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ADPO ने मुश्किल समय में लगाए थे परिचित को फोन, फोन उठ जाता तो बच सकती थी जान / Shivpuri News

शिवपुरी के माताटीला डेम के केचमेंट एरिया में एडीपीओ का शव मंगलवार की दोपहर मिला। इससे पहले सोमवार को एडीपीओ की कार नदी में मिली थी। कार में व्यापारी का शव भी मिला था। लेकिन जिस स्थान पर एडीपीओ की कार मिली थी घटना वहां नहीं हुई थी। जबकि एडीपीओ और व्यापारी दुर्घटना का शिकार सुजवाया के रास्ते में पड़ने वाली पुलिया पर हुए थे।


यह भी सामने आ चुका है। उनकी कार काफी देर तक रपटे में पानी के बहाव में फंसी रही थी।ऐसे में जांच में सामने आया है कि घटना के वक्त अपनी मौत को सामने देखते हुए एडीपीओ ने मदद के लिए कई फोन लगाए थे, लेकिन जिसकी उन्होंने मदद से की वो उनकी मदद नहीं कर पाया।

आखिर क्या हुआ था उस रात

पिछोर के एडीपीओ राकेश रोशन अपने घर के सामने रहने वाले शिवम गुप्ता के साथ रविवार 7 जुलाई की शाम पार्टी करने के लिए माताटीला के लिए निकले थे। करीब 8 बजे उन्हें शिवम गुप्ता के पास में कटिंग की दुकान चलाने वाला सुजवाया गांव का केदारनाथ सेन एलपीजी सिलेंडर के साथ मिल गया था। केदारनाथ से एडीपीओ के भी अच्छे संबंध थे। इसके चलते एडीपीओ ने केदारनाथ को माताटीला जाते वक्त घर छोड़ने के लिए कार में बैठा लिया था। करीब 8 बजे तीनों कार में सवार होकर निकले थे। बताया गया है कि इस बीच राकेश और शिवम गुप्ता ने ड्रिंक भी की थी। चंदेरी रोड को छोड़कर कार साढ़े तीन किलोमीटर दूर सुजवाया गांव के लिए मोड़ दी गई थी। उस वक्त भयंकर बारिश हो रही थी। कुछ दूरी पर पेट्रोल पंप के पास एक रपटा मिला था। लेकिन उस वक्त उस रपटे पर पानी टकराते हुए वह रहा था। रपटे को पार कर इनकी कार सुजवाया गांव पहुंची थी।

केदारनाथ के मुताबिक राकेश रोशन ने उसे रात 9 बजे घर छोड़ा था। इसके बाद राकेश और शिवम लौट गए। उसने बारिश तेज होने पर न जाने की बात भी कही थी। माना जा रहा है लौटते वक्त तेज बारिश के चलते नाले का पानी रपटे के ऊपर से बहने लगा था। खतरे को ना भांपते हुए एडीपीओ ने अपनी कार रपटे के ऊपर से गुजार दी थी। यहीं से कार करीब एक किलोमीटर दूर बहकर चंदेरी रोड बुधना नदी के पुल तक पहुंची। ग्रामीणों की माने तो तेज बारिश के दौरान पानी रपटे के कई फीट ऊपर तक चला जाता है।

फोन उठता तो बच सकती थी जान

केदारनाथ के मुताबिक उसके मोबाइल पर 9 बजकर 18 मिनट पर एडीपीओ ने फोन लिए थे, लेकिन भीगने की वजह से वह फोन उठा नहीं पाया था। एडीपीओ ने अपने मोबाइल से डायल 100 को फोन भी लगाया था लेकिन कॉल जुड़ नहीं पाया था। माना जा रहा है। कार जब रपटे के बहाव में फंसी तब एडीपीओ ने फोन कर मदद मांगने का प्रयास किया था, लेकिन केदारनाथ का फोन उठा नहीं और डायल 100 का लगा नहीं। संभवता रपटे के पानी के बीच फंसी कार को एडीपीओ नहीं निकाल सके और ना ही दोनों कार से बाहर आ सके। आखिरकार कार को पानी का तेज बहाव अपने साथ ले गया। सोमवार की सुबह कार रपटे से एक किलोमीटर दूर मिली, कार में शिवम का शव मिला लेकिन एडीपीओ का शव मंगलवार को चार किलोमीटर दूर माताटीला के केचमेंट एरिया में मिला।

6 बहनों में इकलौते भाई थे राकेश

एडीपीओ राकेश रोशन मुलत: ग्वालियर के लश्कर क्षेत्र के रहने वाले थे। करीब डेढ़ साल पहले राकेश का तबादला पिछोर के न्यायालय में हुआ था। 50 साल के राकेश 6 छोटी बहनों के इकलौते भाई थे। राकेश की शादी हुई लेकिन करीब 15 साल पहले बीवी से तलाक हो गया था। तब से राकेश अकेले रह रहे थे। बता दें एडीपीओ के सरकारी क्वार्टर के सामने केदारनाथ कटिंग की दुकान करता था। इससे केदारनाथ की पहचान एडीपीओ से हो गई थी। शिवम की पहचान भी केदारनाथ ने ही एडीपीओ से कराई थी।

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