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किसानों को 500 रुपए में ब्लैक में बांटे गए टोकन: गुस्साए किसानों ने किया चक्काजाम, खाद की कालाबाजारी के लगाए आरोप / Shivpuri News

शिवपुरी: कोलारस कस्बे में 500 रुपए में ब्लैक में टोकन मिलने से नाराज किसानों ने सोमवार को जगतपुर तिराहे पर चक्काजाम कर दिया। उन्होंने कालाबाजारी के आरोप लगाए। सुबह किसान कोलारस की नई तहसील पर खाद के टोकन लेने पहुंचे थे।

यहां अज्ञात लोगों द्वारा द्वारा तहसील परिसर में किसानों को 500 रुपए लेकर ब्लैक में खाद के टोकन थमा दिए गए। ब्लैक में टोकन मिलने का पता चलते ही किसान आक्रोशित हो गए। चक्काजाम की सूचना मिलते ही मौके पर तहसीलदार सचिन भार्गव और नायब तहसीलदार शैलेन्द्र भार्गव पहुंचे। उन्होंने किसानों को समझाइस दी, इसके बाद मामला शांत हुआ।

तहसील परिसद में बांटे गए ब्लैक में टोकन

खरेह गांव के रहने वाले किसान ने बताया कि खाद की किल्लत थी। आज वह टोकन लेने के लिए कोलारस तहसील पर पहुंचे थे। यहां एक व्यक्ति ने उसे 500 रुपये में ब्लैक में खाद का टोकन थमा दिया। उसने खाद के लिए इंतजार करने को कहा।

बैरसिया के रहने वाले किसान बलवीर तोमर ने बताया कि उसके पास भी एक व्यक्ति आया था। 500 रुपए में ब्लैक में टोकन देने की बात कही। उस व्यक्ति का कहना था कि इस टोकन के जरिए 3 बोरी यूरिया और 3 बोरी डीएपी खाद मिल जाएगी। मैंने ब्लैक में टोकन नहीं खरीदा।

कुछ किसानों ने आरोप लगाया कि उन्हें समय पर खाद तय भाव में नहीं मिल पा रहा हैं। बाजार में 1800 रुपए से लेकर 2000 रुपए तक के महंगे भाव में डीएपी खाद आसानी से उपलब्ध है।

बिना सूचना के किसान टोकन लेने पहुंचे

कोलारस तहसीलदार सचिन भार्गव और नायब तहसीलदार शैलेन्द्र भार्गव ने बताया कि कोलारस में शुक्रवार को 1000 डीएपी खाद की बोरियां आई हुई थी, जो किसानों को बांट दी गई। अभी कोलारस में डीएपी खाद नहीं है। बाकी एनपीके आदि खाद मौजूद है, जो किसानों को बिना टोकन के ही बांटी जा रही है।

तहसीलदार सचिन भार्गव का कहना था कि आज टोकन वितरण नहीं होना था, इसके बावजूद कई किसान टोकन लेने पहुंच गए थे। जब भी टोकन बांटे जाते हैं, इसकी सूचना एक दिन पहले जारी कर दी जाती है, बावजूद किसान बिना सूचना के तहसील परिसर में टोकन लेने पहुंच गए थे।

जो टोकन ब्लैक किए गए हैं। वह मुख्य टोकन नहीं हैं। टोकन वितरण के दौरान जिन किसानों को खाद का टोकन नहीं मिल पाता है। उन किसानों को पहले टोकन मिल सके, इसके लिए यह रसीद किसानों को दे दी जाती है। हालांकि ये रसीद किसने बांटी या जिन किसानों को दी गई वह अन्य किसानों को थमा के चले गए इसकी पड़ताल की जा रही हैं।

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