भोपाल

भोपाल साइबर क्राइम ब्रांच ने दोनों ठगों को जेल भेज दिया।
खुद को मुख्यमंत्री का OSD बताकर दो जालसाजों ने 12 सरकारी कर्मचारियों से 20 लाख रुपए से अधिक की ठगी की है। यह रकम 6 से अधिक बैंक खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी। इनमें 2 खाते भोपाल के हैं। जालसाजों ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उनके निशाने पर शिक्षा विभाग के कर्मचारी थे। दोनों बीते 3 महीनों से टीकमगढ़ और निवाड़ी में सक्रिय थे। शुक्रवार को दोनों को जेल भेज दिया गया।
साइबर क्राइम पुलिस के मुताबिक टीकमगढ़ में रहने वाले एक वृद्ध ने पिछले दिनों शिकायत की थी, जिसमें बताया था कि उनका बेटा शिक्षा विभाग में पदस्थ है। मुझसे निवाड़ी के सौरभ बिलगाइया (32) ने संपर्क कर कहा था कि आपके बेटे का ट्रांसफर होने वाला है। मनचाही पोस्टिंग के लिए वह ढाई लाख रुपए खर्च करें तो उनका काम करा सकता है।
भरोसा दिलाने सौरभ ने मुझे एक फर्जी ट्रांसफर ऑर्डर दिखाया, जिसमें मेरे बेटे का नाम भी शामिल था। मैंने बेटे से कहकर सौरभ के बताए खाते में रकम ऑनलाइन ट्रांसफर करा दी थी। वह खुद को सीएम का OSD (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) बताता था।
रकम मिलते ही फोन उठाना बंद कर दिया
रुपए मिलने के बाद सौरभ ने कॉल अटैंड करना बंद कर दिया। तब बुजुर्ग ने मामले की शिकायत की। इस शिकायत को भोपाल साइबर क्राइम ब्रांच ट्रांसफर कर दिया गया। इसकी वजह यह थी कि जिस खाते में रुपए ट्रांसफर हुए, वह भोपाल का था।
मामले की जांच साइबर क्राइम ब्रांच भोपाल से की गई। सौरभ और उसके साथी हरबल कुशवाह ( 23) को गिरफ्तार कर लिया गया। सौरभ मनी ट्रांसफर वालों से खाते अरेंज कराने का काम करता था। हालांकि, यह खाते उन्हें गुमराह कर अलग-अलग बहाने से इस्तेमाल कराए जाते थे।

साइबर क्राइम भोपाल ने सौरभ बिलगाइया और हरबल कुशवाह को गिरफ्तार किया है।
दोनों जालसाजों को निवाड़ी से किया गिरफ्तार
भोपाल साइबर क्राइम ब्रांच ने एक शिकायत पर निवाड़ी से सौरभ बिलगाइया (32) और हरबल कुशवाह ( 23) को दबोचा है। शिकायत में आवेदक ने ढाई लाख की ठगी की बात कही थी। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी एनालिसिस और मैदानी स्तर पर साक्ष्य जुटाए। दोनों के पास से 2 मोबाइल और 2 सिम कार्ड को जब्त किए गए।
मनी ट्रांसफर करने वालों के खातों में बुलाते थे रुपए
जालसाज कर्मचारी के मोबाइल नंबर पर एक फर्जी ट्रांसफर लिस्ट भेजते थे। जिस वॉट्सएप नंबर से लिस्ट भेजते थे, उसकी डीपी (डिस्प्ले पिक्चर) में मध्यप्रदेश सरकार का लोगो होता था, जिससे कर्मचारी आसानी से भरोसा कर लेता था।
बाद में सौरभ फोन लगाकर खुद को मुख्यमंत्री का OSD बताता और ट्रांसफर रुकवाने की बात कहता था। इसके लिए बाकायदा लेन-देन की बात होती थी। खास बात यह है कि ठगी के पैसे प्राप्त करने के लिए वे गांव के आसपास मनी ट्रांसफर वालों के खातों का इस्तेमाल करते थे।










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