
मांगें पूरी नहीं हुई तो 6 सितम्बर से रहेगी अनिश्चितकालीन हड़ताल
शिवपुरी। एमपी बोर्ड से मान्यता प्राप्त निजी स्कूल संचालकों द्वारा विगत एक वर्ष से शासन से अपनी विभिन्न समस्याओं के निराकरण की मांग की जा रही है, लेकिन शासन द्वारा स्कूल संचालकों की मांगों को लगातार अनदेखा किया जा रहा है। विगत 28 अगस्त को भी स्कूल संचालकों द्वारा स्कूल एसोसिएशन के बैनर तले ज्ञापन देकर समस्याओं के निराकरण की मांग की थी, साथ ही अल्टीमेटम भी दिया था कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुई तो वह शिक्षक दिवस पर शिक्षक सम्मान समारोह का बहिष्कार करेंगे, साथ ही 6 सितम्बर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। इसी तारतम्य में मांगें पूरी नहीं होने से 5 सितम्बर को निजी स्कूलों में स्कूल संचालक, शिक्षक सहित स्टाफ हाथ में काली पट्टी बांधकर कार्य करते हुए अपना विरोध दर्ज कराएंगे, वहीं शिक्षक दिवस के मौके पर शिक्षकों का सम्मान भी नहीं किया जाएगा। 5 सितम्बर को भी यदि निजी स्कूल संचालकों की मांगों का शासन ने निराकरण नहीं किया गया तो वह 6 सितम्बर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। साथ ही सरकार द्वारा प्राइवेट स्कूलों के साथ शासन द्वारा की जा रही मनमानी एवं तानाशाही पूर्ण नियमों के विरूद्ध वार्ड एवं ग्राम स्तर पर अभिभावकों, पालकों, जनता के बीच अपनी मांगों के समर्थन में जनजाग्रति अभियान चलाऐंगे।
उल्लेखनीय है कि स्कूल संचालकों द्वारा की जा रही विभिन्न मांगें की जा रही हैं उनमें स्कूल संचालक शासन के अशासकीय विद्यालयों में फीस नियंत्रण हेतु निजी विद्यालय फीस नियंत्रण अधिनियम को मप्र राजपत्र में प्रकाशित किया है वह नितांत ही अव्यवहारिक है जिस पर हजारों आपत्तियां दर्ज की जा चुकी हैं। उक्त विधेयक से पूरे प्रदेश में हजारों विद्यालय तालबंदी के शिकार हो जावेंगे जिससे उनमें कार्यरत लाखों शिक्षक बेरोजगार हो जाएंगे तथा करोड़ों विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय हो जावेगा। उक्त विधेयक को तत्काल वापस लिया जावे तथा गुजरात एवं उत्तरप्रदेश में लागू फीस नियंत्रण अधिनियम मप्र में लागू किया जावे।
अनिवार्य नि:शुल्क शिक्षा अधिनियम के अंतर्गत 2016-17, 2017-18 की शुल्क प्रतिपूर्ति हेतु शासन द्वारा जटिल प्रक्रिया डिजीटलाइजेशन और बायोमेट्रिक पद्धति निर्धारित किये जाने से मप्र के 90 प्रतिशत अशासकीय विद्यालयों को उक्त भुगतान प्राप्त नहीं हुआ है। यह कि राज्य शासन द्वारा निर्धारित की गई उक्त प्रक्रिया को आपाधापी, जल्दबाजी, बगैर दूरगामी दुष्परिणामों के आंकलन के साथ लागू किया गया है जो व्यवहारिक नहीं है और इस पर नगरीय निकायों, ग्राम पंचायतों स्तर पर लागू करने के पूर्व कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई गई जिस कारण अशासकीय विद्यालयों को आर्थिक हानि से ग्रसित होना पड़ेगा।
मप्र लोक शिक्षण संचालनालय तथा माध्यमिक शिक्षा मंडल मप्र द्वारा मान्यता शुल्क/निरीक्षण शुल्क/संबद्धता शुल्क 400/500 प्रतिशत तक की गई शुल्क वृद्धि का एसोसिएशन विरोध करता है तथा शासन से मांग करता है कि बढ़ाई गई सभी शुल्कों को कम किया जाये तथा बढ़े हुए शुल्क वापस लिये जाये। इनके अलावा अन्य मांगें भी शाामिल हैं।






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