लखनऊ

सपा प्रमुख अखिलेश यादव आज CBI के सामने पेश नहीं हुए। CBI ने 5 साल पुराने अवैध खनन केस में उन्हें दिल्ली में बतौर गवाह पूछताछ के लिए बुलाया था। हालांकि, उन्होंने लिखित में CBI को जवाब भेज दिया है। लखनऊ में पार्टी मुख्यालय पर उन्होंने कहा कि सभी जानते हैं कि समन कौन भेजवा रहा है।
उन्होंने कहा कि 2019 के बाद यानी पिछले 5 सालों में कोई जानकारी क्यों नहीं मांगी गई? मैं समझता हूं कि जब चुनाव आएगा, तब नोटिस भी आएगा। भाजपा इस समय सबसे ज्यादा कमजोर है। वह घबराई हुई है।
चलिए, अब आपको अखिलेश की 3 बड़ी बातें पढ़वाते हैं…

अखिलेश ने कहा कि सरकार ने जानबूझकर क्वेश्चन पेपर लीक कराया है।
1- भाजपा को मनोज पांडेय को डिप्टी सीएम बना देना चाहिए
अखिलेश यादव तंज कसते हुए कहा कि भाजपा को मनोज पांडेय को डिप्टी सीएम बना देना चाहिए। बीजेपी तो एक्सचेंज के थीम पर चलती है। दिनेश शर्मा हटे तो कोई और आया। अब इनकी बारी है।
2- सरकार ने जानबूझकर क्वेश्चन पेपर लीक कराया
अखिलेश यादव ने कहा कि जिस सरकार ने दावा किया है कि 60 लाख बच्चों की परीक्षा नौकरी देंगे। उसने जानबूझकर क्वेश्चन पेपर लीक कराया है। सरकार की नीयत ठीक नहीं है। नौकरी देंगे तो आरक्षण देना पड़ेगा। आरक्षण देना पड़ेगा तो PDA मजबूत होगा।
3- आप विधायकों को पैकेज दे सकते हैं…मगर जनता को नहीं
अखिलेश ने कहा कि अग्निवीर इसलिए लाई गई है कि सरकार PDA परिवार की आर्थिक रूप से कमजोर करना चाहती है। आप विधायकों को पैकेज दे सकते हैं। मगर जनता को पैकेज नहीं दे सकते हैं। हमने किसी को नहीं रोका दर्शन करने मत जाओ। वह लोग गलत बयानबाजी कर रहे हैं।
अब पढ़िए वह मामला जिसमें अखिलेश को नोटिस भेजा गया…

वर्तमान में आईएएस बी. चंद्रकला को महिला कल्याण विभाग का सचिव बनाया गया है।
अवैध खनन का यह मामला हमीरपुर में 2012-2016 के बीच का है। जनवरी 2019 में CBI ने इस मामले में 11 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। FIR में हमीरपुर की तत्कालीन DM बी. चंद्रकला , खनिज अधिकारी मोईनउद्दीन, सपा MLC रमेश मिश्रा (अब भाजपा में हैं), संजय दीक्षित और उनके पिता सत्यदेव दीक्षित सहित अन्य लोग शामिल थे। इसके बाद CBI ने IAS बी. चंद्रकला के लखनऊ स्थित फ्लैट समेत 14 जगहों पर छापेमारी की थी। यह छापेमारी कानपुर, लखनऊ, हमीरपुर, जालौन, नोएडा में हुई थी।
इसके बाद आईपीसी की धारा- 379, 384, 420, 511 120 B और भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत CBI ने केस दर्ज किया था। FIR में कहा गया था कि 2012 से 2016 के बीच में हमीरपुर में बालू की माइनिंग अवैध तरीके से की गई थी। शिकायतों के मुताबिक, अधिकारी अवैध खनन कर रहे लोगों और अवैध बालू ले जा रहे वाहनों के ड्राइवरों से पैसे ऐंठते थे।

यह उस समय की तस्वीर है, जब गायत्री प्रजापति मंत्री थे।
यही नहीं, इसमें आरोप लगाया था कि सरकारी कर्मचारियों ने हमीरपुर में खनिजों का अवैध खनन होने दिया। सरकारी अधिकारियों ने आपराधिक साजिश रची। टेंडर प्रक्रिया का पालन नहीं किया। अवैध रूप से नए पट्टे और नवीनीकरण किया। 2012 से 2016 के बीच अखिलेश यादव यूपी के मुख्यमंत्री थे। उस वक्त गायत्री प्रजापति खनन मंत्री थे। अवैध खनन सामने आने के बाद उनका विभाग बदल गया था। यह विभाग सीएम के पास आ गया था।
अखिलेश के कार्यालय ने 1 ही दिन में 13 प्रोजेक्ट की मंजूरी दी

ये 2019 के दौरान की तस्वीर है, जब हमीरपुर में खनन को लेकर CBI ने जांच शुरू की थी।
अफसरों ने बताया कि एजेंसी ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यालय ने एक ही दिन में 13 परियोजनाओं को मंजूरी दी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि अखिलेश के पास कुछ समय तक खनन विभाग था। ई-टेंडर प्रोसेस का उल्लंघन करते हुए 14 पट्टों को मंजूर थी। इनमें से 13 को 17 फरवरी 2013 को मंजूरी दी गई थी।
CBI ने दावा किया कि 17 फरवरी 2013 को 2012 की ई-टेंडर नीति का उल्लंघन करते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय से अनुमोदन करने के बाद हमीरपुर की डीएम बी. चंद्रकला द्वारा पट्टे दिए गए थे।










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