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80 करोड़ के गबन के 14 आरोपी 2 साल से फरार, मुख्य आरोपी की तलाश रहे संपत्तियां / Shivpuri News

शिवपुरी सीसीबी (कोऑपरेटिव सेंट्रल बैंक) शाखा कोलारस से चपरासी राकेश पाराशर द्वारा जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शिवपुरी के 80.52 करोड़ के सबसे बड़े बैंक गबन में दो साल पहले अपराध पंजीबद्ध हुआ। इतना बड़ा गबन होने के बावजूद पुलिस विवेचना धीमी गति से चल रही है।

जांच अधिकारी के मुताबिक राकेश पाराशर और उसके परिजनों के नाम से प्रदेश भर में संपत्तियां खरीदी गई हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। गबन की राशि के हिसाब से रिकवरी भी उतनी कराना है। जिले में सबसे बड़े गबन को अंजाम देने वाला चपरासी राकेश पाराशर जेल में बंद है। लेकिन पाराशर की इस करतूत का खामियाजा पूरे जिले में सीसीबी शाखाओं से जुड़े सभी बैंक खाता धारक और सोसायटियों से जुड़े हजारों किसानों को भुगतना पड़ रहा है। दो साल बाद भी गबन की राशि की रिकवरी नहीं हो पाने की वजह से हर कोई परेशान है। विवेचना में पुलिस अभी संपत्तियां ही तलाशने में जुटी है। इस गबन में परिवार के दूसरे सदस्य भी भागीदार रहे, लेकिन अब तक उनको भी विवेचना में अपराधी नहीं बनाया जा सका है। इस बैंक गबन पर पूरे जिले की निगाह है। अहम मुद्दा संपत्तियां तलाश कर रिकवरी करना है। लेकिन दो साल में ज्यादा कुछ हासिल नहीं हो पाया है। बता दें कि मार्कफेड से उधार खाद लेकर सीसीबी बैंक ने 22.24 करोड़ रु. नहीं लौटाए हैं।

आगे उधार खाद नहीं मिलेगा, जिससे जिले में खाद के लिए किसानों का परेशान होना लाजमी है। खाद के लिए विरोध, चक्काजाम जैसे हालात देखने को मिल सकते हैं। कलेक्टर के प्रयास से अभी तक सिर्फ 7 लाख वसूले जा सके, 6 लाख जमा करने का वादा चपरासी राकेश पाराशर ने कैशियर के चार्ज में सीधे बैंक से अपने भाई, अपने नौकर व अन्य परिचितों के खातों का इस्तेमाल करके गबन को अंजाम दिया है। संबंधित लोगों के खातों के जरिए जिन सैकड़ों लोगों को भुगतान हुए हैं, जिनसे रिकवरी के लिए कलेक्टर शिवपुरी द्वारा नोटिस जारी कर तलब किया। इस दौरान करीब 7 लाख रु. जमा हो चुके हैं और 6 लाख रु. जमा कराने का वादा किया है। लेकिन हाईकोर्ट से स्टे आने के बाद वसूली की प्रक्रिया फिलहाल रुक गई है। भोपाल से परिवार के सदस्यों के नाम से प्रोपर्टी की जानकारी मंगाई है

राकेश पाराशर के परिवार के सदस्यों के अकाउंट की डिटेल ली है, ज्यादा ट्रांजेक्शन नहीं है। उनकी प्रोपर्टी की जानकारी मंगा रहे हैं। केवल शिवपुरी नहीं, पूरे मप्र में कई जगह प्रोपर्टी खरीदी हैं, जिसकी भोपाल से जानकारी मंगा रहे हैं। जानकारी आने में समय लग रहा है। इनकम टैक्स से भी जानकारी मंगाई, वह भी नहीं आई है। जानकारी आने के बाद आगे की कार्रवाई करेंगे। – विजय सिंह यादव, एसडीओपी, अनुविभाग कोलारस दूसरे चेन लिंक से हम 7 लाख वसूल चुके हैं, 6 लाख रु. देने का वादा है

दूसरे चेन लिंक से हम 7 लाख रु. वसूल चुके हैं, 6 लाख रु. जमा कराने का वादा है। कुछ लोग हाईकोर्ट गए हैं। हम लोग लगे हुए हैं। बैंक में नए सीईओ आ गए हैं, उम्मीद है कि कुछ अच्छा होगा। कोऑपरेटिव में भी वसूली के मामले चल रहे हैं, जो सुनवाई में है। – रवींद्र कुमार चौधरी, कलेक्टर शिवपुरी विवेचना के लिए टीम बनाई हुई है, एसडीओपी जांच कर रहे हैं

सीसीबी बैंक शाखा कोलारस का बड़ा मामला है। कागज आदि लेने पड़ते हैं। विवेचना के लिए टीम बनाई है, एसडीओपी जांच कर रहे हैं। इसमें आगे कुछ ना कुछ करवाते हैं। – रघुवंश कुमार सिंह भदौरिया, पुलिस अधीक्षक शिवपुरी तत्कालीन जीएम, सीबीएस प्रभारी सहित अन्य की गिरफ्तारी नहीं हुई, 14 को निलंबित किया सीसीबी शिवपुरी के तत्कालीन जीएम एसएस कुशवाह, डीके सागर, वायके सिंह, लता कृष्णन सहित सीबीएस प्रभारी प्रभात भार्गव, मुख्य ब्रांच के लेखा शाखा प्रभारी राम प्रकाश त्यागी, सहायक लेखापाल हरिवंश शरण श्रीवास्तव, अन्य कर्मचारियों सहित कुल 14 को निलंबित किया गया। मामले में अपराध भी पंजीबद्ध हुआ है, लेकिन संबंधितों की पुलिस अभी तक गिरफ्तारी नहीं कर पाई है। पिंकी व पवन जमानत पर बाहर, राकेश ब्रांच मैनेजर राजपूत सहित जेल में दो साल में पुलिस करीब 9 से 10 लोगों की गिरफ्तारी बता रही है। इनमें चपरासी राकेश पाराशर, पिंकी यादव, पवन यादव, रवि रजक, सुनील सेन, सलीम खान, गोलू खान, रमेश राजपूत आदि शामिल हैं। वहीं पिंकी व पवन सहित अन्य जमानत पर बाहर आ चुके हैं। वहीं राकेश पाराशर और तत्कालीन ब्रांच मैनेजर राजपूत फिलहाल जेल में बताए जा रहे हैं।

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