प्रति मंगलवार को होने बाली जन सुनवाई बनी लोगों को दिखावा

कोलारस-शासन द्वारा प्रत्येक मंगलवार को जन सुनवाई करने के निर्देश दिये गये। प्रति मंगलवार को जन सुनवाई की जा रही है। परन्तु ग्रामीण अंचलो से आने बाले ग्रामीण जनो की समस्यायें जैसी थी बैसी ही बनी हुई है। चुकि अब प्रत्येक पंचायतो में भी जनसुनवाई आयोजित कि जा रही है। परन्तु जनसुनवाई में आवेदन लेकर आने बाले लोगो को परेशानी का सामना तब करना पडता है जब उनकी समस्याओ का समाधान पूरे एक माह तक नही हो पा रहा है। बीते माह सोनपुरा में संचालित राशन दुकान की शिकायत एक दर्जन से भी अधिक ग्रामीण जनो ने कोलारस एसडीएम के समक्ष की थी। परन्तु अभी तक उनकी समस्याएं हल नही हुई है। ग्रामीण क्षेत्रो से प्रत्येक मंंगलवार को ग्रामीण जन समस्याएं लेकर आते है। जिनमें बुजुर्ग लोग बृद्घ अवस्था पेंशन सहित कुटीर राशन की पर्ची विधवा महिलाये पेंशन सहित छात्र छात्रवृत्ति सहित लाडली लक्ष्मी योजना से लेकर अनेक समस्यायें लेकर आते है। यदि इन लोगो की बात पर यकिन किया जाये तो अभी तक अनेक समस्यायें बैसी की बैसी ही पडी हुई है। जिसके चलते दबी जुवान से यह लोग कहते है कि कैसी जन सुनवाई कुल मिलाकर जन सुनवाई तो लोगो को दिखावा ही शाबित हो रही है। अचरज बाली बात तो यह है कि ग्रामीण अंचलो में प्रत्येक पंचायत पर जन सुनवाई करने के निर्देश दिये गये है। परन्तु जब ग्रामीण अंचलो में देखा गया तो अनेक पंचायतो में सचिव से लेकर पटवारी तक गायब दिखाई दिये इस बात का अंदाजा आप स्वयं ही लगा सकते है। की जब कोलारस में ही जन सुनवाई मजाक बनी हुई है तो ग्राम पंंचायतो में होने बाली जन सुनवाई में ग्रामीण लोगो की समस्यायें कैसे हल होंगी।

कोलारस-शासन द्वारा प्रत्येक मंगलवार को जन सुनवाई करने के निर्देश दिये गये। प्रति मंगलवार को जन सुनवाई की जा रही है। परन्तु ग्रामीण अंचलो से आने बाले ग्रामीण जनो की समस्यायें जैसी थी बैसी ही बनी हुई है। चुकि अब प्रत्येक पंचायतो में भी जनसुनवाई आयोजित कि जा रही है। परन्तु जनसुनवाई में आवेदन लेकर आने बाले लोगो को परेशानी का सामना तब करना पडता है जब उनकी समस्याओ का समाधान पूरे एक माह तक नही हो पा रहा है। बीते माह सोनपुरा में संचालित राशन दुकान की शिकायत एक दर्जन से भी अधिक ग्रामीण जनो ने कोलारस एसडीएम के समक्ष की थी। परन्तु अभी तक उनकी समस्याएं हल नही हुई है। ग्रामीण क्षेत्रो से प्रत्येक मंंगलवार को ग्रामीण जन समस्याएं लेकर आते है। जिनमें बुजुर्ग लोग बृद्घ अवस्था पेंशन सहित कुटीर राशन की पर्ची विधवा महिलाये पेंशन सहित छात्र छात्रवृत्ति सहित लाडली लक्ष्मी योजना से लेकर अनेक समस्यायें लेकर आते है। यदि इन लोगो की बात पर यकिन किया जाये तो अभी तक अनेक समस्यायें बैसी की बैसी ही पडी हुई है। जिसके चलते दबी जुवान से यह लोग कहते है कि कैसी जन सुनवाई कुल मिलाकर जन सुनवाई तो लोगो को दिखावा ही शाबित हो रही है। अचरज बाली बात तो यह है कि ग्रामीण अंचलो में प्रत्येक पंचायत पर जन सुनवाई करने के निर्देश दिये गये है। परन्तु जब ग्रामीण अंचलो में देखा गया तो अनेक पंचायतो में सचिव से लेकर पटवारी तक गायब दिखाई दिये इस बात का अंदाजा आप स्वयं ही लगा सकते है। की जब कोलारस में ही जन सुनवाई मजाक बनी हुई है तो ग्राम पंंचायतो में होने बाली जन सुनवाई में ग्रामीण लोगो की समस्यायें कैसे हल होंगी।






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