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नगरपालिका में काम किए बगैर 15 लाख रुपये वेतन ले रहे सफाईकर्मी और पंप अटेंडर्स / Shivpuri News

शिवपुरी। नगर पालिका की सफाईकर्मी मिथलेश 72 महीने यानी छह वर्ष से अनुपस्थित थीं तो गौतम 48 महीने यानी चार साल से गायब था। इतने लंबे समय से काम से गायब होने के बाद भी कागजों में यह नगर पालिका के कर्मचारी थे।

यह दो तो महज उदाहरण हैं जबकि हकीकत में बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी हैं जो सिर्फ कागजों में नगर पालिका अमले की संख्या बढ़ा रहे हैं। मजे से वेतन ले रहे हैं और काम से पूरी तरह से गायब हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या सफाईकर्मियों और पंप अटेंडर्स की है जो सिर्फ हाजिरी लगा रहे हैं और कुछ वह भी नहीं कर रहे हैं। अब नगर पालिका ने ऐसे कर्मचारियों से मुक्ति पाने के लिए पहल की है।


18 सफाईकर्मी किए गए थे पृथक

बीते दिनों सीएमओ ने रिकार्ड खंगालकर 18 सफाईकर्मियों को पद से पृथक कर दिया। अब सभी पंप अटेंडर्स और सफाईकर्मियों के रिकार्ड खंगाले जा रहे हैं। जो लोग रिकार्ड दुरुस्त रखकर काम से गायब हैं उनके लिए टीम गठित कर औचक निरीक्षण की योजना बनाई गई है।

सूत्रों की मानें तो करीब 100 ऐसे कर्मचारी हैं जो सिर्फ कागजों में तैनात हैं। इसमें से अधिकांश की नियुक्तिां राजनीतिक प्रभाव में हुई हैं और इसी कारण कार्रवाई से भी बचे रहते हैं। वर्तमान में नपा में 400 से अधिक सफाईकर्मी और करीब 300 पंप अटेंडर हैं।


400 से अधिक सफाईकर्मी, फिर भी वार्ड में कमी
रिकार्ड के अनुसार नगर पालिका में 400 से अधिक सफाईकर्मी हैं, लेकिन इसके बाद भी कई वार्ड में पार्षदों को पर्याप्त संख्या में सफाईकर्मी नहीं मिल पा रहे हैं। इसका कारण है कि बड़ी संख्या में कर्मचारी कागजी हैं। नपा से जुड़े सूत्र बताते हैं कि कई सफाई दरोगाओं ने अपने स्वजनों और रिश्तेदारों को भी सफाईकर्मी बना दिया है। यही उनकी हाजिरी लगा देते हैं और कर्मी मौके से गायब रहते हैं। उपयंत्री और जोन प्रभारी भी भौतिक सत्यापन कर अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहे हैं जिससे इनका भी दुस्साहस बढ़ता है।

पंप अटेंडर्स के पास करने के लिए काम ही नहीं
नगर पालिका में पंप अटेंडर के नाम पर चहेतों को बड़ी संख्या में भर्ती कर दिया गया था। नगर पालिका इनके वेतन पर लाखों रुपये खर्च करती है, लेकिन इनमें से अधिकांश के पास काम ही नहीं है। परिषद गठन के पहले प्रशिक्षु आइएएस काजल जावला ने सभी पंप अटेंडर्स को तलब कर लिया था। इनकी जांच में पाया गया कि अधिकांश पंप अटेंडर्स के पास पर्याप्त काम नहीं है।


मेन पावर का सही इस्तेमाल करने के लिए नपा के इंजीनयिरों को आदेश दिए थे कि ऐसा प्रस्ताव बनाया जाए, जिनमें पंप अटेंडर्स से नपा के अन्य काम लिए जाएं। हालांकि इस पर अमल नहीं हुआ।

नपा में करीब 300 पंप अटेंडर हैं जो पांच हजार रुपये महीना तक औसतन वेतन लेते हैं। इनके वेतन पर ही नपा पर करीब 15 लाख का बोझ पड़ता है। ऐसे कर्मचारियों को चिह्नित करने के लिए पूरा रिकार्ड खंगालना होगा और औचक निरीक्षण भी जरूरी है। इस पर काम शुरू कर दिया है और ऐसे लोगों को चिह्नित कर रहे हैं जो लंबे समय से काम नहीं कर रहे हैं। इनकी छंटनी की जाएगी। इसी क्रम में कुछ सफाईकर्मियों पर कार्रवाई भी कर दी है जो आगे भी जारी रहेगी। केशव सिंह सगर, सीएमओ

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