एनजीटी ने कलेक्टर और एसपी को दिए सख्त निर्देश, टेंडर निरस्त करने को भी कहा
शिवपुरी के माधव नेशनल पार्क की सीमा के दो किमी तक की परिधि के क्षेत्र को ईको सेंसेटिव जोन घोषित किया है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह की कोई व्यवसायिक गतिविधि संचालित नहीं हो सकती, इसके बाबजूद शिवपुरी जिला प्रशासन ने इस क्षेत्र में खदान संचालन के लिए टेंडर आमंत्रित कर लिए। इस मामले को शिवपुरी के अधिवक्ता अभय जैन ने एनजीटी न्यायालय में लगा दिया। मामले में न्यायालय ने अब सुनवाई करते हुए कलेक्टर और एसपी को आदेश दिए हैं कि वह नेशनल पार्क की दो किमी की परिधि में संचालित सभी वैध अवैध खदानें जल्द से जल्द बंद करवाई जाएं।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2017 में नेशनल पार्क के दो किमी तक के क्षेत्र को ईको सेंसेटिव जोन घोषित किया है। इसके बाबजूद वर्ष 2021 में शिवपुरी कलेक्टर ने मझेरा के सर्वे नंबर 314, 316, 318, 357, 357/1, 358/1 में खदान संचालन के लिए निविदा अामंत्रित की। इस बात की शिकायत अधिवक्ता अभय जैन ने एनजीटी के दर्ज करा दी। इसके बाद यह पूरी टेडर प्रक्रिया रोक दी गई। शिकायत के बाद एनजीटी ने पर्यावरण, कलेक्टर, कमिश्नर, वन विभाग, जल संसाधन के अधिकारियों की टीम बनाकर मौके की रिपोर्ट बनाकर पेश करने काे कहा। टीम ने एनजीटी न्यायालय में रिपोर्ट पेश की। उक्त रिपोर्ट के आधार पर एनजीटी ने मामले की सुनवाई करते हुए कलेक्टर और एसपी को ईको सेंसेटिव जोन में संचालित सभी वैध अवैध खदान बंद करने के निर्देश जारी किए हैं। इस मामले में एनजीटी ने अगली सुनवाई के लिए 16 जनवरी 2023 को
दो किमी की परिधि में पाया गया खदानों का संचालन
कलेक्टर ने जिन सर्वे नंबर पर खदान संचालन के लिए टेंडर आमंत्रित किए थे। उन सभी सर्वे नंबर की नेशनल पार्क से दूरी के बारे में एनजीटी ने जानकारी चाही थी। टीम ने अपनी रिपोर्ट में जानकारी दी कि यह सभी खदानें नेशनल पार्क सीमा की दो किमी की परिधि में हैं। ऐसे में एनजीटी ने कलेक्टर को निर्देशित किया है कि यह सभी टेंडर निरस्त करने काे कहा है। अब इन सर्वे नंबर पर भविष्य में भी भी खदानें संचालित नहीं हो सकेंगी।
संचालक खनिज को गड्ढे भरने और पौध रोपण के निर्देश
कमेटी ने जो रिपोर्ट न्यायालय में पेश की उसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में जिस खदान संचालक ने यहां पर उत्खनन किया था। उक्त खदान संचालक ने यहां से खनन करने के उदपरांत गड्ढों को नहीं भरा है। ऐसे में एनजीटी ने खनिज संचालक भोपाल को निर्देश दिए हैं कि वह तीन माह के अंदर माइनिंग क्लोजर प्लान के तहत न सिर्फ खदान के गड्ढों को भरवाएं बल्कि वहां पर पौध रोपण भी करवाएं। इसके साथ ही उन्होंने आदेश में उल्लेख किया है कि खदान के गड्ढे भरने और पौध रोपण पर होने वाले खर्च को पूर्व में वहां खदान संचालित करने वाले खदान संचालक से वसूल किया जाए।
पानी में लोह तत्व की अधिकता क्यों, कराओ जांच
जांच रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि इस क्षेत्र में पानी में लोह तत्व की अधिकता है। ऐसे में इस क्षेत्र का पानी पीने योग्य नहीं है। इस पर एनजीटी ने भू-जल बोर्ड को निर्देश जारी किए हैं कि इस बात की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए कि यहां पर पानी में लोह तत्व की अधिकता क्यों है? इसकी रिपोर्ट तीन माह में न्यायालय के समक्ष पेश की जाए।

माधव नेशनल पार्क के दो किमी की परिधि में संचालित सभी वैध-अवैध खदान बंद करवाओ / Shivpuri News
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