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गाजा में फूड पैकेट समुद्र में गिरे 12 लोग डूबे: खराबी आई 3 बंडलों के पैराशूट में, फिलिस्तीनी इन्हें निकालने के लिए पानी में उतरे /INTERNATIONAL

फुटेज में लोग समुद्र से खाने के बक्से निकालते नजर आ रहे हैं। UN के मुताबिक गाजा की 22 लाख से ज्यादा आबादी भुखमरी की कगार पर है।

इजराइल-हमास जंग के बीच 23 लाख की आबादी वाले गाजा में खाने का संकट गंभीर होता जा रहा है। मंगलवार को उत्तर गाजा से बेट लाहिया में विमानों से गिराए गए फूड पैकेज पाने की कोशिश में 18 लोगों की मौत हो गई। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, इनमें से 12 लोग समुद्र में डूब गए और 6 की मौत भगदड़ में हुई।

पेंटागन की प्रवक्ता सबरीना सिंह के मुताबिक, सोमवार को अमेरिका ने गाजा में एड के 80 बंडल भेजे थे। इनमें से तीन पर लगे पैराशूट में कुछ खराबी आ गई थी, जिसकी वजह से ये पानी में गिर गए। हालांकि, इस दौरान हुई मौतों की पुष्टि नहीं हो पाई है। फिलिस्तीन सरकार ने कहा कि विमान से राहत सामग्री गिराना बेकार है, इसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए।

सहायता एजेंसियों ने कहा कि जरूरत के सामान की सप्लाई का करीब पांचवां हिस्सा ही गाजा में प्रवेश कर रहा है। इजराइल ने हवाई और जमीनी हमले जारी रखे हैं, जिसने क्षेत्र को तबाह कर दिया है। इस वजह से गाजा के कुछ हिस्सों में अकाल जैसी स्थिति बन गई है।

तस्वीर में पैराशूट से गिराए जा रही राहत सामग्री को लेने के लिए फिलिस्तीनी उसके पीछे भागते दिख रहे हैं।

तस्वीर में पैराशूट से गिराए जा रही राहत सामग्री को लेने के लिए फिलिस्तीनी उसके पीछे भागते दिख रहे हैं।

बक्से समुद्र में गिरने के बाद लोग इन्हें निकालने के लिए पानी में उतर गए।

बक्से समुद्र में गिरने के बाद लोग इन्हें निकालने के लिए पानी में उतर गए।

इजराइल ने गाजा पर 2 एटम बम के बराबर विस्फोटक गिराए
UN में फिलिस्तीन के विशेष दूत फ्रांसेस्का अल्बानीज ने आरोप लगाया कि इजराइल ने 6 महीने से कम समय में गाजा पर 25 हजार टन विस्फोटक गिराया है, जो करीब दो परमाणु बम के बराबर है। दरअसल, 6 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा पर गिराया गया अमेरिकी परमाणु बम लिटिल बॉय 15 हजार टन का था।

इससे पहले, गाजा में सीजफायर के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में वोटिंग हुई। प्रस्ताव 14-0 से पास हो गया। इस प्रस्ताव में रमजान में युद्धविराम की अपील और 7 अक्टूबर के सभी बंधकों की रिहाई की भी मांग की गई। यह पहली बार था जब अमेरिका ने वोटिंग से दूरी बनाई।

अमेरिका ने गाजा के दीर अल बलाह इलाके में खाने के बक्से गिराए थे। लोग इन्हें लेने के लिए दौड़ पड़े थे। (क्रेडिट- न्यूयॉर्क टाइम्स)

अमेरिका ने गाजा के दीर अल बलाह इलाके में खाने के बक्से गिराए थे। लोग इन्हें लेने के लिए दौड़ पड़े थे। (क्रेडिट- न्यूयॉर्क टाइम्स)

खाना लेने पहुंचे लोगों पर इजराइली सेना ने फायरिंग की थी
इससे पहले मार्च की शुरुआत में अमेरिका ने पहली बार गाजा में मदद पहुंचाई थी। अमेरिकी सेना के एयरक्राफ्ट ने पैराशूट से फिलिस्तीनियों के लिए खाने के बक्से गिराए थे। इन्हें लेने के लिए लोग समुद्र में दौड़ लगाते नजर आए थे। अमेरिका ने 66 बक्सों में 38 हजार रेडी-टु-ईट मील्स गिराए थे।

वहीं 1 मार्च को खाना लेने पहुंचे फिलिस्तीनियों पर इजराइली सैनिकों ने फायरिंग कर दी थी। इस घटना के फोटो-वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इनसे पता चल रहा था कि जहां फायरिंग हुई वो एड पॉइन्ट समुद्र के पास ही था। इस दौरान 112 लोगों की मौत हुई थी।

जिस ट्रक में राहत सामग्री पहुंची, उसी से अस्पताल पहुंचे थे शव
इन्हें गधा गाड़ी से अस्पताल ले जाया गया था। इसके अलावा जिस ट्रक में राहत सामग्री पहुंची थी उसमें भी शवों और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया था। UN के मुताबिक गाजा की 22 लाख से ज्यादा आबादी भुखमरी की कगार पर है।

7 अक्टूबर 2023 को शुरू हुई इजराइल-हमास जंग में अब तक 24 अस्पताल और 123 एम्बुलेंस तबाह हो चुकी हैं। अलजजीरा के मुताबिक, जंग में 32 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनियों की मौत हो गई है, जबकि 74 हजार से ज्यादा घायल हैं।

फिलिस्तीनियों पर हुई फायरिंग के बाद शवों को गधा गाड़ी पर ले जाया गया था।

फिलिस्तीनियों पर हुई फायरिंग के बाद शवों को गधा गाड़ी पर ले जाया गया था।

‘अल-अक्सा फ्लड’ के खिलाफ इजराइल का ऑपरेशन ‘सोर्ड्स ऑफ आयरन’
हमास ने इजराइल पर 7 अक्टूबर को हमला किया था। उसने इजराइल के खिलाफ अपने ऑपरेशन को ‘अल-अक्सा फ्लड’ नाम दिया। इसके जवाब में इजराइल की सेना ने हमास के खिलाफ ‘सोर्ड्स ऑफ आयरन’ ऑपरेशन शुरू किया। हमास के सैन्य कमांडर मोहम्मद दीफ ने कहा था- ये हमला यरुशलम में अल-अक्सा मस्जिद को इजराइल की तरफ से अपवित्र करने का बदला है। दरअसल, इजराइली पुलिस ने अप्रैल 2023 में अल-अक्सा मस्जिद में ग्रेनेड फेंके थे।

वहीं, हमास के प्रवक्ता गाजी हामद ने अल जजीरा से कहा था- ये कार्रवाई उन अरब देशों को हमारा जवाब है, जो इजराइल के साथ करीबी बढ़ा रहे हैं। हाल ही के दिनों में मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि अमेरिका की पहल पर सऊदी अरब इजराइल को देश के तौर पर मान्यता दे सकता है।

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