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निजी प्रतिष्ठानों पर चल रही गल्ला मण्डी

हाइवे किनारे लगा रहता वाहनों का झुण्ड

उधारी पर हो रही खरीद 10 दिन तक नही मिल रहा किसानों को भुगतान

दिनारा। दिनारा कस्बे में किसानों की पीड़ा को कोई सुनने वाला नही है आज किसान अपनी फसल को बेचने पर भी फसल का भुगतान लेने की लिए 10 दिन तक भुगतान के लिए व्यापरियो के पास भटकते नजर आ रहे है
दूसरी और व्यापारी भी किसानो का खुले आम शोषण कर रहे है जिनकी पीड़ा सुनने वाला कोई नही है व्यापारी किसानों की फसल को औने पौने दामो में खरीद कर कई दिनों तक भुगतान न करना कंही न कंही किसानों की मजबूरी का फायदा ले रहे है

मंडी होने के बाद भी व्यापारी अपनी अपनी दुकानों पर खरीद रहें फसल
कसबे में काफी पड़ा मंडी प्रांगण भी है लेकिन कुछ वर्षो से ग्रामीणों ने मंडी की जगह पर कब्जा कर लिया पिछली वर्ष किसानों की पीड़ा और मंडी न लगने की समस्या को मिडिया दुवारा उठाया गया तो मंडी अधिकारयों दुवारा अतिक्रमण हटाने की मुनादी लगवाकर कारवाही ठन्डे बस्ते में डाल दी और आज फिर किसान परेशान होता नजर आ रहा है

हाइवे किनारे लगे रहते वाहन
निजी प्रतिष्ठान हाइवे किनारे इस्थित होने से किसान अपने वाहनों को हाइवे किनारे खड़े कर देते जिससे कभी भी कोई घटना घट सकती।

अधिकांश व्यापारी बिना लाइसेंस की कर रहे खरीद
कस्बे में दो दर्जन से अधिक ऐसे व्यापारी खरीद कर रहे है जिनका शासन के पास किसी भी प्रकार की कोई जानकारी नही है और इन व्यापरियो के उधार माल खरीदने के बाद कही व्यापारी अपनी प्रतिष्ठान बन्द कर दे तो किसानों का क्या होगा।

किसानों को नही मिल रहा है फसल का सही दाम
मंडी न लगने से किसानों को फसल का सही दाम नही मिल पा रहा है क्यों की मंडी में बोली लगाकर फसल को खरीदी जाती है निजी दुकानों पर खरीद के कारण व्यापारीयो की मनमानी चल रहीं है।

मंडी प्रशासन नही कर रहा है कोई कार्यवाही
किसानों की समस्या की लगातर शिकायतें आने के बाद भी मंडी प्रशासन के दुवारा कोई कार्यवाही नही की जाती जिससे व्यापरियो के हैसले बढ़ते जा रहे है

किसान शिकायतों को लेकर भटकते नही पता कंहा पर है मण्डी कर्यालय
किसान अपनी समस्या को लेकर मण्डी कर्यालय को और मण्डी कर्मचारीयो को तलासता रहता किसानों को यह तक पता नही है की आखिर दिनारा मण्डी कहाँ है और इसका कर्मचारी कौन है कई बार तो किसान अपनी समस्या को लेकर मण्डी बैरियर के कर्मचारीयो के पास भी पहुच जाते।

इनका कहना है

_मैं अपनी सरसों की फसल लेकर दिनारा बेचने आया व्यापारी दुवारा माल की खरीद कर ली और दस दिन बाद पैसे लेने की बात कंही है
जगदीश सिंह किसान

_किसानों की मर्जी से ही फसल की ख़रीद की जाती है जिसकी मर्जी हो तो दे और जिसकी मर्जी नही हो वह अपनी फसल को जँहा भी बेचे उसकी इच्छा पर ही फसल खरीदी जाती है उधारी पर ही खरीद हो रही है

बंटी  सेठ व्यापारी

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