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ठेकेदार के हाथों आर्थिक शोषण का शिकार हो रहा NRC का स्टाफ, बेरोजगार करने की तैयारी में स्वास्थ्य विभाग / Shivpuri News

शिवपुरी: मध्य प्रदेश स्थापना दिवस 01 नबम्बर से ठीक एक दिन पहले 31 अक्टूबर 2022 को महिला शक्ति की प्रतीक इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय शिवपुरी में कुछ महिलाएं और युवतियां खासी परेशान और बदहवास दिखाई पड रही थी। यह महिलाएं शिवपुरी जिले के अलग- अलग विकासखंडों से आई थीं। जिनकी चिंता का कारण उनके और उनके बच्चों के जीवन यापन पर मंडराता बेरोजगार होने दंश था। बकौल एनआरसी स्पोर्ट स्टाफ इसकी वजह शिवपुरी जिले का स्वास्थ्य महकमा बनने जा रहा है।
जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग द्वारा बर्ष 2007-08 में पडोसी जिले श्योपुर में हुई कुपोषित बच्चों की मौत से मचे तांडव के बाद शिवपुरी जिले के तत्कालीन कलेक्टर डॉ. मनोहर अगनानी के प्रयासों से कुपोषित बच्चों के पुर्नबास के लिए कुपोषण पुर्नबास केन्द्रों की स्थापना की गई। इन केन्द्रों का शुरूआती दौर में समाज सेवी संस्थाओं के माध्यम से संचालन कराया गया। उसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने इनके संचालन की जबावदेही संभाली और समाज सेवी संस्थाओं द्वारा नियुक्त किए गए स्टाफ को अनुभवी मानते हुए सेवा में निरंतर रखा गया। इनका भुगतान रोगी कल्याण समिति के मद से किया जाने लगा। बर्ष 2017 में मध्य प्रदेश शासन ने पृथक से एनआरसी के लिए बजट का प्रबंध किया और उस समय पदस्थ स्टाफ को निरंतर करते हुए नवीन स्टाफ पदस्थापना के लिए नए नियम बनाए गए, लेकिन बर्ष 2017 में जारी उन नियमों को अपने मनमाफिक तरीके से परिभाषित कर लगभग 12 बर्ष से पदस्थ स्टाफ को सबसे पहले आउटसोर्स पर अर्थात ठेकेदार के अधीन कर दिया दिया गया और उसके बाद हटाए जाने की कबायत स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्थानीय स्तर पर प्रारंभ की गई। ठेकेदार के हाथों आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे एनआरसी स्पोर्ट स्टाफ को शैक्षणिक दस्तावेज उपलब्ध कराने का मौखिक फरमान दे दिया गया। इसके साथ ही ठेकेदार फर्म जीवन मित्रा द्वारा नए स्टाफ भर्ती की विज्ञप्ति छपबाकर बटवा दी गई । जिसमें उन स्थानों में भी स्टाफ पदस्थ करने के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे जहां पहले से स्पोर्ट स्टाफ पदस्थ है। इससे स्पोर्ट स्टाफ के रूप में 12 साल से सेवाएं दे रहीं करैरा, कोलारस, पिछोर, खनियाधांना की महिला कर्मियों में भय का महौल बन गया। कई की जीवन गृहस्थी इसी छोटी सी अस्थाई नौकरी से चलती है जिसके बंद हो जाने से घर के राशन से लेकर बच्चों की शिक्षा पर संकट का आने की कल्पना मात्र से भयभीत होकर स्पोर्ट स्टाफ महिलाएं एवं युवतियां मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय जा पहुंची। जहां चेहरों पर चिंता की लकीरें लिए बदहबास सी खडी यह महिलाएं से जब हमारे संवाददाता ने बात की तो उन्होंने नाम न छापने की विनय कर बताया कि उन्हें सालों काम करने के बाद बेरोजगार करने का कार्य एक बाबू की सांठगांठ से ठेकेदार द्वारा किया जा रहा है। उनके द्वारा आज नए आवेदन करने वालों के साथ पुराने कर्मचारियों को भी बुलाया गया है। हालांकि सुबह से भूखे प्यासे बैठे महिला कर्मचारियों की सुनने के लिए कोई अधिकारी और न ही बाबू उपलब्ध था। इस बिषय में जब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ पवन जैन से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन मोबाइल कबरेज एरिया के बाहर बताता रहा।
यहां यह उल्लेख करना भी आवश्यक है कि यह चुनावी बर्ष है और इस बर्ष जहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक लाख बेरोजगारों को रोजगार के अवसर मुहैया कराने की बात कह रहे हैं वहीं स्वास्थ्य विभाग का यह कारनाम भाजपा के लिए गले की फांस न बन जाए।

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