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पटवारियों पर बढ़ता बोझ, अधिकारी – नेता गहरी नींद में, सॉफ्टवेयर पर काम न होना भाजपा की असफलता

कंप्यूटर अमल के लिए विगत 10 माह से वंद है ऑनलाइन प्रक्रिया

अशिक्षित नेताओं को नही है जमानीं जानकारी

विवेक व्यास, कोलारस–कोलारस राजस्व अमले में पदस्त पटवारी विगत 10 माह से जनता की गालियां खाने को मजबूर है।इसका कारण भाजपा के राजस्व मंत्रालय की कमाऊ खाऊ नीतियां हैं। समय समय पर जनता के धन का उपयोग करने के लिये नई कंपनी लाकर उनसे करोड़ों का अनुबंध कर नए नए सॉफ्टवेयर के नाम पर ऊपरी सस्तर पर धन का बंदरबांट करने का करने का कारनामा 2012 से जब से राजस्व विभाग ऑनलाइन हुआ था जारी है। किंतु ये नियम केवल निचली स्तर पर है राजधानी स्तर पर तो मंत्रालय में तो ऑनलाइन व्यस्था चारों खाने चित्त है। एक रिपोर्ट के अनुसार कई मंत्रायल ऐसे है जिनमे 7-7प्रकरण ही ऑनलाइन हो सके है वे भी अपने अंजाम तक नही पंहुचे।
शिवराज मामा ने भी अपनी फौज में ऐसे मंत्रियों की फौज जोड़ी है जिसके लिए यदि अली बाबा चालीस—/…./की उपाधि दी जाए तो कोई अतिश्योक्ति नही होगी।
केवल 2-4मंत्रायल ऐसे है जहां काम की देख रेख है वरना राजस्व मंत्रालय जैसे भगवान भरोसे चल रहे है।
विगत 10 माह से ऑनलाइन सॉफ्टवेयर वंद है जनता का कोई भी काम कंप्यूटर पर नही हो पा रहा है। जिसके चलते सभी पटवारियों को संदेह की नजर से देखते है। हजारों ऑनलाइन से संबंधित शिकायत जनसुनवाई और 108 पर दर्ज है।
अधिकारी और नेताओं को भी इस समस्या से कोई मतलब नही है।जनता के अत्यन्त आवश्यक कार्य भी नही हो पा रहे है । जब अमल नहीं होना तो अधिकारी भी राजस्व प्रकरणो की फ़ाइल आगे नही वड़ा रहे।
इस प्रकार पूरा राजस्व विभाग पंचर पड़ा है। इस संदर्भ में 15 दिन पूर्व कुछ समाधान के लिए हमारी बात sdm प्रदीप तोमर और mla महेंद्र यादव से हुई थी कि इस दिशा में जिला कलेक्टर से बात कर कम से कम nic सॉफ्टवेयर का काम तो चालू करा ही देंगे किन्तु ऐसा कुछ नही हुआ। पूर्व में पटवारियों ने जनता का काम nic पर कर काम का अतिरिक्त बोझ जनता के हित के लिए खुद पर बड़ा लिया। अब सॉफ्टवेयर कंपनी उस कार्य को एक साथ उपलोड नही कर रही।
इसके लिए सभी अमले को दोबारा मेहनत करना है।इधर मुआवजा भी आधा अधूरा वितरित कर आगमी राशि न आना पटवारी अमले को जी का जंजाल बन गया है।कोलारस और बदरबास के नक्से कंप्यूटर पर ऑनलाइन दर्ज नही हैइसके समाधान के लिए भी नेताओं और अधिकारियों द्वारा कोई पहल नही की जा रही। 
सभी गहरी नींद में है और यही हालात उपचुनाव में थे जब 2 माह राजस्व मन्त्री उमाशंकर गुप्ता कोलारस रहे किन्तु एक भी राजस्व अमले की वैठक कर अपने विभाग के पटवारियों से ये नही पूछा कि जमीनी रूप से काम करने पर या सॉफ्टवेयर में काम करने पर परेशानी तो नही आ रही।
सब कुछ मनमाने तरीके से जारी है।ईमानदार पटवारी पर 4 -4 हल्के का बोझ है दिन रात काम कर रहे है वही कुछ भ्रष्ट पटवारी तो sdm के आदेश अनुसार मंगलवार और शुक्रवार को मुख्यालय पर उपस्थिति भी नही दे रहे है। इन पर वर्षों से जाँचे भी चल रही है किंतु हल्का वदलकर और फ़ाइल दवाकर इनका वचाव किया जा रहा है।
इससे ईमानदार पटवारी की मानशिकता भी खराब हो रही है।इसके लिए आवश्यक है कि जो जाँचे विचाराधीन है उन्हें नावर्ण sdm प्रदीप तोमर द्वारा अंजाम तक पहुँचाया जाना चाईए।वही नेताओं को कंप्यूटर अमल के मामले को राजधानी सस्तर पर उठाकर यदि समाधान नहीं होता तो न्यायालय में जनहित के लिर जाना चाईए।

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