
करैरा।
मुगल शासक और अग्रेजों के समय के बने करैरा दुर्ग के चार दरवाजों में से
एक दरवाजा झांसी दरवाजा जो नपं की देखरेख न होने के कारण कभी भी
क्षतिग्रस्त हो सकता है। जो आज अपनी अंतिम सांसे गिन रहा है । वार्डो
वासियो ने स्थानीय प्रशासन सहित नंप से इस दरवाजे की देखरेख करने और इसके
अस्त्तिव को बचाये रखने की मांग की है।
करैरा दुर्ग भले ही खण्डहर हो
गया हो, लेकिन उसकी सुंदरता दूर से ही मनमोहक कर देनी बाली है । इस दुर्ग
के अंदर भगवान भोले नाथ का विशाल मन्दिर और मस्जिद सहित किले बाले बाबा की
मजार स्थित है । इसी किले के चार दरवाजे भी है जिनमे से पहला झाँसी दरवाजा
चाँद दरवाजा गुर्जर दरवाजा बघेदारी दरवाजा इनमे से ठीक हालात में बघेदारी
दरवाजा और झाँसी दरवाजा है वाकी के दो दरवाजा देख रेख न होने के कारण अपने
आप क्षतिग्रस्त हो गये।
गुप्तेश्वर मन्दिर को जाने का रास्ता है झाँसी दरवाजा
किलेश्वर
मन्दिर के उत्तर दिशा में स्थित गुप्तेश्वर मन्दिर करैरा नगर के प्रसिद्ध
मन्दिरो में से एक मन्दिर है जो पहाड़ो में से होकर निकला है इस मन्दिर को
जाने के लिये झाँसी दरवाजा से होकर जाना पड़ता है। इस दरवाजे की मीनार
गुम्बज नगर में आकर्षण का केंद्र है।
इनका कहना
-हमारे
वार्ड 6 में स्थित झाँसी दरवाजा नंप की अनदेखी के कारण दिन प्रतिदिन खण्डहर
होता जा रहा है प्रशासन पूर्वजो की यादो को संजोयने की बजह उसे
क्षतिग्रस्त करने पर आमदा बना है जो कभी भी ढह सकता है।
महेंद्र जाटव, वार्ड वासी करैरा
-झाँसी दरवाजा सहित बघेदारी दरवाजा की देखरेख होना बहुत ही जरूरी है समय
रहते अगर नंप ने ध्यान नही दिया तो यह कभी भी ढह जायेंगे । झाँसी दरवाजा
गुप्तेश्वर मन्दिर का रास्ता है और बघेदारी दरवाजा खेड़ापति मन्दिर को जाने
का रास्ता है।
जितेंद्र सोनी गुप्तेश्वर मन्दिर के भक्त
-हम इन दरवाजों की देखरेख के लिए जल्द ही एक प्रस्ताव डालकर मेन्टीनेश करायेंगे। हम इनको किसी भी हाल में खण्डहर नही होने देंगे ।
कोमल साहू नंप अध्यक्ष करैरा






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