जयपुर

जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में आज 28वां अंगदान हुआ। धौलपुर के युवक अजीत पाल के ब्रेनडेड होने के बाद उसके परिजनों ने उसके अंग दान करने पर सहमति दी। इसके बाद मृतक युवक की एक किडनी सवाई मानसिंह हॉस्पिटल में ही एक मरीज को लगाई गई। दूसरी किडनी और लिवर जयपुर में ही संतोकबा दुर्लभजी मेमोरियल हॉस्पिटल में भर्ती एक ही मरीज को लगाई गई। दिल का रिसीवर राजस्थान में नहीं होने के कारण वो डोनेट नहीं किया जा सका।
सवाई मानसिंह हॉस्पिटल के नोडल ऑफिसर ऑर्गन ट्रांसप्लांट डॉ देवेंद्र पुरोहित ने बताया- अजीत पाल का 24 दिसम्बर की शाम को राजाखेडा, धौलपुर में किसी रिश्तेदार से मिलकर अपने घर लौटने के दौरान एक्सीडेंट हो गया था। बाइक के सामने जानवर के आ जाने से अजीत असंतुलित होकर गिर गया था।, जिससे उसके तेज चोट आई। गंभीर घायल हो जाने पर उसे आगरा के रेनबो अस्पताल में भर्ती करवाया, जहां से उन्हें 25 दिसंबर को सवाई मानसिंह हॉस्पिटल जयपुर रैफर किया गया।
सवाई मानसिंह के डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बावजूद भी अजीत पाल को बचा पाना संभव नहीं हो पाया। उन्हें ब्रेन डैड घोषित कर दिया। डॉ. पुरोहित ने बताया कि डॉक्टरों और ट्रांसप्लांट कोर्डिनेटर्स की समझाइश के बाद अजीत पाल की मां चंद्रवती, पत्नी सुमन और अन्य रिश्तेदारों ने अंगदान की सहमति दी। उन्होंने बताया कि ये एसएमएस का 28वां और प्रदेश का 55वां अंगदान है।
एक ही मरीज के मल्टी ऑर्गन ट्रांसप्लांट
डॉक्टर पुरोहित ने बताया कि स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन राजस्थान की ओर से अंगों का आवंटन किया गया। इसमें अजीत पाल की एक किडनी सवाई मानसिंह हॉस्पिटल में भर्ती एक मरीज को दान की गई। जबकि दूसरी किडनी और लिवर संतोकबा दुर्लभजी मेमोरियल हॉस्पिटल में भर्ती एक ही मरीज को दान करके लगाई गई। उन्होंने बताया कि ये दूसरा केस है, जब एक ही मरीज को मल्टी ऑर्गन ट्रांसप्लांट किया गया है।
इससे पहले सीतापुरा स्थित महात्मा गांधी में एक मरीज को एक साथ दो अंग प्रत्यारोपित किए गए थे। उन्होंने बताया कि दिल को भी डोनेट करना था, लेकिन प्रदेश में कोई इस ग्रुप का रिसीवर नहीं मिला।






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