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आज आम चुनाव बांग्लादेश में : बांग्लादेश अहम भारत की नॉर्थ – ईस्ट राज्यों की सुरक्षा के लिए ; क्यों PM हसीना की जीत तय चुनाव से पहले ही / बांग्लादेश

बांग्लादेश को भारत, वहां की सरकार, लोगों और सेनाओं को नहीं भूलना चाहिए क्योंकि 1971 में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने बांग्लादेश का साथ दिया था।

2022 में भारत दौरे के वक्त बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने यह बात कही थी। उनके इस बयान की मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने आलोचना की थी। पार्टी के एक सीनियर नेता रुहुल कबीर रिजवी ने BBC से कहा था- भारत को किसी एक पार्टी नहीं, बल्कि बांग्लादेश के लोगों का समर्थन करना चाहिए। दुर्भाग्य यह है कि भारत के पॉलिसीमेकर बांग्लादेश में लोकतंत्र नहीं चाहते हैं।

आज भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में आम चुनाव हो रहे हैं। PM शेख हसीना लगातार चौथी बार प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव लड़ रही हैं। बांग्लादेश तीन तरफ से भारत के साथ सीमा साझा करता है। वहीं म्यांमार से भी वो 271 किमी लंबी सीमा शेयर करता है।

नॉर्थ ईस्ट राज्यों से कनेक्शन और वहां की सुरक्षा के लिहाज से बांग्लादेश भारत के लिए बेहद अहम साझेदार है। वहीं चीन के BRI प्रोजेक्ट का हिस्सा होने के साथ ही बांग्लादेश के ड्रैगन से मजबूत रिश्ते हैं।

तस्वीर 2022 की है। बांग्लादेश की PM शेख हसीना 4 दिन के दौरे पर भारत आई थीं।

तस्वीर 2022 की है। बांग्लादेश की PM शेख हसीना 4 दिन के दौरे पर भारत आई थीं।

ऐसे में आज हम जानेंगे कि बांग्लादेश के चुनावों की भारत और चीन के लिए क्या अहमियत है? और क्यों वोटिंग से पहले ही PM हसीना की जीत तय मानी जा रही है?

बांग्लादेश में सुबह 7:30 बजे (भारतीय समयानुसार) से वोटिंग शुरू हो चुकी है। 8 जनवरी को नतीजों की घोषणा होगी। देश के मुख्य विपक्षी पार्टियां इस चुनाव का बहिष्कार कर रही हैं। इनका नेतृत्व सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) कर रही है। ऐसे में सत्ताधारी पार्टी अवामी लीग की जीत तकरीबन तय मानी जा रही है।

दरअसल, विपक्ष का आरोप है कि PM हसीना के नेतृत्व में निष्पक्ष चुनाव नहीं हो पाएंगे। उनकी मांग है कि शेख हसीना अपना पद छोड़ दें और फिर एक केयकटेकर सरकार के नेतृत्व में चुनाव करवाए जाएं। PM हसीना ने इस मांग को खारिज कर दिया है। ऐसे में इन चुनावों में बैलेट पेपर पर अवामी लीग के उम्मीदवारों, उनकी सहयोगी पार्टी के कैंडिडेट्स और निर्दलीय चुनाव लड़ने वालों के नाम ही लिखे जाएंगे।

भारत की मदद से ही बांग्लादेश को मिली आजादी
बांग्लादेश के चुनावों में हमेशा से भारत की चर्चाएं रहती है। चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं के भाषण में भारत का जिक्र होता रहता है। दोनों देशों में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्तर पर कई समानताएं हैं। 1971 से पहले तक बांग्लादेश पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान का हिस्सा था। इसे पूर्वी पाकिस्तान कहा जाता था।

साल 1971 में बांग्लादेश में पाकिस्तान की सत्ता के खिलाफ विद्रोह तेज होने लगा था। अवामी लीग पार्टी के नेता शेख मुजीब-उर-रहमान ने 26 मार्च 1971 को बांग्लादेश को आजाद घोषित कर दिया था।

इसके बाद महीनों तक चली आजादी की लड़ाई के बाद दिसंबर में पाकिस्तान के साथ जंग की शुरुआत हुई, जिसमें भारत ने बांग्लादेश का साथ दिया था। 13 दिन तक चली जंग के बाद 16 दिसंबर को पाकिस्तान की सेना ने समर्पण कर दिया था। इस युद्ध में चीन ने पाकिस्तान का साथ दिया था।

नॉर्थ-ईस्ट राज्यों से कनेक्शन के लिए बांग्लादेश अहम
बांग्लादेश के साथ भारत सड़क, नदी और ट्रेन मार्ग से जुड़ा है। इनका इस्तेमाल बांग्लादेश से व्यापार के साथ-साथ नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों में जरूरी सामान पहुंचाने के लिए भी किया जाता है। ये 20 किलोमीटर चौड़ा एक कॉरिडोर है जो नेपाल, बांग्लादेश और भूटान के पास से होकर गुजरता है। इसे सिलगुड़ी कॉरिडोर या चिकेन्स नेक कहते हैं।

BBC के मुताबिक, 1996 में पहली बार चुनाव जीतने के बाद से अवामी पार्टी की नेता शेख हसीना ने भारत से करीबी रिश्ते रखे हैं। 2001 में बांग्लादेश में BNP पार्टी ने चुनाव जीते। BNP लीडर खालिदा जिया प्रधानमंत्री बनीं। अंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट्स ने यूं तो चुनावों को निष्पक्ष बताया था, लेकिन अलजजीरा के मुताबिक इस दौरान हुई हिंसा में हिंदू समुदाय के लोगों को निशाना बनाया गया था।

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