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नावालिग को बालिग बनाकर लगाया चैक का दावा, कोर्ट ने किया खारिज / Shivpuri News

शिवपुरी: शिवपुरी के न्याकयाधीश जे0एम0एफ0सी0 श्री अमित प्रताप सिंह ने एक चैक का मामला निरस्ति कर दिया. जिसमें परिवादी द्वारा अभियुक्तच को बालिग बताकर न्याायालय के समक्ष दावा प्रस्तुेत किया था. जिसमें बाद में अभियुक्तब के अधिवक्ताह भरत ओझा ने अभियुक्तक के नावालिग होने के दस्तातवेज पेश किये जिस पर से परिवादी का परिवाद निरस्त‍ किया गया। उक्त प्रकरण में महत्व पूर्ण तथ्यि ये थे कि परिवादी अभियुक्तद को पहचानता भी नहीं था और परिवादी ने एक 16 वर्षीय नावालिग का चैक बैंक में प्रस्‍तुत कर बाउंस कराया और दावा न्यावयालय में प्रस्तुपत किया। मजदार बात तो ये थी कि उक्त दावे में प्रस्तुवत नोटिस जो अभियुक्ति को भेजा गया था उसमें अभियुक्ते की उम्र 47 वर्ष लेख की गयी थी जबकि अभियुक्तअ का खाता अव्यउस्क् खाता था और वह नावालिग था। जिस समय खाता खुला उस समय उसकी उम्र 16 वर्ष थी और जब चैक का दावा लगाया उस समय पर भी अभियुक्त नावालिग था। अभियुक्ती की ओर से पैरवी भरत ओझा एडवोकेट द्वारा की गयी।
संक्षेप में मामला इस प्रकार है कि परिवादी रविराज ने अपने दावे में बताया कि परिवादी रविराज शर्मा से अभियुक्ती गिर्राज धाकड को 1 लाख रूपये नगद व्यभवसाय एवं खेती के कार्य हेतु उधार प्राप्तर किये थे जिसके भुगतान हेतु अभियुक्ता ने 50-50 हजार के आई डी बी आई दो चैक परिवादी को दिये थे जिसे बैंक में प्रस्तुयत करने पर बाउंस हो गया जिसका नोटिस परिवादी द्वारा अभियुक्तय को दिया गया जिसमें अभियुक्त की उम्र 47 वर्ष लेख की गयी थी इसके पश्चाात परिवादी द्वारा धरा 138 एन आई एक्टय का दावा माननीय न्यारयालय के समक्ष प्रस्तु त किया गया। उक्ती प्रकरण में अभियुक्ता ने अपने अधिवक्ताय भरत ओझा के माध्य म न्या यालय में उपस्थित होकर अपनी जमानत प्रस्तु्त की। जमानत प्रस्तुतत उपरांत अभियुक्तन के अधिवक्ताह भरत ओझा द्वारा न्यानयालय के समक्ष धारा 26 एन आई एक्टा के तहत एक आवेदन प्रस्तुतत किया साथ में अभियुक्ते की कक्षा 5,8,10,12, की अंकसूची व वोटर कार्ड, आधार कार्ड एवं पेन कार्ड प्रस्तु‍त किये गये। साथ ही आवेदन में कहा गया कि अभियुक्त‍ का खाता चाईल्डा का खाता है और उसकी उम्र 16 वर्ष है और जिस समय चैक का दावा न्या‍यालय में प्रस्तु्त किया उस समय भी अभियुक्त की उम्र 16 वर्ष थी और उस समय अभियुक्तस नावालिग होकर अपनी पढाई कर रहा था और भी नावालिग किसी भी प्रकार का लेन देन व चैक का सम्य्लि वहार नहीं कर सकता है और न ही उसके विरूद्ध कोई भी चैक का दावा न्या यालय में चल सकता है, खारिज करने का निवेदन किया। उक्तच आवेदन पर से न्याेयालय ने जांच प्रारंभ की और जांच में बैंक मेनेजर, अभियुक्ते के पिता व स्कू‍ल का एडमीशन रजिस्टनर्ड मंगाया गया। उक्ते सभी तथ्यों को ध्यायन में रखते हुये न्याकयालय ने ये पाया कि यह दावा गलत रूप से प्रस्तुसत किया गया है परिवादी अभियुक्तर को जानता भी नहीं है और न ही अभियुक्तप नावालिग की दशा में परिवादी से कोई सम्य्हुयवार भी नहीं कर सकता है। इन आधारों पर न्यालयालय ने परिवादी का परिवाद प्रचलनशील न होने से निरस्तत कर दिया।

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