक्ति को मुक्ति
मिल जाती है। वैसे तो हर चौहदस व चतुर्थी के दिन लोग यहां आते रहते हैं।
श्रद्घालुओं की आस्था का केन्द्र बने हीरामन बाबा के चमत्कारी स्थान की यह
मान्यता है कि वर्ष भर में एक बार गणेश चतुर्थी के दिन बीमारी से पीड़ित व
मुक्ति पा चुके लोगों का यहां आकर दर्शन करने का विशेष महत्व माना गया है।
मंगलवार को इस मेले में दूर-दूर से हजारों की संख्या में श्रद्घालुओं ने
आकर प्रसाद चढ़ाया, मंदिर की परिक्रमा लगाई और बाबा के दर्शन किए। गणेश
चतुर्थी को अलसुबह से ही बाबा के भक्तों का आना शुरू हो गया, जो देर रात तक
अनवरत चला। साल में एक दिन लगने वाले इस मेले में करीबन 20 हजार लोगों ने
बाबा के दरबार में मत्था टेका।
दूर-दूर से आते हैं लोग
एक दशक
पहले तक हीरामन बाबा के स्थान पर बहुत कम लोग आते थे, लेकिन इस स्थान की
प्रसिद्वि 16 साल में दूर-दूर तक फैल गई है और हीरामन बाबा लोगों की
श्रद्घा के प्रतीक बन गए हैं। लोगों को विश्वास है कि हीरामन बाबा के दर्शन
कर प्रार्थना करने से उनका पीलिया रोग सही हो जाएगा। इसी उम्मीद के साथ
यहां कोलारस क्षेत्र ही नहीं शिवपुरी, ग्वालियर, झांसी, दतिया, ईशागढ़,
अशोकनगर, गुना, राजस्थान के कोटा, बांरा आदि स्थानों से बड़ी संख्या में
लोगों की भीड़ उमड़ रही है। पहले यहां आने के लिए ऊबड़-खाबड़ कधाा रास्ता हुआ
करता था, लेकिन प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत यहां सड़कों का जाल फैल
चुका है।
मंदिर के भीतर बिराजे हैं बाबा
सैकड़ों वर्ष पुराने
हीरामन बाबा के मंदिर वाले स्थान पर एक चबूतरा था, मगर अब भव्य मंदिर,
टीनशेड बन चुके हैं। मंदिर के भीतर हीरामन बाबा की श्रृंगार से सजी मूर्ति
विराजमान है। इसी मंदिर के आसपास अन्य देवी-देवताओं के चबूतरे भी बने हुए
हैं। यहां आने वाले भक्त सबसे पहले प्रसाद चढ़ाकर अगरवत्ती लगाते हैं। इसके
बाद मंदिर की पांच या सात परिक्रमा लगाने के बाद बाबा की भभूत माथे से
लगाते हैं। हीरामन बाबा की भभूत मशहूर है। लोगों का मानना है कि बाबा की
भभूत लगाने से पीलिया व पांडू की बीमारी से निजात मिल जाती है। जानकार
लोगों का मानना है कि पीलिया सही हो जाने के बाद साल में एक दिन गणेश
चतुर्थी को दर्शन करने जरूर जाना चाहिए।
रोजगार का साधन भी बना
1500
की जनसंख्या वाले लेबा गांव में कुछ साल पहले तक दैनिक उपयोग के काम आने
वाली एकाध दुकान हुआ करती थी, लेकिन इस गांव में चतुर्थी के दिन भरने वाले
मेले में सैकड़ों की संख्या में दुकानदार आते हैं। प्रसाद की दुकानों के
अलावा मनहारी, हलवाई, होटल से लेकर हर जरूरी सामान की दुकान सजने से छोटे
से गांव में मेला लगने से लोगों को रोजगार भी मिलने लगा है। प्रकृति के
शांत वातावरण में स्थित हीरामन बाबा के मंदिर की ख्याती अब दूर-दूर तक
पहुंच चुकी है। यही कारण है कि यहां न केवल बीमारी से ग्रसित बल्कि हर
चतुर्थी को दुकानदार भी मेले में दुकान लेकर आते हैं।

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