
शिवपुरी। जिले के कृषकों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के साथ-साथ मंडियों में आधुनिक सुविधाए उपलब्ध कराए जाने हेतु एवं कृषकों को अधिक दूरी पर अपनी उपज बेचने हेतु न जाने पड़े, इसके लिए जिला स्तरीय विपणन कार्य योजना बनाए जाने हेतु गतदिनों अपर कलेक्टर अशोक कुमार चौहान की अध्यक्षता में एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न हुई। जिलाधीश कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारीगण सहित जिले की समस्त मंडियों के सचिव और नामांकित कृषक एवं अनुज्ञप्तिधारी व्यापारी उपस्थित थे। जिले की एक वर्षीय, दो वर्षीय एवं तीन वर्षीय जिला स्तरीय विपणन कार्य योजना बनाई जाएगी। इस योजना का क्रियान्वयन दल के सदस्यों द्वारा किया जाएगा।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए अपर कलेक्टर चौहान ने कहा कि ऐसी मंडियां जो क्रियाशील नहीं है। उन्हें क्रियाशील कर किसानों की उपज को विक्रय कर बिचौलियों से मुक्त कर किसानों को मण्डियों में अद्योसंरचना के साथ-साथ मूलभूत सुविधाए बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि यह भी देखना होगा कि मण्डी के बाहर किसान की उपज की बिक्री न हो। जिले की विभिन्न मंडियों में जींस के भाव भी सभी मंडियों में डिस्पले किए जाए।
जिला स्तरीय विपणन कार्य योजना के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया गया कि जिला स्तरीय कार्य योजना को अल्प, मध्यम एवं दीर्घ अवधि कार्य योजना में बांटा जाएगा। जिसके लिए एक, दो एवं तीन वर्ष का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कार्यशाला मेें बताया गया कि जिला स्तरीय विपणन कार्य योजना दल द्वारा मुख्य कार्य किए जाएगें। जिसमें मुख्य रूप से अक्रियाशील उपमंडियों को क्रियाशील कर किसानों को उपज बेचने हेतु आकर्षित किया जाएगा। जिले में कृषकों के उत्पादन को देखते हुए नवीन मण्डी स्थापना का भी आंकलन किया जाएगा। मंडियों के अद्योसंरचनात्मक विकास के कार्य भी किए जाएगें।
कार्यशाला में बताया गया कि मण्डी प्रबंधक द्वारा कृषि उपज के भावों में राज्य स्तर की तुलना में अंतर को न्यूनतम करने की कार्य योजना भी बनाई जाएगी। मंडियों में प्राप्त होने वाले जीन्स, मार्केटेबल, सरप्लस का अगले तीन वर्षों में क्रमश: 20, 40 एवं 60 प्रतिशत भाग की बढ़ोत्तरी कर मड़ियों में आवक की वृद्धि सुनिश्चित की जाएगी। कार्यशाला में कृषकों द्वारा बताया गया कि अधिक मूल्य वाली फसलें जैसे मसाले इत्यादि की मण्डी में आवक बढ़ाना, जिले में उत्पादों के प्रसंस्करणकर्ताओं को मण्डी से जोड़ना आदि पर भी चर्चा की गई।






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