भोपाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 फरवरी को झाबुआ की धरती से एमपी में लोकसभा चुनाव प्रचार का आगाज करेंगे। मोदी आदिवासी बहुल इस सेंटर पाइंट से एमपी की 6, गुजरात और राजस्थान की 4 सीटें को साधने की कोशिश करेंगे।
भाजपा लोकसभा चुनाव में आदिवासी सीटों को लेकर कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि पीएम के दौरे से एक दिन पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आदिवासी बहुल जिला मंडला में लाड़ली बहना योजना की किस्त बांटने पहुंचे थे। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी को यहां से झटका लग चुका है।
झाबुआ में मोदी की पहली चुनावी सभा के क्या मायने हैं? पीएम ने लोकसभा चुनाव के आगाज के लिए झाबुआ को ही क्यों चुना? इसका क्या असर पड़ेगा? पढ़िए इस रिपोर्ट में…
तीन पॉइंट में समझिए लोकसभा चुनाव के आगाज के लिए झाबुआ चुनने की वजह..
1. रतलाम-झाबुआ सीट हमेशा से भाजपा के लिए रही टफ
झाबुआ जिले की तीन विधानसभा सीटों में से दो सीटें, झाबुआ व थांदला पर कांग्रेस का कब्जा है। वहीं पेटलावद से भाजपा की निर्मला भूरिया ने जीत दर्ज की है।
बात करें रतलाम-झाबुआ लोकसभा सीट की तो इसमें तीन जिलों की आठ विधानसभा सीटें आती है। अलीराजपुर जिले की अलीराजपुर व जोबट, झाबुआ जिले की झाबुआ, थांदला व पेटलावद और रतलाम जिले की रतलाम शहर, रतलाम ग्रामीण व सैलाना शामिल हैं।
विधानसभा चुनाव के नतीजों पर गौर करें तो आठ विधानसभा सीटों में चार सीटों पर भाजपा का कब्जा है। तीन सीटें जोबट, झाबुआ, थांदला कांग्रेस ने जीती है। वहीं सैलाना में भारत आदिवासी पार्टी को जीत मिली है।
विधानसभा में भाजपा-कांग्रेस को मिले वोट को जोड़ लिया जाए तो भाजपा इस लोकसभा सीट पर सिर्फ 23595 वोट की ही लीड ले पाई है।
रतलाम-झाबुआ लोकसभा सीट के नतीजे

2. आदिवासियों को दो साल से साध रही है भाजपा
भाजपा को 2018 के विधानसभा चुनाव में आदिवासी सीटों पर ही झटका लगा था। तब वह सत्ता से बाहर हो गई थी। यही कारण है कि भाजपा लगातार आदिवासी वर्ग को साधने की कवायद में जुटी है।
पेसा एक्ट से लेकर आदिवासियों को साधने के लिए कई योजनाएं सरकार ने शुरू की है। इसके बावजूद विधानसभा चुनाव 2023 में आदिवासियों के लिए आरक्षित 47 सीट में से 24 सीट ही भाजपा जीत पाई। 22 सीट कांग्रेस और एक सीट पर भारत आदिवासी पार्टी ने कब्जा जमाया है।
अब लोकसभा चुनाव में फिर भाजपा ने आदिवासी वर्ग को साधने की रणनीति बनाई है। इस बार पीएम नरेंद्र मोदी ने खुद ये कमान संभाली है। मोदी झाबुआ की सभा में आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन संबंधी तीन बड़े मुद्दे पर कोई बड़ा ऐलान भी कर सकते हैं।

3. एमपी के अलावा राजस्थान, गुजरात भी साधेंगे पीएम
झाबुआ आदिवासियों का सेंट्रल पाइंट है। यहां से पीएम प्रदेश की 6 आदिवासी सीटों रतलाम-झाबुआ, बैतूल, खरगौन, धार, मंडला व शहडोल को साधेंगे। वहीं गुजरात की पंचमहल, छोटा उदयपुर, दाहोद और राजस्थान की बांसवाड़ा लोकसभा पर भी पीएम के इस सभा का असर पड़ेगा।
बात मध्यप्रदेश की करें तो यहां पर आदिवासी बहुल छिंदवाड़ा, मंडला, बालाघाट, धार, खरगौन में भाजपा का प्रदर्शन विधानसभा चुनाव में कमजोर दिखा है। पार्टी यहां से नए प्रत्याशी उतार सकती है।
आदिवासी बहुल सीटों को साधने के लिए ही प्रदेश सरकार में पेटलावद की विधायक निर्मला भूरिया और अलीराजपुर के आदिवासी विधायक नागर सिंह चौहान को मंत्री बनाया गया है। पार्टी सूत्रों की माने तो इन दोनों में से किसी एक को लोकसभा में प्रत्याशी बना सकती है।
आदिवासियों पर पूरा फोकस
लोकसभा चुनाव में भाजपा इस बार आदिवासियों पर पूरा फोकस रख रही है। पीएम के कार्यक्रम में भी आदिवासी नेताओं को तवज्जो दी जा रही है। पार्टी की ओर से आदिवासी क्षेत्रों में ज्यादा से ज्यादा गतिविधियां संचालित की जा रही है। पीएम के कार्यक्रम में आदिवासी समुदाय के प्रमुख व्यक्तियों और संतों को आमंत्रित किया गया है। पीएम का स्वागत भी आदिवासियों के पारंपरिक प्रतीक तीर-धनुष और ढोल से किया जाएगा। खरगौन में टंट्या मामा भील के नाम पर बनने वाले विश्वविद्यालय को भी आदिवासियों को साधने की नजर से देखा जा रहा है।










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