Press "Enter" to skip to content

संविधान दिवस के अवसर पर स्वास्थ जांच शिविर आयोजित एवं गामीणों को जागरुक किया / Shivpuri News

हमारा सविधानं विश्व का सवसे बड़ा एवं एकता के सूत्र में बांधने वाला संविधान है- डा0 नीरज सुमन 
हमारे जो 6 मौलिक अधिकार है वह सविंधान की देन है – डा. यशस्वी मेहता
शिवपुरी। आज के दिन भारतीय संविधान दिवस मनाया जाता है। संविधान दिवस के मौके पर  ग्राम नया बलारपुर में आज गर्भवती माताओं, कुपोषित बच्चों एवं किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य जी जांच कि लिए शिविर का आयोजन शक्तिशाली महिला संगठन , स्वास्थ्य विभाग एवं महिला बाल विकास विभाग ने मिलकर किया जिसमें कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सतनवाड़ा के डाक्टर यशस्वी मेहता एवं डा0 नीरज सुमन ने सोसल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों को संबिधान की शक्ति के बारे में अवगत कराया एवं जो 6 मौलिक अधिकार है उनके वारे में महिलाओं को बताया जिसमें कि सभी समान है कोई अगर आपसे भेदभाव करता है तो आप इसकी शिकायत कर सकते है डा नीरज ने कहा कि बेटियों को पढ़ाने से रोक दिया जाता है जबकि लड़को के साथ ऐसा नही किया जाता । ऐसा करना समानता नही दिखाता हमको बेटा और बेटी दोनो को बगैर किसी भेदभाव के पालन पोषण करना चाहिए एवं उनको शिक्षिता करना चाहिए देखने मे आता है जो कुपोषित बच्चे होते है उनमे ज्यादातर लड़किया होती है क्योकि कि  समाज में अभी भी खिलाने में भी भेदभाव होता है । डा नीरत ने कहा कि हमारा संबिधान विश्व का सवसे वड़ा एवं सबको एकता के सूत्र में बाधने वाला संबिधान है जिसकी की रचना डा. भीमराव अंबेडकर ने की थी। डा0 यशस्वी मेहता ने कहा कि हमारे जो 6 मौलिक अधिकार है वह संबिधान की देन है हमको मिलकर गांव की बेटियों को शिक्षा के आगे आना होगा आज जब हमने बेटियों से अपने नाम लिखवा कर देखा तो केवल एक दो बालिकाओं ने ही अपने नाम लिखकर दिखाए इसके लिए हमारी जो पढ़ी लिखी न्यूट्रीशन चैम्पियन है वह इनको पढ़ाकर  समाज में बालिका शिक्षा की दिशा में बहुत अच्छा काम कर सकती है जिसकी कि शुरुआत आज ग्राम नया बलारपुर में की गई। शक्तिशाली महिला संगठन के सयंोजक रवि गोयल ने बताया कि 26 नवम्बर को हर साल संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है। बता दें की भारत के संविधान निर्माता डॉण् भीमराव अम्बेडकर को जाना जाता है। डा0 अम्बेडकर  ने भारतीय संविधान के रूप में दुनिया का सबसे बड़ा संविधान तैयार किया। भारतीय संविधान को दुनिया के सभी संविधानों को परखने के बाद बनाया गया। दुनिया के संविधानों में से अलग.अलग कानून और आर्टिकल लेकर इसका निर्माण हुआ। इसे विश्व का सबसे बड़ा संविधान माना जाता हैए जिसमें 448 अनुच्छेदए 12 अनुसूचियां और 94 संशोधन शामिल हैं। यह हस्तलिखित संविधान है जिसमें 48 आर्टिकल हैं। इसे तैयार करने में 2 साल 11 महीने और 17 दिन का वक्त लगा था। 26 नवंबर 1949 को भारतीय संविधान सभा की तरफ से इसे अपनाया गया और 26 नवंबर 1950 को इसे लोकतांत्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया। यह वजह है कि 26 नवंबर को संविधान दिवस के तौर पर मनाया जाता है। 
     कार्यक्रम में संस्था के प्रमोद गोयल ने  कहा कि  संविधान की बातों पर धयान देना हमारे सर्वश्रेष्ठ हित में है और अगर हम ऐसा नहीं करेंगे तो हमारा घमंड तेजी से अव्यवस्था में तब्दील हो जाएगा।  
आज जश्न मनाने का नहीं बल्कि संविधान में किए गए वादों की परीक्षा लेने का वक्त है।  उन्होने कहाए क्या आज भी ग्रामीण क्षेत्रो में लड़कियों को बेहतर शिक्षा के साधन उपलब्ध हो पा रहे है जिनकी वह हकदार है। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को  संबिधान द्वारा दिए गए मौलिका अधिकारों की उचित जानकारी नही है जिनको कि आज संस्था के द्वारा सही सटीक जानकारी प्रदान की। ये ऐसे प्रश्न हैं जिन्हें मैं खुद से पूछता हूं। निसंदेह काफी तरक्की हुई है लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। आज हमें सिर्फ जश्न नहीं मनाना चाहिए बल्कि भविष्य के लिए एक खाका तैयार करना चाहिए।ष्ष् कार्यक्रम में डा0 नीरज सुमन, डा. यशस्वी मेहता, कार्यक्रम संयोजक रवि गोयल, हेमन्त कुमार, प्रमोद गोयल, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती रंजना सिकरवार, सहायिका अंगरी आदिवासी, सुपोषण सखी सनवाई, राजाबेटी, पपीता एवं गजरी आदिवासी के साथ किशोरी बालिकाओं ने भागीदारी की।
More from Fast SamacharMore posts in Fast Samachar »

Be First to Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!