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महुअर नदी में नही पानी कैसे दे अपने पुरखों को पानी अल्पवर्षा के चलते जलाशयों की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर हो जायेंगे लोग

करैरा
भारतीय महीनों की गणना के अनुसार भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को
सृष्टि पालक भगवान विष्णु के प्रतिरूप श्रीकृष्ण का जन्म धूमधान से मनाया
जाता है। तदुपरांत शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को प्रथम देव गणेश जी का जन्मदिन
यानी गणेश महोत्सव के बाद भाद्र पक्ष माह की पूर्णिमा से अपने पितरों की
मोक्ष प्राप्ति के लिए अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा का महापर्व शुरू
होने जा रहा है। इसे महापर्व इसलिए बोला जाता है क्योंकि नौदुर्गा महोत्सव
नौ दिन का होता है, दशहरा पर्व दस दिन का होता है, पर यह पितृ पक्ष सोलह
दिनों तक चलता है। लेकिन इस बार करैरा का एक मात्र जलस्रोत महुअर नदी गणेश
घाट पर पानी न होने के कारण स्थानीय नगर वासी पितरो को पानी नही दे पाएंगे।
इसकी मुख्य बजह अल्पवर्षा होना एक प्रमुख्य कारण बना है। पितरो के श्रद्धा
के लिए इस बार जलाशयों की तलाश में इधर उधर भटकना पड़ेंगा।

इसकी क्या है महत्वतता
हिंदू
धर्म की मान्यता के अनुसार अश्विन माह के कृष्ण पक्ष से अमावस्या तक अपने
पितरों के श्राद्ध की परंपरा है। यानी कि 12 महीनों के मध्य में छठे माह
भाद्र पक्ष की पूर्णिमा से (यानी आखिरी दिन से) 7वें माह अश्विन के प्रथम
पांच दिनों में यह पितृ पक्ष का महापर्व मनाया जाता है। सूर्य भी अपनी
प्रथम राशि मेष से भ्रमण करता हुआ जब छठी राशि कन्या में एक माह के लिए
भ्रमण करता है तब ही यह सोलह दिन का पितृ पक्ष मनाया जाता है।

इस बार गणेश घाट और ईद घाट पर नही कह सकेंगे हर-हर गंगे
करैरा
महुअर नदी पर बना गणेश घाट और ईद घाट अल्पवर्षा के चलते बीरान और सूखा
पड़ा हुआ है वरसात के दिनों में गणेश घाट ईद घाट पर लोंगो का जमाव बाडा
रहता था। स्थानीय नागरिक इन दोनो घाटो पर सुबह सुबह जाकर पहले स्नान हर हर
गंगे कहते थे इसके बाद भगवान गणेश के दर्शन कर पूजा पाठ किया करते थे लेकिन
ऐसा इसबार कुछ नही हो पाएंगा। 15 साल बाद यह दूसरा सूखा का साल रहा। जिससे
नगर सहित आसपास के कोई भी जलाशय नही भर पाये।

नगरपरिषद करे इन घाटों का रख-रखाव
करैरा
नगरीय क्षेत्र के गणेश घाट और ईद घाट दो ऐसे स्थान है जहा लोग प्रतिदिन
स्नान करने को जाते,लेकिन नपं के द्वारा इन घाटों का ठीक तरह से रख रखाव
नही किया जा रहा है। गणेश घाट और ईद घाट का ठीक तरह से देख रेख न होने के
कारण यह अपना अस्त्तिव खोते जा रहे है।  मौजूदा स्थिति को देखते हुये यहा
गन्दगी का ढेर लगा है। नंप के कर्मचारी नगर का सारा कचरा इन घाटो पर फेक
रहे है। जिससे यह घाट पूरी तरह से भर चुके। स्थानीय लोंगो ने नंप और
स्थानीय प्रशासन से मांग की है की यह दोनो घाटो का रख रखाव करे और गहरीकरण
भी कराये।

इनका कहना
-हमने कलेक्टर साहब को आवेदन दे दिया
है फिल्टर पर भी पानी नही बचा है। अगर महुअर नावली डेम से पानी नदी में आ
जाता है तो इन दोनों घाटो पर पानी जल्द आ जायेगा इसके पूर्व हम फिल्टर सहित
सभी घाटों की साफ सफाई भी करायेंगे।
कोमल साहू, नपं अध्यक्ष करैरा

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