करैरा में बंदरों का आतंक दिन व दिन बढ़ता
जा रहा है। बंदर की धमाचौकड़ी से यहां के रहवासी परेशान हो रहे हैं। लोग
बंदरों के आतंक से अपने घरों की छत पर नहीं जा पा रहे हैं। छत पर कोई खाद्य
सामग्री डली हो तो बंदरों का झुंड खाद्य सामग्री को उठाकर ले जाता है, अगर
कोई इन्हें भगाने का प्रयास करता है तो उस पर हमला कर देते हैं। वहीं
बंटरों के काटाने जाने पर करैरा में अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन नहीं
है। लोगों को बाहर से इंजेक्शन खरीदकर लगवाने पड़ रहे हैं।
एंटी रेबीज के इंजेक्शन का करैरा अस्पताल में अभाव
करैरा
में बढ़ते बंदरों के आतंक के कारण लोग भयभीत बने हुए हैं। अगर कोई भी
बंदरों के काटे जाने पर घायल होता है तो शासकीय अस्पताल में एंटी रेबीज के
इंजेक्शन भी मौजूद नहीं हैं। लोगों को बंदर के काटे जाने पर बाजार में जाकर
एंटी रेबीज के इंजेक्शन खरीदना पड़ता है ।
बीस साल पहले नप ने पकड़वाए थे आतंकी बंदरों को
नगर
परिषद करैरा के द्वारा 1994 में नगर में बढ़ते बंदरों के आतंक से छुटकारा
दिलाने के लिए मथुरा की टीम के द्वारा बंदरों को पकड़ कर जंगलो में छोड़ा गया
था, उसके बाद से आज तक न वन विभाग ने ध्यान दिया और न ही नप ने यह दोनों
विभाग आपस में एक-दूसरे पर कार्रवाई के लिए के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे है।
बंदरों के झुंड को देखकर भयभीत हो रहे लोग
-करैरा
में बंदरों का आतंक इतना ज्यादा बढ़ गया है कि महिला, पुरुष, बच्चे अपने ही
घर में पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। पिछली साल निचली बस्ती वार्ड 2 में
संजीव गोयल की माता अपने घर के आंगन में गेहूं सूखा रही थी, तभी पीछे से
बंदरों के झुंड ने हमला बोल दिया। वह बुरी तरह लहूलुहान हो गई।
-चार माह पूर्व वार्ड 11 निवासी प्राची छत पर टहलने क्या गई की बंदरों ने पीछे से आकर लहूलुहान कर दिया।
-अप्रैल
को गाड़ीवान मोहल्ला वार्ड 5 में रहने वाले बिजली विभाग के सेवानिवृत्त
लाइन सलीम खान की नातिन सूफिया को बंदरों ने छत से कपड़े उठाते समय धमाचौकड़ी
से पटक दिया था, जिसके कारण हाथ में चोट आ गई थी।
इनका कहना है
नगर
में बंदरों का आतंक बहुत ज्यादा बढ़ गया है। नगर परिषद और वन विभाग बिलकुल
भी ध्यान नहीं दे रहा है। जब तक बंदरों को पकड़कर जंगल में नही छोड़ा जाएगा,
तब तक इनके आतंक से निजात नहीं मिल सकती है।
सलीम खान, रिटायर कर्मचारी करैरा निवासी।
बंदरों
के बढ़ते आतंक के कारण हमारे मोहल्ले के लोगों ने चंदा वसूली करके बड़े-बड़े
पिंजरे बनवाए थे जो अभी है, लेकिन वन विभाग और नप से मदद न मिलने के कारण
कोई काम नहीं ले पा रहे हैं। अगर हम बंदरों को पिंजरे में बंद भी कर ले है,
तो जंगल में छोड़ने कौन जाए।
सोनू भारती दुबे, पार्षद वार्ड क्रमांक 2
परिषद की बैठक में जल्द बंदरों के बढ़ते आतंक को लेकर एक प्रस्ताव डालेंगे और इनको जल्द पकड़वाया जाएगा।
कोमल साहू, नप अध्यक्ष करैरा।





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